'जज ने हाथ डाला, मुझे किस किया...मैं सन्न रह गई'
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नेशनल ग्रीन ट्राब्यूनल के चेयरमैन और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार पर एक महिला ने यौन शोषण का आरोप लगाया गया है। जब कुमार सुप्रीम कोर्ट में जज थे, तो यह महिला उनकी इंटर्न थी।
यह महिला मई 2011 में जस्टिस कुमार की ऑफिशियल इंटर्न थी। तब वह वेस्ट बंगाल नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिडिशियल साइंसेज, कोलकाता की छात्रा थी।
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक महिला ने 30 नवंबर, 2012 को चीफ जस्टिस पी सदाशिवम को सात पन्नों का हलफनामा दिया, जिसमें उसने जस्टिस स्वतंत्र कुमार पर संगीन इल्जाम लगाए हैं।
'जज ने की शारीरिक छेड़छाड़'
हलफनामे में महिला ने पूर्व जज पर 'जबरदस्ती शारीरिक छेड़छाड़ और यौन रूप से संकेत देने' का इल्जाम लगाया है। महिला ने ऐसे वाकये भी बताए, जब उन्होंने यौन इच्छाओं के साथ उसे कथित तौर पर छुआ।
महिला ने यह साबित करने के लिए ऑफिशियल ईमेल अटैच किए कि वह जज के साथ इंटर्न थी और साथ ही फ्लाइट की टिकट भी दिखाई, जो उसने 30 मई को वापस कोलकाता के लिए पकड़ी थी। यह उड़ान जज के दूसरी बार कथित तौर पर यौन दुर्व्यवहार करने के दो दिन बाद थी।
महिला का कहना है कि परिवार से बातचीत करने के बाद इस बार उसने तय कर लिया कि वह अपनी इंटर्नशिप बीच में ही छोड़ देगी और कॉलेज लौट जाएगी।
जस्टिस कुमार ने दी सफाई
इस पर जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने कहा, "ये आरोप पूरी तरह गलत और निराधार हैं। मुझे सिर्फ आपके जरिए पता चल रहा है कि इस तरह का कोई हलफनामा भेजा गया है। कृपया उसे मत छापिएगा, क्योंकि इसके नतीजे काफी गंभीर हो सकते हैं।"
नाम बताकर यह पूछने पर कि क्या इस महिला ने आपके साथ इंटर्नशिप की थी, जस्टिस कुमार ने कहा, "नहीं, उसने मेरे यहां इंटर्नशिप नहीं की थी। कम से कम, मुझे तो ऐसा कुछ याद नहीं है। हमारे साथ बहुत से इंटर्न काम करते हैं।"
संपर्क करने पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह ने कहा, "इस महिला के साथ जस्टिस स्वतंत्र कुमार ने यौन शोषण किया है, जब वह सुप्रीम कोर्ट में जज थे। उस महिला ने मुझमें विश्वास जताया और हम इसे तार्किक अंत तक ले जाएंगे।" यह महिला जज के खिलाफ कदम उठाने को लेकर याचिका दाखिल करना चाहती है।
'कमर के निचले हिस्से पर हाथ रखा'
अपने हलफनामे में जस्टिस कुमार के खिलाफ शिकायतकर्ता ने कहा, "शुरुआती कुछ दिनों में जस्टिस कुमार से मेरी बातचीत सिर्फ इंटर्नशिप तक सीमित थी। वह मुझे और मेरी साथी इंटर्न को बुलाकर कॉन्फ्रेंस पर अपडेट जानने के लिए बुलाते थे।" वह उन्हें पर्यावरण संरक्षण पर एक कॉन्फ्रेंस आयोजित करने में मदद दे रही थी।
महिला ने बताया, "एक बार जस्टिस एस कुमार और मैं उनके ऑफिस से बाहर निकल रहे थे। मैं उनसे पहले बाहर निकली थी और जब वह बाहर आ रहे थे, तो उन्होंने अपना हाथ मेरी कमर के निचले हिस्से पर रखा। मुझे बहुत अजीब लगा, लेकिन मैंने इसे जाने दिया।"
ऐसी ही एक और घटना का जिक्र करते हुए महिला ने बताया, "28 मई, 2011 को मेरे काम में कुछ गलती हो गई थी। किसी मेहमान के शिरकत करने से जुड़ी फोन कॉल में मैंने कुछ गलत जानकारी दे दी थी, जिससे भ्रम हो गया। मुझे लगा कि जस्टिस कुमार से इस बारे में माफी मांगनी चाहिए।"
'जज ने मुझे चूमा, मेरे होश उड़ गए'
महिला ने अपने हलफनामे में लिखा है, "जब मैं उनके दफ्तर में दाखिल हुई, तो जस्टिस एस कुमार कमरे में अकेले बैठे थे। जब मैं उनके पास माफी मांगने और अपनी बात समझाने पहुंची, तो उन्होंने कहा कि चिंता करने की जरूरत नहीं है।"
अपने आरोप में महिला ने कहा, "जस्टिस कुमार ने मुझे डेस्क के उस तरफ आने के लिए कहा। मैंने वैसा किया, तभी उन्होंने अपना दाहिना हाथ मुझ पर रखा और कंधे पर चूम लिया। मैं सन्न रह गई और वहां से जल्दी से बाहर निकल गई। यह घटना दोपहर देर की थी। इसके बाद मैं ऑफिस से रवाना हो गई।"
महिला ने आगे लिखा है, "अब यह साफ हो चुका था कि जस्टिस कुमार के ऑफिस में काम जारी रखना मेरे लिए सुरक्षित नहीं है, इसलिए मैंने तुरंत इंटर्नशिप खत्म करने का फेसला किया।"
महिला को दिया नौकरी का ऑफर?
अपने हलफनामे के दूसरे हिस्से में इंटर्न ने अपनी और जस्टिस कुमार की बातचीत के एक और टुकड़े का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कॉलेज की बाद की योजनाओं के बारे में पूछा था।
महिला ने जब बताया कि वह सुप्रीम कोर्ट में ज्यूडिशियल क्लर्कशिप के लिए आवेदन करने के बारे में सोच रही हैं, तो जज ने कथित तौर पर ग्रेजुएशन के बाद अपने ऑफिस में बतौर क्लर्क जुड़ने का ऑफर दिया था।
महिला ने कहा, "मैं काफी खुश थी, लेकिन हैरानी भी थी, क्योंकि मैंने तब तक उनके साथ तब तक कोई लीगल रिसर्च का कामकाज नहीं किया था। मैं तब तक केवल उनके फोन कॉल का काम संभालती थी।"
'मुझसे पूछा, साथ ठहरने में दिक्कत तो नहीं?'
इंटर्न करने वाली महिला ने आगे बताया, "लेकिन इसके आगे उन्होंने जो कहा, उससे मैं हैरत में पड़ गई। जस्टिस एस कुमार ने मुझसे पूछा कि क्या इंटर्नशिप के दौरान मुझे उनके साथ ट्रैवल करने और होटल रूम में ठहरने में कोई दिक्कत तो नहीं होगी?"
महिला ने कहा, "मुझे समझ नहीं आया कि ऐसे में क्या कहा जाए और मुझे इस सवाल पर काफी अजीबोगरीब लगा। मैंने उन्हें जवाब दिया कि इस बारे में सोचकर बताऊंगी।"
उन्होंने कहा, "जस्टिस एस कुमार की इन बातों से मैं काफी डर गई थी और मैंने अपनी चिंता उसी शाम अपनी सहेली के साथ साझा की, जो एनयूजेएस में मेरी बैचमेट थी।"