मौलानाओं की 'मुल्ला मुलायम' को खरी-खरी
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उत्तर प्रदेश में जबसे सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों के राहत कैंपों में रह रहे लोगों पर विवादास्पद बयान दिया है तबसे वह और सपा सरकार मुस्लिम नेताओं और धर्मगुरुओं के निशाने पर हैं। सोमवार को जमीयत उलेमा ए हिंद के महमूद मदनी ने राहत शिविरों का दौरा करते हुए कहा कि सपा सरकार दंगा पीड़ितों के जख्मों को और कुरेद रही है।
हालात यहां तक पहुंच गए कि सपा के सबसे दिग्गज मुस्लिम नेता मोहम्मद आजम खान को उनके बचाव में आगे आना पड़ा। आजम ने कहा कि यदि मुसलमानों को मुलायम के सेकुलर होने पर शक है तो इससे बड़ी बदनसीबी मुसलमानों की कोई ओर नहीं हो सकती। कहा कि यदि मुलायम सेकुलर नहीं हैं तो पूरी दुनिया में कोई सेकुलर पैदा नहीं हुआ।
आगे पढ़िए सपा सरकार और 'मुल्ला मुलायम' पर कैसे निकाला मौलानाओं और धर्मगुरुओं ने अपना गुस्सा-
दूसरा हमला: मौलाना निजामुद्दीन
मुजफ्फरनगर के राहत शिविरों में दंगा पीड़ितों की जगह कांग्रेस व भाजपा के षड्यंत्रकारियों के रहने के सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के बयान पर मौलानाओं में नाराजगी है। मुस्लिम नेताओं ने मुलायम के बयान को पूरी तरह से गैर जिम्मेदाराना और मुद्दे को राजनीतिक रंग देने वाला बताया है।
उनका कहना है कि सपा मुखिया को यदि लगता है कि राहत शिविरों में षड्यंत्रकारी रह रहे हैं तो उन्हें कमेटी गठित कर इसकी जांच करानी चाहिए। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) के महासचिव मौलाना निजामुद्दीन का कहना है कि सपा मुखिया ने यदि इस तरह का बयान दिया है तो यह पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है और मुद्दे को राजनीतिक रंग देने वाला है।
यह बयान हकीकत से ताल्लुक नहीं रखता। सच्चाई ये है कि कैंपों से तमाम लोग अपने घरों को लौट चुके हैं और जो लोग हैं वे मारे डर के नहीं जा रहे हैं। वे आहिस्ता-आहिस्ता जाएंगे।
तीसरा हमला: शाही इमाम बुखारी
दिल्ली जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना अहमद बुखारी इस बात पर हैरान हैं कि मुलायम सिंह की ओर से यह बयान आया। उनका कहना है कि ये बयान मुलायम का नहीं हो सकता। मुलायम ने आजम खां की रिपोर्ट पर यह बयान दिया है। वह कहते हैं कि आजम खां हमेशा मुसलमानों के दुश्मन रहे हैं।
सपा ने आंखें नहीं खोली तो उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। बुखारी ने कहा कि आजम के पास चार वोट नहीं हैं। लेकिन पता नहीं क्यों मुलायम आजम पर भरोसा करते हैं।
अब ये उन्हें तय करना है कि उन्हें मुसलमान चाहिए या आजम? उन्होंने कहा कि मुसलमान कांग्रेस और भाजपा से नाराज हैं। वह सपा को वोट देना चाहता है। पर, मुलायम ने अगर आजम जैसे लोगों पर भरोसा किया तो उन्हें नुकसान होगा। वह आजम को मंत्रिमंडल से हटाएं। मुलायम सिंह से अपील है कि वे अपने स्तर से शिविरों की जांच करा लें तो पता चल जाएगा कि वहां दंगा पीड़ित लोग ही हैं, जो सर्दी के कारण बहुत परेशान हैं।
चौथा हमला: यासूब अब्बास, शिया पर्सनल लॉ बोर्ड
आल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता यासूब अब्बास का कहना है कि किसी भी राजनीतिक दल को दंगे पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।
दंगे में जो घर खोता है, मां-बाप, भाई-बहन खोता है उसका दर्द वही समझ सकता है। चुनाव की वजह से मुजफ्फरनगर दंगे पर सियासत नहीं की जानी चाहिए। चुनाव आते-जाते रहेंगे।
यदि सपा मुखिया को लगता है कि राहत शिविरों में दंगा पीड़ित नहीं रहे हैं बल्कि भाजपा व कांग्रेस के षडयंत्रकारी रह रहे हैं तो उन्हें एक कमेटी गठित कर उसकी जांच करानी चाहिए। ऐसे लोग हों तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। बयानबाजी की जगह इंसानियत की बात होनी चाहिए।
पांचवां हमला: मौलाना अबुल कासिम नोमानी
सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के मुजफ्फरनगर राहत शिविरों में भाजपा और कांग्रेस के षडयंत्रकारियों के रहने वाले बयान पर दारुल उलूम और देवबंदी उलेमा ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि अपनी सरकार की नाकामियों को छुपाने के लिए मुलायम सिंह इस तरह का बयान दे रहें हैं।
दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने कहा कि सपा प्रमुख का बयान सरासर गलत है।
एक जिम्मेदार की जुबान से इस तरह के गैर जिम्मेदाराना जुमले ठीक नहीं हैं। ऐसा मुमकिन नहीं कि लोग जानबूझकर बच्चों को मरने के लिए राहत शिविरों में रखें। जो लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं उनको हर तरह की मदद मिलनी चाहिए और राहत कार्य तेजी से होना चाहिए।
छठा हमला: मौलाना मुफ्ती आरिफ कासमी
दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना मुफ्ती आरिफ कासमी ने कहा कि प्रदेश सरकार पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। जिससे मुलायम सिंह यादव बौखलाहट का शिकार हो गए हैं।
उन्होंने सपा पर आरएसएस के इशारे पर काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पिता मुलायम सिंह यादव और बेटे अखिलेश यादव को राहत कैंपों में भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ता तो नजर आ गए, लेकिन जिन्होंने मुसलमानों का खून बहाया वे बड़े लीडर उन्हें नजर नहीं आए।
मुफ्ती आरिफ ने कहा कि मुलायम के बयान का असर लोकसभा चुनाव में साफ दिखाई देगा। मदरसा अल जामिया तुल अनवरिया के मोहतमिम मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर ने कहा कि मुलायम सिंह यादव सरकार की नाकामियों पर नकाब डालने के लिए इस तरह का बयान दे रहे हैं।
सातवां हमला: मौलाना आफताब कासमी
तहरीक उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय सचिव मौलाना आफताब कासमी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार मुजफरनगर दंगा पीड़ितों को लेकर जरा भी गंभीर नहीं है। यही वजह है कि आज तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अपने को मुसलमानों का सबसे बड़ा हितैषी कहनी वाली सपा सरकार मुजफ्फरनगर और शामली में राहत शिविरों में रह रहे दंगा पीड़ितों के दुख दर्द से मुंह मोड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा कि सपा सरकार के दो साल के कार्यकाल में सैकड़ों दंगे हो चुके हैं। प्रदेश सरकार सांप्रदायिक ताकतों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं कर रही। इससे उनके हौसले बुलंद हो रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मुजफ्फरनगर दंगे के सिलसिले में किसी भी मुसलमान नौजवान को झूठे मुकदमे में फंसाकर गिरफ्तार करने की कोशिश की गई तो तहरीक उलेमा-ए-हिंद सड़कों पर उतरने को बाध्य होगी।
मदरसा दारुल उलूम फारुखिया के मोहतमिम मौलाना नूरुलहुदा कासमी ने कहा कि
सत्य जाने बिना इस तरह का बयान देना उचित नहीं है। ऐसे बयान देने के बजाए
दंगा पीड़ितों की मदद करनी चाहिए।
आठवां हमला: मौलाना तौकीर रजा
हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग विभाग के सलाहकार पद से इस्तीफा दे चुके इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा ने कहा कि मौजूदा हालात में समाजवादी पार्टी मुसलमानों का ऐतबार पूरी तरह खो चुकी है।
तौकीर रजा ने मुलायम सिंह यादव के उस बयान की भी निंदा की, जिसमें उन्होंने कहा था कि मुजफ्फरनगर के दंगा पीड़ित कैंपों में भाजपा व कांग्रेस के षड्यंत्रकारी रह रहे हैं। कहा कि मुलायम का बयान न सिर्फ मुस्लिमों, बल्कि मानवता को बेइज्जत करने वाला है। उन्होंने कहा, आखिर क्या कारण है जो अभी तक मुलायम मुजफ्फरनगर नहीं गए?
दसवां हमला: मौलाना अमीर रशादी मदनी
राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अमीर रशादी मदनी ने मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों के कैंप को लेकर सपा सरकार को निशाने पर लिया है। मदनी ने कैंप पर बुलडोजर चलवाने का आरोप लगाते हुए सरकार द्वारा शपथ पत्र लेकर पांच लाख रुपये की राहत को नाटक बताया है।
शनिवार को लखनऊ में मौलाना रशादी ने कहा कि सरकार सहायता के नाम पर राहत शिविर में रह रहे मुजफ्फर नगर के दंगा पीड़ितों को उनके घरों से बेदखल कर रही है। उन्होंने बताया कि सहायता के नाम पर पांच लाख के लिए जो शपथ पत्र लिया जा रहा है, उस पर लिखा है कि सहायता राशि पाने वाले लोग अपने घरों को कभी वापस नहीं जा सकते हैं। अगर वे वापस जाते हैं तो उनकी सहायता राशि उनसे वसूल ली जाएगी। मौलाना ने कहा कि हद यह है कि जो लोग कैंपों में रह रहे हैं उन्हें यहां से चले जाने के लिए प्रशासनिक दबाव बनाते हुए कैंपों पर बुलडोजर चलवाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सपा सरकार इन सभी आदेशों को तत्काल वापस लेते हुए कैंपों में रह रहे दंगा पीड़ितों को उनके घरों पर सुरक्षित भिजवाने व पुनर्वास की व्यवस्था करे। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं हुआ तो उलेमा काउंसिल जल्द ही पूरे प्रदेश में जन आंदोलन शुरू करेगी।
ग्यारहवां हमला: मौलाना मन्नान मियां
रजा मुस्लिम मिशन के अध्यक्ष मौलाना मन्नान मियां ने कहा कि कबीना मंत्री आजम खां यूपी में मुसलमानों के साथ हो रही नाइंसाफी के लिए सबसे बड़े जिम्मेदार हैं। मुजफ्फरनगर के दंगे के बाद शिविरों में रहने वाले मुसलमानों की हालतों को देखते हुए सभी मुस्लिम मंत्रियों को इस्तीफा दे देना चाहिए। सियासी लोगों का पिट्ठू बनकर रहने से अब काम नहीं चलने वाला।
मौलाना मन्नान मियां नेसपा मुखिया मुलायम सिंह यादव को जमकर आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह हों या वे नेता जो ओहदों के लालच में मुस्लिमों पर जुल्म करा रहे हैं, उन्होंने दरगाह पर आने की कोशिश की तो लाहौल पढ़कर उन्हें भगाया जाएगा। इससे भी काम नहीं बना तो देश की हर मस्जिद से ऐसे नेताओं के खिलाफ लाहौल पढ़ने के लिए वह खुद माहौल बनाएंगे।
उन्होंने कहा कि सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के बेटे अखिलेश यादव को मुसलमानों की वजह से मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली। यूपी तो वह संभाल नहीं पा रहे हैं, दिल्ली संभालने की बात करके देश भर में अपना मजाक बनवा रहे हैं।
बारहवां हमला: मौलाना मोहम्मद तसलीम रजा कादरी
अहल-ए-सुन्नत मुस्लिम मूवमेंट के कौमी सदर और नबीर-ए-आला हजरत मौलाना मोहम्मद तसलीम रजा कादरी ने कहा कि गुजरात में नरसंहार के बाद मुजफ्फरनगर के दंगे देश की दूसरी घटना है जहां मुसलमानों को बेघर और बेबस करके कैंपों में रहने के लिए मजबूर किया गया है। इससे साफ है कि नरेंद्र मोदी और मुलायम सिंह यादव में कोई फर्क नहीं है।
मौलाना तसलीम रजा ने कहा कि हर सियासी दल ने मुसलमानों को वोट बैंक मानकर इस्तेमाल किया है। ऐसी सियासत ठीक नहीं है। मुजफ्फरनगर के दंगों में मुसलमानों पर हुए जुल्म की कहानी किसी से छिपी नहीं है। उनकी घर वापसी के सारे रास्ते बंद कर दिए गए। मुसलमानों के वोटों से उत्तर प्रदेश में बनी सपा की सरकार में ऐसा हुआ है। इसके बाद इसमें शक करने की कोई वजह नहीं कि मुलायम और नरेंद्र मोदी में कोई फर्क नहीं है।
तेरहवां हमला: मौलाना अनवारुल हक
बिजनौर में उलेमाओं ने मुजफ्फरनगर समेत प्रदेश में अन्य जगह हुए दगों के लिए सपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। आगामी लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को सबक सिखाने की बात कहते हुए ऐलान किया है कि मुस्लिमों पर जुल्म रोकने के लिए जिले भर में प्रदर्शन होंगे। दस जनवरी को नूरपुर में प्रदर्शन होगा।
जामा मस्जिद बिजनौर के इमाम मौलाना अनवारुल हक ने आरोप लगाया कि सपा को छोड़ प्रदेश में किसी अन्य दल की सरकार में दंगा नहीं हुआ। प्रदेश में सपा सरकार में अब तक 120 दंगे हुए। मुजफ्फरनगर का दंगा भी सपा सरकार की नाकामी की वजह से हुआ।