जहां दंगों की आग थी, वहां नमो की चाय!
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गुजरात दंगों की आंच भड़के भले 12 साल का अरसा गुजर गया हो, लेकिन आज भी उन गलियों में सन्नाटे से लबालब खौफ पसरा है, जहां कभी कई परिवार सड़कों पर फना कर दिए गए थे।
उस वक्त के सूबे के मुख्यमंत्री आज देश का प्रधानमंत्री बनने का ख्वाब देख रहे हैं। उनके दामन पर पड़े दाग भले अदालत के फैसलों ने कुछ हल्के कर दिए हों, लेकिन सवालों का कटघरा आज भी उनकी मुसीबत बढ़ा रहा है।
मोदी की छवि बदलने की रणनीति अब तक कुछ यूं रही। पहले हिंदूवादी नेता बन गए, फिर विकास पर जोर दिया। इसके बाद दौर आया कुशल प्रशासक का दंभ भरने का और जब साफ हो गया कि इस बार दावेदारी देश की कुर्सी के लिए है, तो दांव फेंका गया 'चायवाले' का। गुजरात की जिन गलियों की दीवारें अब भी दंगों के निशां लिए हुए हैं, वहां नमो टी स्टॉल लगाए जा रहे हैं। उम्मीद यह है कि चाय की भाप में पुराने पाप उड़ जाएंगे!
कुतुबुद्दीन अंसारी की आंखों में दिखा खौफ
गुजरात दंगों के दौरान एक चेहरा ऐसा उभरा था, जिसकी एक तस्वीर ने अल्पसंख्यकों के सारे दर्द का निचोड़ देश के सामने रखा। हाथ दया की भीख मांग रहे थे और आंखों में भरे आंसू वहां बरपे कहर की कहानी कह रहे थे। यह कुतुबुद्दीन अंसारी थे, जो सुरक्षाबलों से दंगाइयों को रोकने और जान बचाने की गुहार लगा रहे थे।
दंगों के वक्त यही चेहरा अखबारों, मैगजीन, टीवी चैनलों पर छाया था। कुतुबुद्दीन इन दिनों गुजरात दंगों की सबसे ज्यादा मार सहने वाले नरोदा पाटिया में रहते थे। इस इलाके में दंगाइयों पर करीब 97 अल्पसंख्यकों को मौत के घाट उतारने का इल्जाम लगा।
इंसान के हैवान बनने की इस घटना को करीब 12 साल गुजर चुके हैं, लेकिन दंगों का दर्द आज भी लोगों के जेहन में जिंदा है। जहां गुजरात दंगों का सबसे काला स्याह इतिहास था, आज वहां भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के प्रचार में पोस्टर और होर्डिंग्स टंगने लगे हैं। आज मोदी प्रधानमंत्री बनने के लिए उन्हीं दंगा पीड़ितों से वोट मांग रहे हैं।
नरोडा पाटिया की चाय दुकान बनी नमो स्टॉल
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक कुतुबुद्दीन अंसारी अपने घर से 100 मीटर दूर अपने दोस्त जुबैर शेख की चाय की दुकान पर रोज चाय पीने आया करते हैं। लेकिन आज उस दुकान को बदलकर नमो टी स्टॉल का नाम और चेहरा दे दिया गया है।
दरअसल, भाजपा कार्यकर्ताओं ने लोकसभा चुनावों के प्रचार के लिए जुबैर शेख की चाय की दुकान को रिब्रांड कर उसे नमो टी स्टॉल बना दिया है। मोदी के प्रचार योजना के तहत ये पूरा काम किया गया है।
दंगों से पहले भी अंसारी अपने दोस्त जुबैर शेख की चाय की दुकान पर आया करते और अब भी आते हैं, लेकिन फर्क इतना है कि
आज वो जगह बेस्ट टी स्टॉल के जगह नमो टी स्टॉल बन गई है।
स्टॉल पर आते हैं दंगा पीड़ित
दंगों से पहले जुबैर शेख की दुकान का नाम बेस्ट टी स्टॉल था, जो सोमवार को बदलकर नमो टी स्टॉल में परिवर्तित कर दी गई है। दुकान पर भगवा रंग से रंगे हुए बोर्ड पर नरेंद्र मोदी का बोर्ड लगाया गया है। चाय की दुकान पर लगा यह बोर्ड मोदी का नाम जप रहा है, 'साधारण व्यक्ति, असाधारण व्यक्तित्व।'
जुबैर की इस दुकान को नया रूप भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के गुजरात उपाध्यक्ष ने प्रकाश गुर्जर ने दिया है। इस दुकान को चलाने वाले जुबैर कहते हैं मुझे नहीं लगता कि इस नई दुकान के इस बदले रंग रूप से फायदा होगा। उन्होंने कहा, "मेरी दुकान पर ज्यादा 2002 दंगों के पीड़ित ही लोग आते हैं।"
जुबैर शेख की दुकान से नरोदा पाटिया सिर्फ तीन किलोमीटर दूर है। जुबैर ने बताया कि पार्टी के कार्यकर्ता मेरे पास आए और मेरी सहमति लेकर ये बोर्ड लगा गए।
'यहां नहीं मिलेगा मोदी को एक भी वोट
जुबैर ने बताया कि मोदी के प्रचार के लिए दूसरी जगहों पर भी नरेंद्र मोदी टी स्टॉल के बोर्ड लगाए गए। लेकिन वहां रहने वाले लोगों ने विरोध करते हुए ऐसे बोर्ड को हटा दिया।
वहां रहने वाले लोगों ने इन बोर्ड को लगाने पर विरोध जताया। वहां मौजूद दंगा पीड़ित कुतुबुद्दीन अंसारी ने कहा कि मोदी को अपने विरोधी विचारों की भी रक्षा करनी होगी।
नाम न छापने की शर्त पर वहां मौजूद एक आदमी ने कहा कि नरेंद्र मोदी लोकसभा चुनावों में यहां से एक भी वोट नहीं पाएंगे। शायद इसलिए भाजपा कार्यकर्ता यहां ज्यादा जोर लगा रही है।
क्या टी स्टॉल से मिलेंगे वोट?
नरेंद्र मोदी की प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी और मजबूत करने के लिए पूरे देश में जोर-शोर से प्रचार किया जा रहा है और इसके लिए टी-स्टॉल का दांव खेला जा रहा है।
सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक भाजपा के युवा कार्यकर्ता जोर शोर से जुटे हैं। इसी प्रचार अभियान के तहत पूरे देश में 1000 स्थानों पर मोदी टी स्टॉल बनाए जाएंगे। जहां बीजेपी के नेता लोगों के साथ वार्ता करेंगे।
इस प्रचार के दौरान खुद नरेंद्र मोदी भी कई जगह खुद मौजूद रहेंगे और लोगों से चर्चा करेंगे। उनके सवालों का जवाब देंगे। अपनी सरकार के दौरान क्या विकास कार्य करेंगे, इस पर चर्चा होगी।