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संत ने सरकार को दिया तीन दिन का अल्टीमेटम, अशोक तंवर पहुंचे समर्थन देने
Updated Tue, 04 Jul 2017 02:51 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। गोचरान भूमि विकास बोर्ड के गठन को लेकर चल रहा संत गोपालदास का आमरण अनशन 32वें दिन भी जारी रहा। संत को मनाने के लिए प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे, लेकिन संत अपनी मांग पर अडिग रहे। संत ने चेताया कि तीन दिन में मांग पूरी नहीं होने पर बड़ा निर्णय लिया जाएगा। वहीं, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर ने भी अनशन स्थल पर पहुंचकर संत का हाल जाना।
एसडीएम अरविंद मल्हान दोपहर के समय कई अन्य अधिकारी पार्क में पहुंचे। उन्होंने संत को आश्वासन देकर अनशन को खत्म करने के लिए कहा, लेकिन संत ने इससे साफ इन्कार कर दिया। संत ने कहा कि चारागाह नीलामी रद्द करने की अधिसूचना तीन दिन के अंदर सार्वजनिक रूप से प्रकाशित होनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो कड़ा कदम उठाया जाएगा। घंटों तक मान-मनौव्वल के बाद भी संत को मनाने में अधिकारी कामयाब नहीं हुए। देर शाम पहुंचे कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर ने भी संत का हाल जाना।
उन्होंने कहा कि सरकार अनदेखी कर रही है। इसे लेकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। पूरे मामले से राज्यपाल को अवगत कराने के लिए उन्हें ज्ञापन सौंपा जाएगा। जरूरत पड़ी तो जल्द ही वह भी संत के साथ आंदोलन शुरू कर देंगे।
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रोहतक। गोचरान भूमि विकास बोर्ड के गठन को लेकर चल रहा संत गोपालदास का आमरण अनशन 32वें दिन भी जारी रहा। संत को मनाने के लिए प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे, लेकिन संत अपनी मांग पर अडिग रहे। संत ने चेताया कि तीन दिन में मांग पूरी नहीं होने पर बड़ा निर्णय लिया जाएगा। वहीं, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर ने भी अनशन स्थल पर पहुंचकर संत का हाल जाना।
एसडीएम अरविंद मल्हान दोपहर के समय कई अन्य अधिकारी पार्क में पहुंचे। उन्होंने संत को आश्वासन देकर अनशन को खत्म करने के लिए कहा, लेकिन संत ने इससे साफ इन्कार कर दिया। संत ने कहा कि चारागाह नीलामी रद्द करने की अधिसूचना तीन दिन के अंदर सार्वजनिक रूप से प्रकाशित होनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो कड़ा कदम उठाया जाएगा। घंटों तक मान-मनौव्वल के बाद भी संत को मनाने में अधिकारी कामयाब नहीं हुए। देर शाम पहुंचे कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर ने भी संत का हाल जाना।
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उन्होंने कहा कि सरकार अनदेखी कर रही है। इसे लेकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। पूरे मामले से राज्यपाल को अवगत कराने के लिए उन्हें ज्ञापन सौंपा जाएगा। जरूरत पड़ी तो जल्द ही वह भी संत के साथ आंदोलन शुरू कर देंगे।
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