{"_id":"58d5af414f1c1b61371a2845","slug":"bjp-mp-subramanian-swamy-introduced-bill-at-rajya-sabha-seekin-death-penalty-for-cow-slaughter","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुब्रमण्यम स्वामी ने पेश किया गो हत्या पर मौत की सजा का विधेयक ","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
सुब्रमण्यम स्वामी ने पेश किया गो हत्या पर मौत की सजा का विधेयक
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली
Updated Sat, 25 Mar 2017 05:14 AM IST
विज्ञापन
सुब्रमण्यम स्वामी
- फोटो : Getty
उत्तर प्रदेश में बूचडख़ानों और गो हत्या करने वालों पर भाजपा की नई सरकार की कार्रवाई के बीच गायों की संख्या का स्थिरीकरण सुनिश्चित करने के लिए प्राधिकरण सृजित करने और गो हत्या के मामले में मौत की सजा के प्रावधान वाला एक निजी विधेयक शुक्रवार को राज्यसभा में पेश किया गया है।
भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने शुक्रवार को उच्च सदन में गौ संरक्षण विधेयक, 2017 पेश किया। इस विधेयक में गायों की संख्या का स्थिरीकरण सुनिश्चित करने और गौहत्या पर प्रतिबंध लगाने के लिए संविधान के अनुच्छेदों 37 और 48 का अनुपालन सुझाने के लिए एक प्राधिकरण सृजित करने का भी प्रावधान किया गया है। वहीं शिअद नेता नरेश गुजराल ने संसद विधेयक, उत्पादकता में वृद्धि 2017 पेश किया। इस विधेयक में संसद में व्यवधान के कारण आयी उत्पादकता में आयी कमी पर विधिक ढांचे के माध्यम से रोक लगाने और उसका समाधान खोजने की बात की गयी है।
नरेश गुजराल के इस निजी विधेयक में एक साल में संसद के सत्रों के दिवसों की न्यूनतम संख्या तय करने, मौजूदा तीन सत्रों के अतिरिक्त विशेष सत्र शुरू करने, व्यवधान के दौरान बर्बाद समय की क्षतिपूर्ति किए जाने पर भी बल दिया गया है। वहीं उपसभापति पी जे कुरियन ने यह विधेयक पेश किए जाने पर कहा कि उनकी राय तो यह है कि सदन में व्यवधान ही नहीं हो। उन्होंने कहा कि काफी पहले संसद की कार्यवाही 100 दिनों से भी ज्यादा चलती थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने शुक्रवार को उच्च सदन में गौ संरक्षण विधेयक, 2017 पेश किया। इस विधेयक में गायों की संख्या का स्थिरीकरण सुनिश्चित करने और गौहत्या पर प्रतिबंध लगाने के लिए संविधान के अनुच्छेदों 37 और 48 का अनुपालन सुझाने के लिए एक प्राधिकरण सृजित करने का भी प्रावधान किया गया है। वहीं शिअद नेता नरेश गुजराल ने संसद विधेयक, उत्पादकता में वृद्धि 2017 पेश किया। इस विधेयक में संसद में व्यवधान के कारण आयी उत्पादकता में आयी कमी पर विधिक ढांचे के माध्यम से रोक लगाने और उसका समाधान खोजने की बात की गयी है।
विज्ञापन
नरेश गुजराल के इस निजी विधेयक में एक साल में संसद के सत्रों के दिवसों की न्यूनतम संख्या तय करने, मौजूदा तीन सत्रों के अतिरिक्त विशेष सत्र शुरू करने, व्यवधान के दौरान बर्बाद समय की क्षतिपूर्ति किए जाने पर भी बल दिया गया है। वहीं उपसभापति पी जे कुरियन ने यह विधेयक पेश किए जाने पर कहा कि उनकी राय तो यह है कि सदन में व्यवधान ही नहीं हो। उन्होंने कहा कि काफी पहले संसद की कार्यवाही 100 दिनों से भी ज्यादा चलती थी।
विज्ञापन