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10 जिलों के 100 गांवों में होगी पर्यावरण सरंक्षित खेती
Updated Thu, 20 Jul 2017 12:11 AM IST
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10 जिलों के 100 गांवों में होगी पर्यावरण संरक्षित खेती
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। प्रदेश सरकार द्वारा बढ़ते तापमान, गिरते भूमिगत जलस्तर, घटती जोत, बरसात कम होने के कारण पैदा हुई चुनौतियां का सामना करने के लिए 10 जिलों के 100 गांवों में पायलट प्रोजैक्ट चलाया जाएगा। जिसमें केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के सहयोग से पर्यावरण संरक्षित जलवायु आधारित अच्छी खेती को बढ़ावा देने के लिए मॉडल कृषि गांव विकसित किए जाएंगे। दूसरे चरण में बाकी जिलों के 150 गांवों को लिया जाएगा।
यह जानकारी कृषि व किसान कल्याण विभाग के प्रधान सचिव अभिलक्ष लिखी ने जिमखाना क्लब में आयोजित अधिकारियों की बैठक में दी। इस पायलट प्रोजेक्ट के लागू होने वाले 10 जिलों के उप कृषि निदेशकों, जिला उद्यान अधिकारियों की बैठक में कहा कि प्रथम चरण में इस प्रोजेक्ट के तहत जिन 10 जिलों को लिया जाएगा, उनमें कैथल, सिरसा, फतेहाबाद, कुरुक्षेत्र, अंबाला, यमुनानगर, पंचकूला, करनाल, पानीपत, सोनीपत शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि इस परियोजना पर 25 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की जाएगी।
ये विभाग करेंगे सहयोग : कृषि उद्यान, कृषि विश्वविद्यालय, पशुपालन, मछली पालन, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नाबार्ड सामूहिक रूप से इन 100 गांवों को मॉडल गांव के रूप में विकसित करेंगे। इन गांवों में धान व कृषि की उत्पादकता को जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव से बचाया जाएगा।
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इन बातों पर रहेगा जोर :- कृषि क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन न हो, जल का अधिकतम संरक्षण हो, पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ गेहूं व धान की फसल की कटाई के बाद अवशेष न जलाने पड़े। इसके लिए अतिरिक्त प्रबंधन की कंबाइन मशीनों का उपयोग किया जाएगा। इन कृषि मॉडल गांवों में फार्म, पंचायती जमीन, समुदाय की जमीन या ढाई हेक्टेयर तक के लघु व सीमांत किसानों के खेतों में विकसित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गांव में 5 युवा सक्रिय युवाओं को अंबेसडर नियुक्त किया जाएगा। इस परियोजना में 35 प्रतिशत भागीदारी महिलाओं की होगी।
आधुनिक उपकरणों से होगी खेती :- इन मॉडल कृषि गांवों में कृषि उपकरण, लेजर लैंड लेवलर, जीरो टिलेज मशीन के साथ-साथ कृषि उपकरण कृषि विभाग की तरफ से किसानों को उन्नत खेती के लिए उपलब्ध करवाए जाएंगे। प्रत्येक जिले में उपकृषि निदेशक का महत्वपूर्ण रोल होगा, जो इन मॉडल फार्मों का समय-समय पर निरीक्षण व मॉनिटरिंग करेंगे। इस परियोजना से 250 गांवों के 75 हजार परिवार लाभान्वित होंगे।
कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक सुरेश गहलावत ने कहा कि सभी कृषि उपनिदेशक व्यक्तिगत तौर पर सर्वे पर नजर रखें तथा इस मॉडल परियोजना को प्रभावी ढंग से लागू करने में अपना सहयोग दें। वरिष्ठ अनुसंधान समन्वयक एच.एस जाट ने कहा कि इस परियोजना की लगातार 3 वर्ष तक मॉनिटरिंग की जाएगी। उत्पादकता को बढ़ाने के लिए कृषि की हर तकनीक का उपयोग करते हुए धान व गेहूं का उत्पादन बढ़ाया जाएगा।
नाबार्ड के डीजीएम डा. जीके मंडल ने कहा कि तापमान बढ़ने से उत्पादन घट रहा है। इसलिए हमें खाद्य सुरक्षा की तरफ ध्यान देते हुए सामूहिक प्रयास करने होंगे।
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। प्रदेश सरकार द्वारा बढ़ते तापमान, गिरते भूमिगत जलस्तर, घटती जोत, बरसात कम होने के कारण पैदा हुई चुनौतियां का सामना करने के लिए 10 जिलों के 100 गांवों में पायलट प्रोजैक्ट चलाया जाएगा। जिसमें केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के सहयोग से पर्यावरण संरक्षित जलवायु आधारित अच्छी खेती को बढ़ावा देने के लिए मॉडल कृषि गांव विकसित किए जाएंगे। दूसरे चरण में बाकी जिलों के 150 गांवों को लिया जाएगा।
यह जानकारी कृषि व किसान कल्याण विभाग के प्रधान सचिव अभिलक्ष लिखी ने जिमखाना क्लब में आयोजित अधिकारियों की बैठक में दी। इस पायलट प्रोजेक्ट के लागू होने वाले 10 जिलों के उप कृषि निदेशकों, जिला उद्यान अधिकारियों की बैठक में कहा कि प्रथम चरण में इस प्रोजेक्ट के तहत जिन 10 जिलों को लिया जाएगा, उनमें कैथल, सिरसा, फतेहाबाद, कुरुक्षेत्र, अंबाला, यमुनानगर, पंचकूला, करनाल, पानीपत, सोनीपत शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि इस परियोजना पर 25 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की जाएगी।
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ये विभाग करेंगे सहयोग : कृषि उद्यान, कृषि विश्वविद्यालय, पशुपालन, मछली पालन, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नाबार्ड सामूहिक रूप से इन 100 गांवों को मॉडल गांव के रूप में विकसित करेंगे। इन गांवों में धान व कृषि की उत्पादकता को जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव से बचाया जाएगा।
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इन बातों पर रहेगा जोर :- कृषि क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन न हो, जल का अधिकतम संरक्षण हो, पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ गेहूं व धान की फसल की कटाई के बाद अवशेष न जलाने पड़े। इसके लिए अतिरिक्त प्रबंधन की कंबाइन मशीनों का उपयोग किया जाएगा। इन कृषि मॉडल गांवों में फार्म, पंचायती जमीन, समुदाय की जमीन या ढाई हेक्टेयर तक के लघु व सीमांत किसानों के खेतों में विकसित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गांव में 5 युवा सक्रिय युवाओं को अंबेसडर नियुक्त किया जाएगा। इस परियोजना में 35 प्रतिशत भागीदारी महिलाओं की होगी।
आधुनिक उपकरणों से होगी खेती :- इन मॉडल कृषि गांवों में कृषि उपकरण, लेजर लैंड लेवलर, जीरो टिलेज मशीन के साथ-साथ कृषि उपकरण कृषि विभाग की तरफ से किसानों को उन्नत खेती के लिए उपलब्ध करवाए जाएंगे। प्रत्येक जिले में उपकृषि निदेशक का महत्वपूर्ण रोल होगा, जो इन मॉडल फार्मों का समय-समय पर निरीक्षण व मॉनिटरिंग करेंगे। इस परियोजना से 250 गांवों के 75 हजार परिवार लाभान्वित होंगे।
कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक सुरेश गहलावत ने कहा कि सभी कृषि उपनिदेशक व्यक्तिगत तौर पर सर्वे पर नजर रखें तथा इस मॉडल परियोजना को प्रभावी ढंग से लागू करने में अपना सहयोग दें। वरिष्ठ अनुसंधान समन्वयक एच.एस जाट ने कहा कि इस परियोजना की लगातार 3 वर्ष तक मॉनिटरिंग की जाएगी। उत्पादकता को बढ़ाने के लिए कृषि की हर तकनीक का उपयोग करते हुए धान व गेहूं का उत्पादन बढ़ाया जाएगा।
नाबार्ड के डीजीएम डा. जीके मंडल ने कहा कि तापमान बढ़ने से उत्पादन घट रहा है। इसलिए हमें खाद्य सुरक्षा की तरफ ध्यान देते हुए सामूहिक प्रयास करने होंगे।