...जब अन्ना ने आत्महत्या करने की सोची
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'मुझे पद्म श्री, पद्म भूषण मिला, अमेरिका और दक्षिण अफ्रीका में सम्मानित किया गया। एक करोड़ से ज्यादा की राशि मुझे पुरस्कारों में ही मिल गई, लेकिन मेरे बैंक एकाउंट में फूटी कौड़ी तक नहीं। सारा पैसा ट्रस्ट को दे दिया, उसके ब्याज से गरीब बेटियों की शादी होती है।' अन्ना हजारे ने अमर उजाला से अपने बारे में दिल खोलकर बताया।
उन्होंने कहा कि अगर बैंक बेलेंस होता, तो मुझे भी नींद के लिए गोली खानी पड़ती। ना कुछ लेकर आए, ना कुछ लेकर जाएंगे, तो पैसे की परवाह क्यों? चाहते तो करोड़ो कमा सकते थे, एक भ्रष्ट मंत्री के पीछे पड़ जाते तो करोड़ो दे देता, लेकिन कभी इसका ख्याल भी नहीं आया।
'400 बेईमान अफसर घर बिठा दिए'
अन्ना ने कहा कि मंदिर में रहता हूं, एक बिस्तर है सोने के लिए, एक प्लेट है खाने के लिए। लेकिन महाराष्ट्र में आन्दोलन करके छह मंत्रियों के विकेट गिरा दिए थे, 400 बेईमान अफसर घर बिठा दिए, सात कानून पास कराए, आरटीआई दिलाया, जो पूरे देश के काम आ रहा है।
अन्ना ने रालेगण सिद्धि के विकास की कहानी भी सुनाई।
वह बोले, जिस गांव में कभी 80 फीसदी लोग भूखे रहते थे, वहां से आज 6000 लीटर दूध और 250 ट्रक प्याज के बाहर जाते हैं। जहां कभी शराब की 40 भट्टियां थी, वहां 16 साल से कोई शराब तो क्या तंबाकू, बीड़ी तक नहीं पीता है।
1965 की लड़ाई में खाई गोली
अन्ना ने कहा कि एक बार तो उन्होंने आत्महत्या करने की सोची, लेकिन विवेकानन्द को पढ़ते ही नए रास्ते खुल गए। फिर महात्मा गांधी का प्रभाव पड़ा तो समाजसेवा के रास्ते पर चल दिए। अब वह भ्रष्टाचार के खिलाफ दूसरी आजादी की लडा़ई लड़ रहे हैं।