बुरी खबरः देश में खाद्यान्न उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका
आर्थिक समीक्षा में खाद्यान्न उत्पादन में गिरावट की संभावना ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सरकार के सामने भी चुनौती है कि वह जनता का पेट भरने वाले कृषि क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान दे।
आर्थिक समीक्षा के अनुसार बीते वर्ष मानसूनी बारिश में 12 प्रतिशत की कमी के कारण खाद्यान्न उत्पादन में तीन फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इस वर्ष खाद्यान्न का उत्पादन 85 लाख टन कम है। पिछले साल 26.55 करोड़ टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ था।
खाद्यान्न उत्पादन में आई कमी पर आर्थिक समीक्षा ने चिंता जताते हुए कहा गया है कि खाद्य सुरक्षा मजबूत करने के लिए कृषि की कार्य नीति में ध्यान देना होगा। उपज और उत्पादकता बढ़ाने पर जोर देना होगा। दूसरी ओर कृषि क्षेत्र की अनदेखी को स्वीकारते हुए कहा गया है कि इस क्षेत्र में भारी निवेश की जरूरत है।
कृषि उत्पादन में कमी बढ़ा सकती है सरकार की चिंता
पिछले वर्ष की तुलना में खाद्य सब्सिडी बिल में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो कि वित्त मंत्री के लिए चिंता का विषय है। इसलिए सरकार को कृषि उपज और उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान देना होगा।
कृषि क्षेत्र में लचीलापन लाने के साथ उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित करने, कोल्ड स्टोरेज, सिंचाई और अनुसंधान पर जोर देने की वकालत की गई है। हालांकि, कृषि क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने के लिए सरकार ने पहल भी शुरू कर दी है।
राज्य के भीतर कृषि उत्पाद की ढुलाई पर सभी प्रतिबंधों को हटा लिया गया है। जिंसों के लिए राष्ट्रीय साझा कृषि बाजार की जरूरत पर जोर दिया गया है। समीक्षा में राष्ट्रीय बाजार की स्थापना, किसानों के बाजार और एपीएमसी अधिनियम में सुधार के लिए केंद्र और राज्य सरकार दोनों से हाथ मिलाकर सुधार पर जोर दिया गया है।
संचार क्रांति से कृषि क्षेत्र को जोड़ते हुए ई-मंच बनाने के लिए सरकार ने 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस पैसे से कृषि विपणन के लिए ई-चौपाल सरीखे ई-मंच शुरू किए जाएंगे, जिसके जरिये किसान अपनी उपज को वाजिब दाम पर उचित जगह बेच सकेंगे। सरकार ने दिल्ली में एक किसान मंडी के विकास की पहल की है। ई-मंच के जरिये इसे देशभर के किसानों के बीच ले जाने की तैयारी है।