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व्हाइट हाउस पहुंचाया कांगड़ा चाय का जायका
Updated Wed, 28 Jun 2017 12:08 AM IST
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धर्मशाला। दुनिया भर में अपने अलग स्वाद और आर्गेनिक गुण के लिए जानी जाने वाली अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कांगड़ा चाय व्हाइट हाउस में पहुंचने से इसे और ख्याति मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 90 के दशक में जब हिमाचल भाजपा के प्रभारी थे तो उस दौरान वे खुद भी कांगड़ा चाय के मुरीद थे। प्रदेश भाजपा महामंत्री कृपाल परमार ने बताया कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिमाचल प्रभारी थे तब वह प्रदेश महामंत्री के तौर पर उनके सहयोगी थी। मोदी उस वक्त कांगड़ा चाय के काफी शौकीन थे। मोदी ने उस वक्त उनसे कहा था कि कांगड़ा चाय का जायका अंतरराष्ट्रीय स्तर है। इसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मार्केटिंग होनी चाहिए। कांगड़ा चाय की खास बात यह है कि अगर इसमें दूध और चीनी न भी डालें तो यह अपना अलग ही बेहतरीन महकदार स्वाद देती है। इसमें किसी भी आर्टिफिशियल रंग का प्रयोग नहीं किया जाता है। पुख्ता सूत्रों की मानें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएमओ के जरिये कांगड़ा चाय दिल्ली स्थित हिमाचल भवन से मंगवाई है। हिमाचल भवन ने कांगड़ा चाय दिल्ली स्थित हिमाचल इंपोरियम से खरीदी है।
सीएसआईआर पालमपुर के वैज्ञानिक डा. आरके सूद की मानें तो हिमालय की बेहतरीन जलवायु में पैदा होने वाली कांगड़ा चाय बहुत गुणकारी है। कांगड़ा चाय उत्पादन में कीटनाशकों का एक फीसदी भी प्रयोग नहीं होता है। यह पूरी तरह आर्गेनिक है। हृदय, कैंसर सहित कई बीमारियों के लिए कांगड़ा चाय फायदेमंद है। चाय की इस तरह की गुणवत्ता दुनिया के किसी अन्य कोने में नहीं है। ब्रिटिशकाल में कांगड़ा चाय को बेहतरीन क्वालिटी और स्वाद के लिए दो अंतरराष्ट्रीय अवार्ड मिले थे। 1882 में धर्मशाला में बनी टी फैक्टरी मान ईस्टेट के मैनेजर दविंद्र पठानिया कहते हैं कि कांगड़ा चाय का स्वाद दुनिया भर में बिल्कुल अलग है। उनकी फैक्टरी से भी कांगड़ा चाय जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, नीदरलैंड और कनाडा तक निर्यात हो चुकी है।
मोदी ने कांगड़ा चाय के साथ टी टूरिज्म किया प्रमोट
1886 और 1895 में कांगड़ा चाय को अपनी बेहतरीन क्वालिटी और अलग स्वाद के लिए लंदन और एमस्टरडैंम में गोल्ड तथा सिल्वर मेडल पुरस्कार के रूप मिला था। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांगड़ा चाय का जायका व्हाइट हाउस तक पहुंचाकर कांगड़ा चाय को दूसरी बार दुनिया भर में मशहूरी देने के साथ टी टूरिज्म को बढ़ावा देने में बड़ा कदम बढ़ाया है।
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ब्रिटिशकाल में शुरू हुआ था उत्पादन
विश्व की बेहतरीन चाय में शामिल कांगड़ा चाय की अंतरराष्ट्रीय मार्केट में काफी मांग है लेकिन बेहतर ग्रेडिंग, पैकिंग तथा मार्केटिंग के अभाव में यह चाय दम तोड़ रही थी। कांगड़ा में चाय ब्रिटिश चीन से लाए थे। 1852 में कांगड़ा में चाय का उत्पादन ब्रिटिशों ने शुरू किया था।
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सीएसआईआर पालमपुर के वैज्ञानिक डा. आरके सूद की मानें तो हिमालय की बेहतरीन जलवायु में पैदा होने वाली कांगड़ा चाय बहुत गुणकारी है। कांगड़ा चाय उत्पादन में कीटनाशकों का एक फीसदी भी प्रयोग नहीं होता है। यह पूरी तरह आर्गेनिक है। हृदय, कैंसर सहित कई बीमारियों के लिए कांगड़ा चाय फायदेमंद है। चाय की इस तरह की गुणवत्ता दुनिया के किसी अन्य कोने में नहीं है। ब्रिटिशकाल में कांगड़ा चाय को बेहतरीन क्वालिटी और स्वाद के लिए दो अंतरराष्ट्रीय अवार्ड मिले थे। 1882 में धर्मशाला में बनी टी फैक्टरी मान ईस्टेट के मैनेजर दविंद्र पठानिया कहते हैं कि कांगड़ा चाय का स्वाद दुनिया भर में बिल्कुल अलग है। उनकी फैक्टरी से भी कांगड़ा चाय जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, नीदरलैंड और कनाडा तक निर्यात हो चुकी है।
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मोदी ने कांगड़ा चाय के साथ टी टूरिज्म किया प्रमोट
1886 और 1895 में कांगड़ा चाय को अपनी बेहतरीन क्वालिटी और अलग स्वाद के लिए लंदन और एमस्टरडैंम में गोल्ड तथा सिल्वर मेडल पुरस्कार के रूप मिला था। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांगड़ा चाय का जायका व्हाइट हाउस तक पहुंचाकर कांगड़ा चाय को दूसरी बार दुनिया भर में मशहूरी देने के साथ टी टूरिज्म को बढ़ावा देने में बड़ा कदम बढ़ाया है।
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ब्रिटिशकाल में शुरू हुआ था उत्पादन
विश्व की बेहतरीन चाय में शामिल कांगड़ा चाय की अंतरराष्ट्रीय मार्केट में काफी मांग है लेकिन बेहतर ग्रेडिंग, पैकिंग तथा मार्केटिंग के अभाव में यह चाय दम तोड़ रही थी। कांगड़ा में चाय ब्रिटिश चीन से लाए थे। 1852 में कांगड़ा में चाय का उत्पादन ब्रिटिशों ने शुरू किया था।