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लालू-अखिलेश के माई समीकरण को कमजोर करने में जुटी भाजपा 

Wed, 02 Aug 2017 08:41 PM IST
संजय मिश्र/नई दिल्ली
संजय मिश्र/नई दिल्ली Updated Wed, 02 Aug 2017 08:41 PM IST
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BJP trying to weakening Muslim-Yadav equation in UP and Bihar
lalu yadav and akhilesh yadav - फोटो : indiatoday

हार को जीत में बदलने की बाजीगरी के पुरोधा बन चूके पीएम मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने ओबीसी विधेयक के मामले को लेकर एक और शानदार सियासी दांव चला है। ओबीसी बिल पर राज्यसभा में सरकार को मिली फजीहत का रोना रोने के बजाय भाजपा ने यूपी,बिहार की राजनीति के लिए अहम माने जा रहे लालू—मुलायम के माई समीकरण पर ही चोट कर दिया है।

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लालू- अखिलेश के माई (मुस्लिम-यादव) समीकरण को कमजोर करने की कवायद में भाजपा ने राज्यसभा की अपनी विफलता को पिछड़ा बनाम अल्पसंख्यक की जंग का सियासी रंग दे दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर यूपी-बिहार में अखिलेश और लालू की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। दोनों ही नेता अपने प्रदेशों में मुस्लिम और यादव (माई) समीकरण के जरिए अपनी पकड़ मजबूत बनाते हैं। मगर भाजपा ने इस माई समीकरण को ध्वस्त करने की कवायद शुरू कर दी है।

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भाजपा ने लालू-अखिलेश के माई समीकरण के खिलाफ कुछ यूं चला दांव 

BJP trying to weakening Muslim-Yadav equation in UP and Bihar
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह - फोटो : amar ujala

सोमवार को राजग सांसदों की अनुपस्थिति के वजह से राज्यसभा में सरकार को फजिहत झेलना पड़ा था। पीएम मोदी के प्रिय पिछड़ा वर्ग विधेयक पर कांग्रेस का संशोधन प्रस्ताव स्वीकार हो गया। बावजूद इसके बैकफुट पर जाने के बजाय भाजपा ने शानदार दांव चलते हुए लालू और अखिलेश की भावी राजनीति की राह में रोड़ा अटका दिया है।

लालू-अखिलेश के माई समीकरण पर चोट करते हुए भाजपा ने पिछड़ा वर्ग आयोग संविधान संशोधन विधेयक में कांग्रेस के जरिए किए गए संशोधन को पिछडा बनाम अल्पसंख्यक का रंग दे दिया है। पार्टी ने भावी राजनीति को ध्यान रखते हुए रणनीति के तहत ही भूपेंद्र यादव और हुकूम देव नारायण यादव सरीखे नेताओं को मोर्चे पर उतारा।

दोनों ही नेता पिछड़ा वर्ग के यादव बिरादरी से हैं। और यूपी—बिहार की राजनीति में यादव बिरादरी के वोट की एक बडी संख्या है। जिसके दम पर राजद और सपा की राजनीति चलती है। लेकिन भाजपा ने ओबीसी आयोग की हारी जंग को पिछड़ा बनाम अल्पसंख्यक का रंग देकर लालू—अखिलेश की मुश्किलें बढाने की बिसात बिछा दी है। बताया जा रहा है कि ओबीसी आयोग के जरिए शुरू हुई अल्पसंख्यक बनाम पिछड़ा के जंग को भाजपा अब  यूपी और बिहार में निचले स्तर तक लेकर जाएगी। 

विवाद पर क्या कह रही भाजपा 
ओबीसी आयोग पर संसद में मिली मात को अल्पसंख्यक बनाम पिछड़ा वर्ग की जंग का रंग देते भाजपा ने कहा है कि संविधान के किसी भी नियम में यह नहीं कहा गया है कि कानून में किसी एक वर्ग को शामिल कर अन्य वर्गों को बाहर कर दिया जाए। पार्टी का कहना है कि सरकार ने ओबीसी आयोग के गठन के मामले में भी राष्ट्रीय अनुसूचित जाति तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोगों सरीखे ही नियम बनाए हैं।

मगर पिछडा विरोधी मानसिकता के वजह से कांग्रेस ने ओबीसी आयोग विधेयक में संशोधन कराया है। दरअसल देश के पिछड़ा वर्ग को साधने की कवायद में पीएम मोदी ने पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर नई संवैधानिक व्यवस्था लाने का दांव चला था। मगर संसद में मिली मात को भाजपा ने विपक्ष के खिलाफ इसे सियासी औजार के रूप में आगे कर दिया है। 

क्यूं छिड़ी अल्पसंख्यक बनाम पिछड़ी की जंग

BJP trying to weakening Muslim-Yadav equation in UP and Bihar
राज्य सभा - फोटो : SELF
दरअसल सोमवार को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग संविधान संशोधन विधेयक कांग्रेस के संशोधन के साथ राज्यसभा से पारित हुआ। सरकार के 30 राज्यसभा सदश्यों के सदन से गैरहाजिर रहने के वजह से ऊपरी सदन ने विधेयक के तीसरे महत्वपूर्ण खंड तीन को खारिज करते हुए शेष विधेयक को जरूरी दो तिहाई मतों से पारित कर दिया।

तीसरे खंड में कांग्रेस के संशोधनों को संसद ने 54 के मुकाबले 75 मतों से मंजूरी दे दी। इस संशोधन के बाद प्रस्तावित आयोग में एक सदस्य अल्पसंख्यक वर्ग से और एक महिला सहित पांच सदस्य होंगे। जबकि विधेयक के मूल में महज अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित तीन सदस्यीय आयोग का प्रस्ताव किया गया था।

कांग्रेस के जरिए अल्पसंख्यक सदस्य की नियुक्ति के प्रावधान को भाजपा ने अब अल्पसंख्यक बनाम पिछड़ा के रूप में प्रचारित करना शुरू कर दिया है। अगर तकनीक रूप से देखें तो अपने सपनों का आयोग बनाने के लिए सरकार को करीब 9 माह का इंतजार करना पड़ेगा। इससे बेहत्तर है कि भाजपा ने विपक्ष को अल्पसंख्यक बनाम पिछड़ा के सियासत में उलझा दिया है। इस विधेयक के दायरे में देशभर की पांच हजार से अधिक जातियां आती हैं।

पिछड़ा आयोग विधेयक पर गैरहाजिर सांसदों से पीएम नाराज 

राज्यसभा में पिछड़ा आयोग विधेयक के पारित किए जाने के समय संसद से नदारद रहे भाजपा सांसदों पर पीएम मोदी बेहद नाराज हैं। आने वाले दिनों में पीएम मोदी विधेयक पारित किए जाने के दौरान राज्यसभा से नदारद सांसदों और मंत्रियों को किसी न किसी बहाने दंडित कर सकते हैं। सूत्र बताते हैं कि पार्टी का शिर्ष नेतृत्व पिछडा आयोग विधेयक पर राज्यसभा में मिली मात के कारणों को करीब से विश्लेषण कर रहा है। विधेयक पर संसद में सरकार के फ्लोर प्रबंधकों की रणनीति भी पूछी गई है।

संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुख्त्तार अब्बास नकवी ने भाजपा नेतृत्व को बताया है कि संसद में सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने भरपूर कवायद की थी। सभी सांसदों को बकायदा चार बार संदेश भेजे गए। पार्टी के व्हीप की सूचना ईमेल के अलावा व्यक्तिगत फोन के जरिए भी सभी सांसदों को दी गई थी। बावजूद उसके राजग के करीब 31 सांसद राज्यसभा से गायब रहे। इसमें से 13 सांसद खुद भाजपा के थे। इसके अलावा राजग के सदस्यों में शिरोमणि अकाली दल, शिवसेना, टीडीपी आदि दलों के सदस्य हैं। इस बीच सांसदों और मंत्रियों ने गैरहाजिर रहने के जो जवाब दिए हैं उससे सरकार और भाजपा का शीर्ष नेतृत्व संतुष्ट नहीं है।

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