{"_id":"590b6ccb4f1c1b4a6344284c","slug":"town","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रदेश का सबसे गंदा शहर बना पलवल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रदेश का सबसे गंदा शहर बना पलवल
palwal
Updated Thu, 04 May 2017 11:33 PM IST
विज्ञापन
शहर में पड़ी गंदगी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्वच्छ हरियाणा, स्वस्थ हरियाणा का सपना पलवल में ध्वस्त हो गया है। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय द्वारा कराए गए सर्वेक्षण 2017 में शहर को हरियाणा का सबसे गंदा शहर घोषित किया गया है। सर्वेक्षण में पलवल स्वच्छता के मामलें में 397वें स्थान पर रहा। सिर्फ पलवल ही नहीं हरियाणा का ऐसा कोई शहर नहीं है, जो स्वच्छता के मामले में बेहतर पाया गया हो। सर्वेक्षण में प्रदेश के करीब सभी शहर गंदगी में एक दूसरे का रिकार्ड तोड़ते नजर आएं। आंकड़ों ने प्रदेश सरकार के स्वच्छता अभियान की पोल खोलकर रख दी है।
सर्वे में सफाई का आकलन करने के लिए कई श्रेणियां निर्धारित की गई थीं। उन्हीं श्रेणियों को केंद्र में रखते हुए सफाई का मूल्यांकन कर नंबर दिए गए। इनमें मौके पर निरीक्षण, लोगों की राय, ठोस कचरा संग्रहण व परिवहन, ठोस कचरा प्रक्रिया व डिस्पोजल, ओडीएफ और कचरा निस्तारण के लिए भवन क्षमता की श्रेणी शामिल थीं। इसके लिए कुल 2000 अंक निर्धारित थे, जिनमें पलवल को 553 अंक मिले।
गौरतलब है कि पलवल गंदगी के मामले में पहले से ही बदनाम रहा है। दिल्ली-आगरा जाने वाले देशी-विदेशी पर्यटक तो पलवल के अंदर राजमार्ग पर पड़े गंदगी के ढेरों की फोटो खींचते ही हैं, सड़कों पर भरा रहने वाला गंदा व नालों से बहता पानी भी मुंह चिढ़ाता नजर आता है। वहीं प्रदेश सरकार द्वारा स्वच्छ हरियाणा का नारा तो खूब दिया जाता है, लेकिन आज तक सरकार नगर परिषद पलवल में कूड़ा डालने व उसे डंप करने के लिए कोई स्थान तक उपलब्ध नहीं करा पाई। ऐसे में जिले में जगह-जगह पड़े गंदगी के ढेर लावारिस पशुओं के आरामगाह बने हुए हैं।
विज्ञापन
कोई नहीं गंभीर
स्वच्छता के मामले में न तो नगर परिषद गंभीर है और न ही प्रशासन। हालांकि जिला उपायुक्त ने जिले में स्वच्छता को लेकर कई बार नगर परिषद अधिकारियों को आदेश दिए हैं, लेकिन सभी आदेश नगर परिषद हवा में उड़ा देती है। लोग भी नगर परिषद अधिकारियों से कहकर थक चुके हैं। पार्षद भी आए दिन सफाई के मुद्दे को उठाते हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती।
लोगों का जीना दूभर
शहर में स्वच्छता की तरफ किसी का ध्यान नहीं है। गली-मोहल्लों व सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी के ढेर लगे हैं। लोगों का जीना दूभर है, लेकिन नगर परिषद व प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। इस संदर्भ में सीएम विंडो तक पर शिकायत की जा चुकी है। फिर भी किसी के कान पर जूं नहीं रेंगती।
-दीपक मित्तल, सामाजिक कार्यकर्ता
फोटो खिंचवाने तक सिमटा अभियान
स्वच्छता को लेकर कई बार नेताओं व अधिकारियों ने अभियान चलाए, लेकिन सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए। सफाई के लिए आज तक ठोस कदम नहीं उठाया गया है। स्वच्छता को लेकर कोई गंभीर नहीं है। यही कारण है कि शहर पूरे प्रदेश में स्वच्छता के मामले में सबसे पीछे हैं।
-नवनीत तेवतिया, प्रधान ट्रक ऑनर एसोसिएशन
नगर परिषद की मेहनत का नतीजा
स्वच्छता के मामले में नगर परिषद पूरी तरह गंभीर है। समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं। इतना ही नहीं शहर में रोजाना सफाई कराई जाती है। पिछले सर्वेक्षण में पलवल स्वच्छता के मामले में आज के मुकाबले में काफी निचले पायदान पर पर था। यह नगर परिषद की मेहनत का ही नतीजा है कि वह 397वें नंबर पर आया है।
-इंदू भारद्वाज, चेयरपरन, नगर परिषद, पलवल
विज्ञापन
सर्वे में सफाई का आकलन करने के लिए कई श्रेणियां निर्धारित की गई थीं। उन्हीं श्रेणियों को केंद्र में रखते हुए सफाई का मूल्यांकन कर नंबर दिए गए। इनमें मौके पर निरीक्षण, लोगों की राय, ठोस कचरा संग्रहण व परिवहन, ठोस कचरा प्रक्रिया व डिस्पोजल, ओडीएफ और कचरा निस्तारण के लिए भवन क्षमता की श्रेणी शामिल थीं। इसके लिए कुल 2000 अंक निर्धारित थे, जिनमें पलवल को 553 अंक मिले।
विज्ञापन
गौरतलब है कि पलवल गंदगी के मामले में पहले से ही बदनाम रहा है। दिल्ली-आगरा जाने वाले देशी-विदेशी पर्यटक तो पलवल के अंदर राजमार्ग पर पड़े गंदगी के ढेरों की फोटो खींचते ही हैं, सड़कों पर भरा रहने वाला गंदा व नालों से बहता पानी भी मुंह चिढ़ाता नजर आता है। वहीं प्रदेश सरकार द्वारा स्वच्छ हरियाणा का नारा तो खूब दिया जाता है, लेकिन आज तक सरकार नगर परिषद पलवल में कूड़ा डालने व उसे डंप करने के लिए कोई स्थान तक उपलब्ध नहीं करा पाई। ऐसे में जिले में जगह-जगह पड़े गंदगी के ढेर लावारिस पशुओं के आरामगाह बने हुए हैं।
विज्ञापन
कोई नहीं गंभीर
स्वच्छता के मामले में न तो नगर परिषद गंभीर है और न ही प्रशासन। हालांकि जिला उपायुक्त ने जिले में स्वच्छता को लेकर कई बार नगर परिषद अधिकारियों को आदेश दिए हैं, लेकिन सभी आदेश नगर परिषद हवा में उड़ा देती है। लोग भी नगर परिषद अधिकारियों से कहकर थक चुके हैं। पार्षद भी आए दिन सफाई के मुद्दे को उठाते हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती।
लोगों का जीना दूभर
शहर में स्वच्छता की तरफ किसी का ध्यान नहीं है। गली-मोहल्लों व सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी के ढेर लगे हैं। लोगों का जीना दूभर है, लेकिन नगर परिषद व प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। इस संदर्भ में सीएम विंडो तक पर शिकायत की जा चुकी है। फिर भी किसी के कान पर जूं नहीं रेंगती।
-दीपक मित्तल, सामाजिक कार्यकर्ता
फोटो खिंचवाने तक सिमटा अभियान
स्वच्छता को लेकर कई बार नेताओं व अधिकारियों ने अभियान चलाए, लेकिन सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए। सफाई के लिए आज तक ठोस कदम नहीं उठाया गया है। स्वच्छता को लेकर कोई गंभीर नहीं है। यही कारण है कि शहर पूरे प्रदेश में स्वच्छता के मामले में सबसे पीछे हैं।
-नवनीत तेवतिया, प्रधान ट्रक ऑनर एसोसिएशन
नगर परिषद की मेहनत का नतीजा
स्वच्छता के मामले में नगर परिषद पूरी तरह गंभीर है। समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं। इतना ही नहीं शहर में रोजाना सफाई कराई जाती है। पिछले सर्वेक्षण में पलवल स्वच्छता के मामले में आज के मुकाबले में काफी निचले पायदान पर पर था। यह नगर परिषद की मेहनत का ही नतीजा है कि वह 397वें नंबर पर आया है।
-इंदू भारद्वाज, चेयरपरन, नगर परिषद, पलवल