वर्षों से भारत को परमाणु के खतरे से बचा रहा है यह
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17 जनवरी 1965 को अमेरिका का एक विमान स्पेन के एक छोटे से गांव पालामरेस के ऊपर अचानक एक अन्य विमान से टकराया और दोनों के टुकड़े-टुकड़े हो गये।
अमेरिकी विमान में चार हाइड्रोजन बम थे। दो फट गए और उससे होने वाले विकिरण से एक अन्य बम फूट गया सिर्फ एक बम नहीं फूटा। अमेरिका की अणु-शक्ति आयोग ने विस्फोट से होने वाले प्लूटोनियम के जहरीले विकिरण से क्षेत्र को बचाने के लिए आवश्यक सभी उपाय किए।
उसके बावजूद गांव के लोग 80 दिन तक इसलिए बेचैन रहे कि चौथा बम अभी तक नहीं मिला था। वह बम समुद्र के अंदर 2500 फुट की गहराई पर मिला तब लोगों ने राहत की सांस ली। यह बम छोटी ताकत के थे। अब तो इन बमों से हजार गुना शक्ति के बम तैयार हो रहे हैं। इन बड़े बमों की मारक क्षमता बड़ी ही भयंकर होती है।
टेढ़े मेढे और हकले हो जाएंगे बच्चे
विकिरण का सबसे बुरा प्रभाव प्रजनन और भावी पीढ़ी के अनुवांशिक गुणों पर पड़ता है। उस प्रभाव को जांचने के लिए जीव शास्त्री प्रोफेसर ए. मुलर ने ‘एक्स किरणों की बौछार डोसोफिला मक्खियों पर की और यह पाया कि उससे उन मक्खियों के ‘जीन्स’ ही बदल जाते हैं। ‘जीन्स’ शरीर बनाने वाले कोशों के ‘अमर संस्कारों’ को कहते हैं।
शरीर कैसा बनेगा, रंग गोरा होगा या काला, आंखें नीली होंगी काली या भूरी, हाथ में पांच उंगलियां होंगी या छः। हड्डी पतली होगी या मोटी यह सब ‘जीन्स’ पर आधारित होता है।
प्रोफेसर मुलर का कहना है कि आज की सभ्यता और विज्ञान को चलन पर गौर नहीं किया गया तो एक दिन वह आएगा जब संसार अन्धे, बहरे, लंगड़े-लूले, गूंगे, कुरूप, टेढ़े-मेढ़े हकले और विक्षिप्त जनों से भर जाएगा।
भारत क्योंकि दुनिया का बेहद गरीब और प्रदूषित देश है इसलिए यहां तो स्थिति और भी खराब हो सकती है। प्रो. मुलर और उनके सहयोगियों ने इस लिहाज से जांच की तो पाया कि यहां स्थिति इतनी विकट नहीं है।
परमाणु के खतरे से भारत को बचा रहा है यह
हांलाकि उसके बेहद बिगड़े होने के पर्याप्त कारण हैं लेकिन कुछ उपचार उसे बचाए रखते हैं। मुलर की टीम के मुताबिक यहां होते रहने वाले यज्ञ इसका बड़ा कारण है।
यज्ञों में जलाई गई औषधियां भी विकिरण पैदा करती है पर यह पौष्टिक एवं स्वास्थ्य वर्धक पदार्थों का विकिरण होता है उसमें ‘जीन्स’ को शुद्ध संस्कारवान और स्वस्थ बनाने की उतनी ही प्रबल क्षमता होती है जितने विषैले तत्वों में प्रदूषण उत्पन्न करने की क्षमता है।
मंत्रों की ध्वनियां उस वायुभूत शुद्धता को तरंगित करके सारे आकाश में फैला देती है इसलिए यज्ञ का लाभ कम या अधिक सारे संसार को उसी प्रकार मिलता है जिस प्रकार बमों का विकिरण सारे संसार को पीड़ा और पागलपन की और धकेलता है।
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