मुनव्वर, रमेशचंद्र शाह को साहित्य अकादमी पुरस्कार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
साहित्य अकादमी ने भारतीय भाषाओं में 2014 के वार्षिक पुरस्कारों की घोषणा कर की। 22 भाषाओं के साहित्यकारों को मिलने वाले पुरस्कार में हिंदी के लिए पुरस्कार वरिष्ठ कथाकार, कवि, निबंधकार और चिंतक डॉक्टर रमेशचन्द्र शाह को दिया जाएगा। जबकि उर्दू के लिए मशहूर शायर और उर्दू कवि मुनव्वर राना को को दिया जाएगा।
डॉक्टर शाह समेत 22 भाषाओं के साहित्यकारों को भी साहित्य अकादमी पुरस्कारों से नवाजा जाएगा। इन साहित्याकारों में उत्तर भारत से हिंदी पुरस्कार वर्ष 2015 में 9 मार्च को एक विशेष समारोह में प्रदान किए जाएंगे।
डॉ रमेशचन्द्र शाह को उनके उपन्यास विनायक और मुनव्वर राना को उर्दू में उनकी कविता शाहदाबा के लिए पुरस्कृत किया जाएगा। साहित्य अकादमी पुरस्कार की सूची में इस साल आठ कविता संग्रह, पांच उपन्यास, तीन निबंध संग्रह, तीन कहानी संग्रह एक आत्मकथा, एक नाटक और एक समालोचना शामिल हैं।
वैसे तो मुनव्वर राना की प्रतिभा से पूरा देश वाकिफ है लेकिन उनकी कुछ ऐसी खूबिया जो उन्हें एक बड़ा शायर बनाती हैं। इसी प्रकार हिंदी लेखक रमेशचन्द्र शाह की भी एक खास कहानी है जो उनके सफर को बयान करती है।
मुनव्वर राना के शुरुआती दिन
मुनव्वर राना का जन्म उत्तर प्रदेश के राय बरली जिले के एक कस्बे में 26 नवंबर 1952 को हुआ था। कहते हैं कि जब 1947 भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हुआ तो मुनव्वर राना के सभी निकट संबंधी पाकिस्तान चले गए थे। लेकिन उनके पिता को भारत से इतना लगाव था कि वे देश छोड़कर नहीं जा सके।
भारत-पाकिस्तान बंटवारे के कुछ दिन बाद मुनव्वर राना के पिता पश्चिम बंगाल जाकर बस गए जिससे मुनव्वर रान की शिक्षा-दीक्षा बंगाल में ही पूरी हुई। मुनव्वर को चार भाषाओं हिंदू, उर्दू, बांग्ला और गुरमुखी लेखन की महारथ हासिल है लेकिन वह अपनी हिंदी रचनाओं में अवधी का भी बखूबी इस्तेमाल करते हैं।
राना ने अपनी रचनाओं की शुरुआत अपनी मां की तारीफ से की और इसके लिए उन्होंने मां नाम का एक संग्रह भी तैयार किया। उनकी सबसे बड़ी खूबी मां के लिए बेहद सम्मान है। आज भी मुनव्वर राना को जिस मुशायरे में बुलाया जाता है उसमें वो मां की तारीफ में कुछ पंक्तियां जरूर पढ़ते हैं।
उनके कुछ खास शेरों में एक है-
यह ऐसा कर्ज है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता।
मैं जब तक घर ना लौटूं मां सजदे में रहती है।।
किस-किसको मिला पुरस्कार
पुरस्कार के लिए चयनित हुए लेखकों में उनके कविता-संग्रहों के लिए पुरस्कृत 8 कवि हैं। मुनव्वर राना (उर्दू), उत्पल कुमार (बांग्ला), उर्खाव गोरा ब्रह्म (बोडो), आदिल जस्सावाला (अंग्रेजी), गोपालकृष्ण रथ (उड़िया), जसविन्दर (पंजाबी), गोपे कमल (सिंधी) और शाद रमजान कश्मीरी।
शैलेन्द्र सिंह (डोगरी), रमेशचन्द्र शाह (हिंदी), आशा मिश्र (मैथिली), सुभाष चन्द्रन (मलयालम) और पूमणि (तमिल) को उनकेउपन्यास हेतु पुरस्कृत किया जाएगा। स्वर्गीय अश्विन मेहता (गुजराती), जी.एच नायक (कन्नड़) और माधवी सरदेसाय (कोंकणी) को उनके निबंध संग्रह के लिए पुरस्कृत किया जाएगा।
अन्य साहित्यकारों में अरुपा पंतगीया कलिता (असमिया), नन्द हाडखिम (नेपाली) और रामपाल सिंह राजपुरोहित (राजस्थानी) को कहानी संग्रहों के लिए चुना गया है। वहीं, जयंत विष्णु नारलीकर (मराठी) को आत्मकथा, जबकि राचपोलम चन्द्रशेखर रेड्डी (तेलुगु) को समालोचना के लिए और जमादार किस्कू (संथाली) को उनके नाटक के लिए पुरस्कृत किया जाएगा।