केजरीवाल सरकार ने पलटा शीला दीक्षित का बड़ा फैसला
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मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई पर शीला दीक्षित के फैसले को दिल्ली सरकार ने पलट दिया है।
उद्योग विभाग ने केंद्र सरकार के औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) को पत्र लिखकर साफ कहा है कि पुरानी सरकार ने मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई को जुलाई, 2012 में जो मंजूरी दी थी, उसे वापस लिया जा रहा है। कांग्रेस के राजनीतिक फैसले को पलटने का यह पहला मामला है।
दिल्ली के उद्योग सचिव अमित यादव ने बताया कि विभाग ने डीआईपीपी को पत्र लिखकर फैसले से अवगत करा दिया है। उसमें कहा है कि जो स्वीकृति दी थी, उसे वापस लिया जाता है।
बाकी सेक्टर को लेकर अभी कोई फैसला नहीं किया गया है। उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी ने घोषणा पत्र में कहा था कि वह रिटेल में एफडीआई के खिलाफ है।
फैसले का हुआ था जबरदस्त विरोध
गौरतलब है कि केंद्र सरकार के फैसले को बल देने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने सबसे पहले रिटेल में एफडीआई को मंजूरी दी थी, क्योंकि तब यूपीए सरकार के फैसले का जबरदस्त विरोध हो रहा था।
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार किसान, सीधे खुदरा व्यापारी को अपना सामान नहीं बेच सकता। उसे मंडी समिति के माध्यम से आना पड़ता है।
केंद्र सरकार ने जिस एफडीआई को स्वीकृति दी है, उसके अनुसार रिटेल को लाइसेंस देने वाली राज्य सरकारों की सहमति जरूरी है।
अभी तक महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश और असम के साथ दिल्ली ने सहमति भेजी हुई थी। रिटेल में एफडीआई की अनुमति सिर्फ उन्हीं शहरों में होगी, जहां की आबादी 10 लाख से अधिक है।
दूसरे राज्य भी दे सकते हैं झटका
मल्टी ब्रांड रिटेल में एफडीआई का रास्ता खोलने वाली केंद्र की यूपीए सरकार को अन्य राज्य भी तगड़ा झटका दे सकते हैं।
भारती-वालमॉर्ट का गठजोड़ टूटने से मायूस केंद्र के मंसूबों पर दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार भी पानी फेर चुकी है।
केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में मल्टी ब्रांड रिटेल क्षेत्र में एफडीआई को अनुमति देने से साफ मना कर दिया है। हाल फिलहाल ब्रिटिश रिटेल कंपनी टेस्को के प्रस्ताव को मंजूरी देकर उत्साहित केंद्र को इससे मायूसी हाथ लगी है।
दिल्ली सरकार के कदम के बाद अब रिटेल स्टोर खोलने को राजी हो चुके दूसरे राज्य भी हाथ खींच सकते हैं। सरकार के लिए इस कड़ी में अगला राज्य राजस्थान हो सकता है। यहां कांग्रेस को हटाकर हाल ही में भाजपा की सरकार बनी है।
मंजूरी का अधिकार राज्य सरकारों के पास
वाणिज्य मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार मल्टी ब्रांड रिटेल में एफडीआई लाने की अंतिम मंजूरी देने का अधिकार राज्य सरकारों के पास है। एक अधिकारी के अनुसार यह पूरा मुद्दा वाणिज्यिक से ज्यादा राजनीतिक हो चुका है।
प्रस्ताव की मंजूरी के समय देश के 12 राज्यों ने मल्टी ब्रांड रिटेल के जरिए कंपनियों को रिटेल स्टोर खोलने की मंजूरी दी थी। सोमवार को दिल्ली ने इससे अपना हाथ खींच लिया।
दिल्ली सरकार के फैसले पर उद्योग संगठनों ने निराशा जताई है। फिक्की के अध्यक्ष सिद्धार्थ बिड़ला के अनुसार इक कदम से दिल्ली में निवेश माहौल पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
अभी राजस्थान, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश, असम, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मणिपुर, दमन और दीव ने मंजूरी दी है।