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भारतीय मूल के विश्व में पहले पालयट रवि बंसल सिंगल इजन विमान में कर रहे विश्व भ्रमण
Updated Sat, 22 Jul 2017 12:22 AM IST
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अंबाला कैंट। कैंसर के प्रति जागरूकता और अंबाला रोटरी कैंसर अस्पताल में एमआरआई मशीन के लिए 7.50 लाख यूएस डॉलर जुटाने के लिए विश्वभ्रमण पर निकले एनआरआई एवं पायलट रवि बंसल महज 50 हजार यूएस डॉलर में विश्व भ्रमण पर निकले हैं। शुक्रवार दोपहर अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर रवि बंसल पहुंचे तो यहां एयरफोर्स अधिकारियों के साथ-साथ रोटरी क्लब के सदस्यों ने उनका स्वागत किया। रवि बंसल ने बताया कि वह अंबाला के एसडी कॉलेज से उत्तीर्ण हुए और बचपन में वह यहां के एयरफोर्स स्टेशन को अक्सर देखा करते थे, आज उसी एयरफोर्स स्टेशन के ऊपर मंडराते हुए यहां अपना विमान लैंड करवाना उनके लिए गौरवपूर्ण क्षण था। उन्होंने बताया कि एमआरआई मशीन के लिए अब तक वह एक लाख डॉलर जुटा चुके हैं जबकि अंबाला से उन्हें काफी उम्मीद हैं। उनकी संपूर्ण यात्रा पर 50 हजार डॉलर खर्च है जोकि वह स्वयं वहन कर रहे हैं। एक रुपया भी यदि कोई उन्हें दे रहा है तो वह इसे खुशी से लेकर एमआरआई मशीन खरीदने के लिए जोड़ रहे हैं। उनका मकसद 7.50 लाख डॉलर इकट्ठा करके अंबाला रोटरी कैंसर अस्पताल में एमआरआई मशीन स्थापित करनी है ताकि कैंसर पीड़ितों को प्रारंभिक चरण में ही रोग का पता चल सके। इससे पहले रोटरी क्लब के अध्यक्ष आरके शर्मा, सचिव राजेश चौधरी, नरेश भारद्वाज, सुभाष बंसल व अन्य ने उनका स्वागत किया। बता दें कि रवि बंसल विश्व भ्रमण के दौरान 21 देशों की यात्रा अपने विमान से करेंगे।
सरवाइवल सूट पहनकर करते है फ्लाई
रवि बंसल भारतीय मूल के पहले एनआरआई है जोकि इस साहसिक यात्रा पर अकेले निकले हैं। अंतरराष्ट्रीय पायलट एसोसिएशन के सदस्य रवि बंसल ने बताया कि उनकी अधिकतर यात्रा समुद्र के ऊपर से है। सिंगल इंजन वाला विमान होने की वजह से किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए उन्हें तैयार रहना पड़ता है। वह जब फ्लाई करते हैं तो सरवाइवल सूट पहनकर फ्लाई करते हैं। विमान में रेसक्यू के लिए हवा वाली वॉटरबोट, सेटेलाइट, एसओएस एवं बैकअप जीपीएस लेकर उड़ते हैं। यदि विमान खराब हो जाए तो वह अपने अनुभव से उसे ग्लाइड कर समुद्र में उतार सकते हैं। ठंडा पानी होने की सूरत में वह अपने सुरक्षा उपकरणों के जरिए अधिकतम चार घंटे तक रह सकते हैं।
45 घंटे फ्लाइंग के बाद विमान की सर्विस
रवि ने बताया कि विश्व भ्रमण के दौरान वह कुल 117 घंटे विमान उड़ाएंगे। उनका विमान ‘ससना’ 11 वर्ष पुराना है और हर 45 घंटे की उड़ान के बाद विमान की सर्विस जरूरी है। विश्व भ्रमण पर रवाना होने के बाद एक सर्विस वह इटली में करवा चुके हैं जबकि दूसरी सर्विस मलेशिया में आगे होगी। पायल एसोसिएशन का सदस्य होने के नाते उनके विश्व में कई दोस्त है जिनकी मदद से उन्हें सर्विस की सुविधा मिल रही है।
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कभी दुनिया का चक्कर लगाने की सोचता था
रवि बंसल ने बताया कि 1971 में वह अमेरिका में रोजगार की तलाश में गए थे। वहां दोस्त के साथ फ्लाइंग क्लब जाना उन्होंने आरंभ किया, मगर तब इतने पैसे नहीं होते थे कि पूरी कोचिंग ली जा सके। मगर कुछ स्कॉलरशिप उन्हें मिलती थी जिसके जरिए वह माह में एक-दो बार क्लास कर पाते थे। 1977 में उन्हें पायलट का लाइसेंस मिला। इसके बाद वह अपने विमान में विश्व भ्रमण करने की चाहत रखते थे। इसके उपरांत 1987 में उन्होंने अपना बिजनेस आरंभ किया और इसके जरिए उन्हें काफी कमाई हुई, इस कमाई से उन्होंने अपना खुद का विमान खरीदा। पैसा, समय व अनुभव होने के कारण वह विश्व भ्रमण पर निकल सके और जिस मकसद के साथ वह निकले हैं उसे कामयाब करने में हर कोशिश करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि भारत में भी कई अनुभवी पायलट है, मगर विश्व भ्रमण के लिए पैसा, समय व संपर्क जरूरी हैं।
अंबाला से तीन लाख से अधिक इकट्ठा
अंबाला रोटरी क्लब व अन्य लोगों की मदद से करीब तीन लाख रुपये रवि बंसल अब तक इकट्ठा कर सके हैं। उनके भाई सुभाष बंसल ने बताया कि करीब डेढ़ लाख रुपये अब तक इकट्ठा हुए हैं और अंबाला के एक उद्यमी ने घोषणा की है कि जितना भी पैसा इकट्ठा होगा उतना ही वह स्वयं देंगे। अनुमान है कि अंबाला से तीन लाख से ज्यादा राशि इस अभियान के दौरान इकट्ठा हो जाएगी।
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सरवाइवल सूट पहनकर करते है फ्लाई
रवि बंसल भारतीय मूल के पहले एनआरआई है जोकि इस साहसिक यात्रा पर अकेले निकले हैं। अंतरराष्ट्रीय पायलट एसोसिएशन के सदस्य रवि बंसल ने बताया कि उनकी अधिकतर यात्रा समुद्र के ऊपर से है। सिंगल इंजन वाला विमान होने की वजह से किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए उन्हें तैयार रहना पड़ता है। वह जब फ्लाई करते हैं तो सरवाइवल सूट पहनकर फ्लाई करते हैं। विमान में रेसक्यू के लिए हवा वाली वॉटरबोट, सेटेलाइट, एसओएस एवं बैकअप जीपीएस लेकर उड़ते हैं। यदि विमान खराब हो जाए तो वह अपने अनुभव से उसे ग्लाइड कर समुद्र में उतार सकते हैं। ठंडा पानी होने की सूरत में वह अपने सुरक्षा उपकरणों के जरिए अधिकतम चार घंटे तक रह सकते हैं।
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45 घंटे फ्लाइंग के बाद विमान की सर्विस
रवि ने बताया कि विश्व भ्रमण के दौरान वह कुल 117 घंटे विमान उड़ाएंगे। उनका विमान ‘ससना’ 11 वर्ष पुराना है और हर 45 घंटे की उड़ान के बाद विमान की सर्विस जरूरी है। विश्व भ्रमण पर रवाना होने के बाद एक सर्विस वह इटली में करवा चुके हैं जबकि दूसरी सर्विस मलेशिया में आगे होगी। पायल एसोसिएशन का सदस्य होने के नाते उनके विश्व में कई दोस्त है जिनकी मदद से उन्हें सर्विस की सुविधा मिल रही है।
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कभी दुनिया का चक्कर लगाने की सोचता था
रवि बंसल ने बताया कि 1971 में वह अमेरिका में रोजगार की तलाश में गए थे। वहां दोस्त के साथ फ्लाइंग क्लब जाना उन्होंने आरंभ किया, मगर तब इतने पैसे नहीं होते थे कि पूरी कोचिंग ली जा सके। मगर कुछ स्कॉलरशिप उन्हें मिलती थी जिसके जरिए वह माह में एक-दो बार क्लास कर पाते थे। 1977 में उन्हें पायलट का लाइसेंस मिला। इसके बाद वह अपने विमान में विश्व भ्रमण करने की चाहत रखते थे। इसके उपरांत 1987 में उन्होंने अपना बिजनेस आरंभ किया और इसके जरिए उन्हें काफी कमाई हुई, इस कमाई से उन्होंने अपना खुद का विमान खरीदा। पैसा, समय व अनुभव होने के कारण वह विश्व भ्रमण पर निकल सके और जिस मकसद के साथ वह निकले हैं उसे कामयाब करने में हर कोशिश करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि भारत में भी कई अनुभवी पायलट है, मगर विश्व भ्रमण के लिए पैसा, समय व संपर्क जरूरी हैं।
अंबाला से तीन लाख से अधिक इकट्ठा
अंबाला रोटरी क्लब व अन्य लोगों की मदद से करीब तीन लाख रुपये रवि बंसल अब तक इकट्ठा कर सके हैं। उनके भाई सुभाष बंसल ने बताया कि करीब डेढ़ लाख रुपये अब तक इकट्ठा हुए हैं और अंबाला के एक उद्यमी ने घोषणा की है कि जितना भी पैसा इकट्ठा होगा उतना ही वह स्वयं देंगे। अनुमान है कि अंबाला से तीन लाख से ज्यादा राशि इस अभियान के दौरान इकट्ठा हो जाएगी।