17 के ऐलान से पहले कांग्रेस का सोलह श्रृंगार
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विधानसभा चुनावों में मुंह की खाने के बाद पार्टी ने पहला फेरबदल दिल्ली और छत्तीसगढ़ में किया।
दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस की कमान अरविंदर सिंह लवली को सौंपी गई। छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया।
पिछले साल विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की आंधी में कांग्रेस आठ ही विधायक अपना गढ़ बचा पाए, अरविंदर सिंह लवली उनमें से एक हैं।
लवली की नियुक्ति में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की भूमिका मानी जाती है। लवली के जरिए कांग्रेस ने दिल्ली में सिखों और युवाओं को लुभाने की कोशिश की है।
छत्तीसगढ़ की कमान सौंपी भूपेश बघेल के हाथ
विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी अपने विश्वसनीय चरणदास महंत को सौंपी थी। लेकिन गुटबाजी के कारण पार्टी लगातार तीसरी बार विधानसभा चुनावों में हार गई।
चरण दास महंत ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। गुटबाजी पर लगाम लगाने के लिए ही कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी भूपेश बघेल को सौंपी। बघेल अजीत जोगी गुट के विरोधियों में से एक हैं।
विधानसभा चुनावों में अजीत जोगी की कई हरकतें पार्टी को नागवार लगी थीं। इस फैसले में भी राहुल गांधी की भूमिका मानी गई और इस अजीत जोगी के असर को कम करने की कोशिश के रूप में देखा गया।
राजस्थान में सचिन से उम्मीद
विधानसभा चुनावों में राहुल गांधी की सबसे ज्यादा किरकिरी राजस्थान में हुई थी। गहलोत मंत्रिमंडल के दागी मंत्रियों के रिश्तेदारों को टिकट बांटे गए।
युवाओं को तरजीह देने के राहुल के आदेश के बाद भी महिपाल मदेरणा की 82 वर्षीय मां अमरी देवी को टिकट दिया गया। नतीज कांग्रेस की कारारी हार के रूप में सामने आया।
पार्टी ने प्रदेश की कमान हाल ही में सचिन पायलट को सौंपी है। सचिन को राहुल गांधी के करीबियों में माना जाता है।
अरुण यादव को सौंपा मध्यप्रदेश
कांग्रेस ने मध्यप्रदेश में दिग्जिवय खेमे की छुट्टी कर दी। प्रदेश में कांग्रेस की कमान पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री अरुण यादव को सौंपी गई।
कांग्रेस के इस फैसले को युवाओं को लुभाने की कोशिश और बैकवर्ड कार्ड के रूप में देखा गया। हालांकि ये कवायद मध्यप्रदेश की राजनीति में दिग्विजय सिंह का प्रभाव कम करने का भी प्रयास है।
विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी ने मध्यप्रदेश में हार के लिए दिग्विजय सिंह को जिम्मेदार ठहराया था।
हरियाणा में भी बन सकता है युवा अध्यक्ष
राहुल गांधी ने हरियाणा में भी किसी युवा को प्रदेश अध्यक्ष की बागडोर सौंपने की तैयारी कर ली है। अभी वहां मुख्यमंत्री भूपिंदर हुड्डा के करीबी फूल चंद मुलाना अध्यक्ष पद पर काबिज हैं।
माना जा रहा है कि वहां सिरसा से सांसद अशोक तवंर का पलड़ा भारी है।
मुख्यमंत्री का गुट अशोक तंवर को प्रदेश कांग्रेस की बागडोर सौंपने के हक में है। लेकिन विरोधी गुट इससे सहमत नहीं है।
कई और राज्यों में भी युवाओं को नेतृत्व
कांग्रेस संगठन में राहुल गांधी की चली तो कई प्रदेश में युवाओं को कांगेस की कमान सौंपी जा सकती है। उत्तराखंड, महाराष्ट्र, जम्मू कश्मीर आदि राज्यों में प्रदेश कांग्रेस का चेहरा बदला जाना भी करीब-करीब तय है।
उत्तराखंड सरकार में नेतृत्व परिवर्तन की भी बात हो रही है। उत्तर प्रदेश में भी पार्टी किसी युवा चेहरे को प्रदेश की कमान सौंपने पर विचार कर रही है।
दरअसल, विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद कांग्रेस आगामी लोकसभा चुनाव में ऐसे नेताओं को पार्टी का चेहरा बनाने की है, जिनके सहारे पार्टी विपक्ष से डटकर लड़ सके।
समय से पहले हो सकती है टिकटों की घोषणा
राहुल गांधी की इच्छा है कि लोकसभा चुनावों से पहले समय रहते ही उम्मीदवारों की घोषणा कर दी जाए ताकि उन्हें तैयारियों के लिए उचित समय मिल जाए
इसलिए माना जा रहा है कि इस महीने के अंत तक 150 से 200 उम्मीदवारों की सूची सामने आ सकती है। लोकसभा चुनाव अप्रैल-मई में होने हैं और इस तरह से उम्मीदवारों को तैयारियों के लिए तीन महीने का समय मिल जाएगा।
राहुल गांधी ने टिकट बंटवारे में पारदर्शिता बढ़ाने की पहल की है। कांग्रेस ने इसके बाद ही स्क्रीनिंग कमेटी बनाने का फैसला किया। कमेटी की घोषणा पिछले सप्ताह की गई।
लोकसभा टिकट के लिए बनी स्क्रीनिंग कमेटी
टिकट बंटवारे के लिए बनी स्क्रीनिंग कमेटी में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के महासचिवों, प्रदेश अध्यक्षों और कांग्रेस विधायक दल के नेता को शामिल किया गया है।
स्क्रीनिंग कमेटी में राहुल गांधी के करीबियों को महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है।
सुशील कुमार शिंदे, पवन कुमार बंसल, पीसी चाको, भुवनेश्वर कालिता, वी नारायणसामी, मल्लिकार्जुन खड़गे, व्यालार रवि, गुलाम नबी आजाद, आस्कर फर्नांडीज और जितेंद्र सिंह को स्क्रीनिंग कमेटियों को प्रभारी बनाया गया है।
बढ़ रही है संगठन में प्रियंका की भूमिका
लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को जीत दिलाने की कवायद में पार्टी में प्रियंका गांधी की भूमिका बढ़ाई जा रही है।
प्रियंका की राजनीतिक गतिविधियां अब तक अमेठी और रायबरेली तक ही सीमित रही हैं। लेकिन अब राष्ट्रीय स्तर पर भी सक्रिय होती दिख रही हैं।
पिछले दिनों उन्होंने कांग्रेस की कोर कमेटी की बैठक में भी भाग लिया था।
राहुल की छवि चमकाने की हो रही कोशिश
प्रधानमंत्री बनाने के प्रयास में राहुल गांधी की छवि बनाने की कोशिश की जा रही है।
कहा जा रहा है कि सोशल मीडिया और टीवी चैनलों पर राहुल गांधी की छवि चमकाने के लिए 500 करोड़ में विदेशी कंपनियों को हायर किया गया है।
हालांकि पार्टी ने इससे इनकार किया है। पार्टी का कहना है कि छवि चमकाने के लिए किसी कंपनी की जरूरत नहीं है। कांग्रेस ने राहुल गांधी को लेकर आक्रामक प्रचार अभियान शुरू कर दिया है।
'राहुल जी के नौ हथियार दूर करेंगे भ्रष्टाचार'
लोकसभा चुनावों की जीत की कोशिश में कांग्रेस धड़ाधड़ कई भ्रष्टाचार रोधी बिल रही है। कांगेस इन सभी बिलों का श्रेय राहुल गांधी को दे रही है। हाल ही में इस संबध में कुछ पोस्टर जारी किए गए थे।
जिसमें लोकपाल बिल, काला धन निरोधक, लोकपाल और सूचना अधिकार कानून का जिक्र किया गया है। इन पोस्टरों में कहा गया है कि राहुल जी के नौ हथियार दूर करेंगे भ्रष्टाचार।
नौ हथियारों से पार्टी का मतलब संसद से पारित लोकपाल, आरटीआई और काला धन निरोधक कानून है और अन्य प्रस्तावित बिल भ्रष्टाचार विरोधी बिल, एक्टिविस्ट सुरक्षा बिल, नागरिक समयबद्ध सेवा अधिकार, विदेशी एवं सरकारी अधिकारी रिश्वत रोकथाम, नागरिक मानक एवं दायित्व और सरकार सामग्री शामिल हैं।