सभी मवेशियों को मिलेगा यूनीक नंबर, सरकार ने 1 लाख तकनीशियन को लगाया मिशन पर
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मोदी सरकार देश के मेवशियों की स्थिति का पता लागाने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसके लिए सरकार देश के 8.8 करोड़ मवेशियों को यूनीक नंबर देने जा रही है। सरकार के इस मिशन के तहत सभी मवेशियों के कान में 8 ग्राम के वजन वाला एक टैग लगाया जाएगा। इस टैग पर 12 अंकों का एक यूनीक नंबर दर्ज होगा। सरकार इस मिशन को इसी साल पूरा कर लेना चाहती है। इसी मकसद से 1 लाख तकनीशियन को फील्ड में उतारा गया है।
इकनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक सभी राज्यों को मंथली टारगेट दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश को हर महीने 14 लाख मवेशियों पर टैग लगाने हैं, जबकि मध्य प्रदेश के लिए यह टारगेट 7.5 लाख है।
जिन तकनीशियन को मिशन पर लगाया गया है उन्हें 50 हजार टैग एप्लिकेटर (टैग लगाने वाला टूल) व इतने ही टैबलेट दिए गए हैं। तकनीशियन इन टैबलेट के माध्यम से मवेशियों का यूनिक नंबर नेशनल ऑनलाइन डेटाबेस पर अपडेट करेंगे।
सरकार मवेशियों की देखरेख करने के उद्देश्य से यह कदम उठा रही है। सरकार का मानना है कि इससे उसे मवेशियों की निगरानी करने में मदद मिलेगी और समय पर उन्हें टीके भी लगाए जा सकेंगे।
केंद्र सरकार के इस कदम को अपने उस लक्ष्य को पूरा करने के हिसाब से भी देखा जा रहा है जिसमें उसने कहा है कि 2022 तक वह डेयरी किसानों की आमदनी दोगुनी कर देगी।
टीकाकरण और ब्रीडिंग पर सरकार रख सकेगी नजर
इकनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक देश में लगभग 8.8 करोड़ मवेशी हैं। इनमें 4.1 करोड़ भैंस और 4.7 करोड़ गाय शामिल हैं। 1.6 करोड़ मवेशियों के साथ उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। वहीं दूसरे नंबर पर मध्य प्रदेश व तीसरे नंबर पर राजस्थान आता है।
8 रुपए कीमत के इस पीले रंग के टैग को लगाने में तकनीशियन को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। टैग लगने के बाद तकनीशियन टैबलेट में डाटा फीड करेगा। डाटा फीड होने के बाद मवेशी मालिक को 'एनिमल हेल्थ कार्ड' दिया जाएगा।
इस हेल्थ कार्ड में मवेशी से जुड़ा सारा डाटाबेस मौजूद होगा। सरकार इसके माध्यम से टीकाकरण और ब्रीडिंग पर ध्यान रख सकेगी।