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नोटबंदी पर जंग की पटकथा तैयार कर रहीं भाजपा-कांग्रेस

Mon, 06 Nov 2017 07:17 PM IST
शशिधर पाठक/ नई दिल्ली
शशिधर पाठक/ नई दिल्ली Updated Mon, 06 Nov 2017 07:17 PM IST
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BJP Congress is ready to oppose each other on note ban anniversary

आठ नवंबर 2016 को देश में लागू हुई नोटबंदी की पहली बरसी पर कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दल राजनीतिक जंग की पटकथा तैयार करने में जुट गए हैं। कांग्रेस देश भुगत रहा है की थीम पर जनता के दर्द को सामने रखने की तैयारी कर रही है, वहीं भाजपा इसे कालाधन रखने वालों, शेल कंपनियों, आतंकवाद तथा आर्थिक जगत की काली भेड़ों के खिलाफ सुधारात्मक बताने में जुटी है। इसके लिए केंद्र सरकार के करीब दर्जन भर मंत्रियों ने मोर्चा संभालने की तैयारी कर ली है। 

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सूत्र बताते हैं कि आठ नवंबर को विपक्ष की चाल धीमी करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काफी होमवर्क किया है। वह नोटबंदी के बाद कालाधन पर लगाम कसने के कुछ ठोस आंकड़ों के साथ सरकार का पक्ष रखने की तैयारी कर रहे हैं। वित्तमंत्री अरुण जेटली, रेल एवं कोयला मंत्री पीयूष गोयल, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री स्मृति ईरानी ने अपने स्तर से तैयारी तेज कर दी है। वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता भी सरकार का पक्ष रखने के लिए तैयार हैं।
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कांग्रेस के साथ नहीं अलग से विरोध करेगी AAP
राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता शरद यादव नोटबंदी के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए मोर्चा संभालेंगे। शरद यादव कांग्रेस की अगुआई में एकजुट हुए विपक्षी दलों के साथ काला दिवस मनाएंगे। इस विरोध में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी भी शरीक होना चाहती थी, लेकिन कांग्रेस पार्टी की ना नुकुर के बाद वह अलग से नोटबंदी का विरोध करेगी।
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आठ नवंबर को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी नोटबंदी के खिलाफ हुंकार भरेंगे। राहुल ने पहले ही आठ नवंबर को काला दिवस के रूप में मनाने की घोषणा कर रखी है। इस विरोध में एनसीपी, वामदल, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल समेत तमाम विपक्षी दलों के नेता शामिल होंगे।

कांग्रेस बनाम भाजपा

BJP Congress is ready to oppose each other on note ban anniversary

नोटबंदी का यह विरोध वैसे तो कांग्रेस बनाम भाजपा ही है। इसे केंद्र में रखकर भाजपा और केंद्रीय मंत्री जहां यूपीए सरकार के समय में हुए घोटालों को याद कर रहे हैं और तब की अर्थव्यवस्था की नीतियों की आलोचना कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस भाजपा की काली कोठरी दिखाने में लगी है।

पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला भाजपा को उसका 2014 का विदेशों में जमा 80 लाख करोड़ रुपये का कालाधन वापस लाने तथा देश के नागरिकों के बैंक खाते में 15 लाख रुपया जमा करने का वादा याद दिला रहे हैं।

रणदीप सुरजेवाला का कहना है कि भाजपा का दामन साफ नहीं है। एचएसबीसी, लिट्टेन बैंक, पनामा पेपर्सलीक, पैराडाइज पेपर्स लीक में 2400 से अधिक लोगों के नाम सामने आए हैं। इसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के बेटे अभिषेक, केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा, राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा समेत कई भाजपा नेताओं के नाम हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की सरकार इन नेताओं को बचाने में लगी है।

हिमाचल और गुजरात में दिख सकता है असर
नोटबंदी के इस विरोध का असर हिमाचल और गुजरात पर पड़ना तय माना जा रहा है। नौ नवंबर को हिमाचल में मतदान होना है। नोटबंदी ने हिमाचल में जहां जनजीवन को प्रभावित किया वहीं व्यापारिक और औद्योगिक उत्पादक राज्य के रूप में देश में अहम स्थान रखने वाले गुजरात में इसका व्यापक असर पड़ा था।

अर्थशास्‍त्रियों के अनुसार नोटबंदी के बाद केंद्र सरकार ने जुलाई 2017 में जीएसटी को लागू किया था। जीएसटी की गैर तर्कसंगत प्रक्रिया ने लोगों, व्यापारियों, औद्योगिक उत्पादकों पर विपरीत असर डाला है।

मोदी बनाम राहुल

BJP Congress is ready to oppose each other on note ban anniversary

नोटबंदी के विरोध की अगुआई चाहे जो करे, लेकिन यह मुहिम अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनाम राहुल गांधी का रूप लेती जा रही है। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने नोटबंदी का निर्णय लिए जाने के बाद इसका विरोध किया था।

राहुल के सोशल मीडिया मे फॉलोवर्स भी बढ़े हैं। वह प्रधानमंत्री मोदी पर जोरदार हमला बोल रहे हैं। राहुल लोगों की नौकरियां जाने, औद्योगिक इकाइयों के बंद होने, रोजगार के अवसर ठप होने के लिए प्रधानमंत्री की नीतियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने आखिरी आवाज भी दी है। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री मोदी देश की मौजूदा स्थिति को ठीक नहीं कर पा रहे हैं तो वह सत्ता छोड़ दें।

पीएम मोदी-शाह ने बदली रणनीति
यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने राहुल गांधी को पप्पू वाली छवि में कैद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी, लेकिन हिमाचल और गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ऐसा करने से बच रही है। इसे भाजपा की रणनीति में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। यहां तक कि भाजपा के जिम्मेदार नेता भी कांग्रेस उपाध्यक्ष पर इस तरह के कटाक्ष से बच रहे हैं।

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