मोदी को बनारस के लोग नकार देंगे: अजय राय
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कांग्रेस ने साल 1996 से अब तक पांच बार विधायक रहे अजय राय को वाराणसी से अपना उम्मीदवार बनाया है।
भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ उन्हें क्यों खड़ा किया गया, और उनके जीतने की क्या संभावनाएं हैं?
इन सारे सवालों का जवाब तलाशने की कोशिश में बीबीसी ने बात की।
वाराणसी से चुनाव लड़ना कहीं राजनीतिक ख़ुदकुशी तो नहीं?
मैं इस बात से इत्तेफ़ाक नहीं रखता। इसे क्लिक करें राजनीतिक सुसाइड नहीं कह सकते। बल्कि ये तो राजनीति में अपनी दमदारी साबित करने का समय है।
नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव क्यों लड़ रहे हैं?
नरेंद्र मोदी बनारस के नहीं हैं। बाहर के लोगों को बनारस की जनता बर्दाश्त नहीं करेगी। बनारस का जो अपना बेटा होगा, यहां की मिट्टी का जो होगा, वही यहां से चुनाव जीतेगा।
'पार्टी के आदेश से मोदी के खिलाफ लड़ रहा हूं'
दिग्विजय सिंह की बजाय आपको उतारने के पीछे कोई डील तो नहीं है?
यह सही है कि बनारस से दिग्विजय सिंह को चुनाव में उतारने की बात हो रही थी। लेकिन यह बात गलत है कि इसके लिए मुझसे कोई डील हुई है।
कांग्रेस एक परिवार की तरह है। परिवार में कोई डील नहीं होती। मुझे जो आदेश दिया जाएगा मैं उसे मानूंगा।
इस 'बड़े मुकाबले' के लिए राज्यसभा की सदस्यता का वादा किया गया है?
मैं तो पहले से ही विधायक हूं। 2017 तक विधानसभा का सदस्य हूं। तो उसमें कोई दिक्कत नहीं है। पार्टी जो कहेगी वह करने के लिए तैयार हूं।
बनारस के लोग आपको क्यों वोट दें?
क्योंकि मैं बनारस का पुत्र हूं, बनारस का भाई हूं, बनारस के परिवार का सदस्य हूं। इस बार 'धरती पुत्र' की लड़ाई है। जो बनारस की मिट्टी से जुड़ा व्यक्ति होगा लोग उसे वोट देंगे और जो बाहर का होगा उसे नकार देंगे।
आप अपनी जीत को लेकर कितने आश्वस्त हैं?
सौ फीसदी।
प्रियंका गांधी से हुई मुलाकात के बारे में बताएं।
कल प्रियंका जी से सीधी मुलाकात हुई थी। उन्होंने अपनी शुभकामनाएं मुझे दीं और कहा कि जाइए लड़िए और अच्छे से जीत कर आइए।
अमित शाह फ़ैक्टर आपके लिए क्या मायने रखते हैं?
अमित शाह बनारस में वोटों का बंटवारा या सांप्रदायिक ध्रुवीकरण नहीं कर पाएंगे। बनारस गंगा-जमुना संस्कृति का शहर है। यहां हिंदू-मुसलमान, सिख-ईसाई मिलकर काम करते है। लोग जैसा अनुमान लगा रहे हैं उसके बिलकुल विपरीत परिणाम आएंगे।
बनारस की मुख्य समस्याएं क्या हैं?
बनारस में सबसे बड़ी समस्या बिजली, पानी और सड़क की है। यहां की पूरी सड़कें टूटी हुई हैं। पीने के लिए साफ़ पानी नहीं है। जबकि यहां 20-25 सालों से लगातार भाजपा के ही सांसद और विधायक और मेयर हैं। यह सारा ठीकरा फूटेगा नरेंद्र मोदी जी के ऊपर।
इस नाते बनारस की जनता इस बार काम करने वाले और घर के व्यक्ति को चुनेगी। क्योंकि यहां की समस्याओं का समाधान वही कर पाएगा जो यहां के बारे में जानेगा।