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डोकलाम गतिरोध के बाद 4,000 किमी लंबी चीन सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाएगा भारत

Sat, 14 Oct 2017 02:31 AM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Updated Sat, 14 Oct 2017 02:31 AM IST
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After Doklam standoff India will increase infrastructure on China border
भारत चीन बॉर्डर - फोटो : फाइल फोटो

डोकलाम में चीन के साथ लंबे खिंचे गतिरोध के बाद रक्षा मंत्रालय ने सभी विवादित क्षेत्रों समेत 4,000 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा पर आधारभूत ढांचा निर्माण का काम तेज करने का फैसला किया है। इसके साथ ही सेना की कुछ महत्वपूर्ण फार्मेशन में संगठनात्मक बदलाव होने के भी संकेत हैं। 

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सेना की कमांडर्स कांफ्रेंस के दौरान ये फैसले लिए गए। इस कांफ्रेंस में डोकलाम को लेकर चीन के साथ चले गतिरोध पर विस्तार से चर्चा हुई। साथ ही उत्तरी सीमा की सभी सुरक्षा चुनौतियों का विश्लेषण किया गया। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी है। 
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हफ्ते भर लंबी इस कांफ्रेंस के दौरान सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कमांडरों से किसी भी परिस्थिति के लिए ‘हर समय’ तैयार रहने को कहा है। वहीं रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने ‘दुश्मन ताकतों’ के विरुद्ध सुरक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया है। इस कांफ्रेंस में अन्य लोगों के अलावा रक्षा मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए।
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स्टाफ ड्यूटी महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विजय सिंह ने कांफ्रेंस की जानकारी देते हुए कहा कि उत्तरी क्षेत्र मे भारी पैमाने पर सड़क निर्माण गतिविधियों चलाने का फैसला लिया गया है। क्षमता विस्तार के लिए कुछ फार्मेशन में संगठनात्मक बदलाव के मुद्दे की भी जांच-परख की गई। इसके अलावा रक्षा मंत्रालय की इकाई सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को अतिरिक्त फंड देने का फैसला किया गया है। 

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, भारत-चीन सीमा पर कमांडर्स कांफ्रेंस के दौरान खास जोर दिया गया। विवादित क्षेत्रों समेत चीन से सटी समूची सीमा पर आधारभूत ढांचे के निर्माण को तेज करने का फैसला किया गया है। अपने संबोधन में रक्षामंत्री सीमारमण ने ‘बाहरी और आंतरिक खतरों’ से निपटने के लिए तेज और प्रभावी प्रतिक्रिया देने पर सेना की प्रशंसा की। इसे डोकलाम में चीनी सेना के सड़क निर्माण कार्य को रुकवाने और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद रोधी अभियानों से जोड़कर देखा जा रहा है।

सेना प्रमुख का हथियार एवं गोला-बारूद की खरीद पर जोर

After Doklam standoff India will increase infrastructure on China border
जेनरल बिपिन रावत

शुक्रवार को सम्मेलन में सैन्य ऑपरेशन और क्षेत्र में सुरक्षा के विभिन्न आयामों पर चर्चा हुई। सुरक्षा चुनौतियों का जिक्र करते हुए सेना प्रमुख ने हथियार और गोला-बारूद की खरीद को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। यह सैन्य बलों के लिए अहम हथियारों की खरीद में हो रही देरी पर सेना प्रमुख की नाखुशी का स्पष्ट संकेत है।

जनरल रावत ने कहा कि खरीद प्रक्रिया को लेकर हमारे नजरिए में संतुलन होना चाहिए और सही जगह पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। वहीं सीमारमण ने कहा कि क्षमता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। सेना का क्षमता निर्माण समयबद्ध तरीके से किया जाएगा।

नीती, लिपुलेख, थांगला 1 और संगचोकला दर्रे को प्राथमिकता
सीमा पर आधारभूत ढांचे के निर्माण को तेज करने के मुद्दे पर लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने कहा कि नीती, लिपुलेख, थांगला 1 और संगचोकला दर्रे को 2020 तक प्राथमिकता के आधार पर जोड़ने का फैसला किया गया है। ये सभी दर्रे मध्य क्षेत्र में भारत-चीन सीमा पर हैं।

उन्होंने कहा कि मध्य क्षेत्र में पड़ोसियों से सटे क्षेत्रों में इंट्रा सेक्टर कनेक्टिविटी के लिए एक रोडमैप पर भी चर्चा की गई है। वहीं जहां जनरल रावत ने सैन्य कर्मियों के कल्याण से जुड़े मुद्दों में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। वहीं सीतारमण ने कहा कि सशस्त्र बलों के कर्मचारियों के मनोबल को कायम रखने को प्राथमिकता दी जाएगी। 

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