फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Sharp decline in food production in the country

बुरी खबरः देश में खाद्यान्न उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका

Sat, 28 Feb 2015 12:12 AM IST
Updated Sat, 28 Feb 2015 12:12 AM IST
विज्ञापन
Sharp decline in food production in the country

आर्थिक समीक्षा में खाद्यान्न उत्पादन में गिरावट की संभावना ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सरकार के सामने भी चुनौती है कि वह जनता का पेट भरने वाले कृषि क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान दे।

विज्ञापन


आर्थिक समीक्षा के अनुसार बीते वर्ष मानसूनी बारिश में 12 प्रतिशत की कमी के कारण खाद्यान्न उत्पादन में तीन फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इस वर्ष खाद्यान्न का उत्पादन 85 लाख टन कम है। पिछले साल 26.55 करोड़ टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ था।
विज्ञापन


खाद्यान्न उत्पादन में आई कमी पर आर्थिक समीक्षा ने चिंता जताते हुए कहा गया है कि खाद्य सुरक्षा मजबूत करने के लिए कृषि की कार्य नीति में ध्यान देना होगा। उपज और उत्पादकता बढ़ाने पर जोर देना होगा। दूसरी ओर कृषि क्षेत्र की अनदेखी को स्वीकारते हुए कहा गया है कि इस क्षेत्र में भारी निवेश की जरूरत है।

विज्ञापन
विज्ञापन

कृषि उत्पादन में कमी बढ़ा सकती है सरकार की चिंता

Sharp decline in food production in the country

पिछले वर्ष की तुलना में खाद्य सब्सिडी बिल में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो कि वित्त मंत्री के लिए चिंता का विषय है। इसलिए सरकार को कृषि उपज और उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान देना होगा।

कृषि क्षेत्र में लचीलापन लाने के साथ उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित करने, कोल्ड स्टोरेज, सिंचाई और अनुसंधान पर जोर देने की वकालत की गई है। हालांकि, कृषि क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने के लिए सरकार ने पहल भी शुरू कर दी है।

राज्य के भीतर कृषि उत्पाद की ढुलाई पर सभी प्रतिबंधों को हटा लिया गया है। जिंसों के लिए राष्ट्रीय साझा कृषि बाजार की जरूरत पर जोर दिया गया है। समीक्षा में राष्ट्रीय बाजार की स्थापना, किसानों के बाजार और एपीएमसी अधिनियम में सुधार के लिए केंद्र और राज्य सरकार दोनों से हाथ मिलाकर सुधार पर जोर दिया गया है।

संचार क्रांति से कृषि क्षेत्र को जोड़ते हुए ई-मंच बनाने के लिए सरकार ने 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस पैसे से कृषि विपणन के लिए ई-चौपाल सरीखे ई-मंच शुरू किए जाएंगे, जिसके जरिये किसान अपनी उपज को वाजिब दाम पर उचित जगह बेच सकेंगे। सरकार ने दिल्ली में एक किसान मंडी के विकास की पहल की है। ई-मंच के जरिये इसे देशभर के किसानों के बीच ले जाने की तैयारी है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed