सरकार का तोहफा, वन रैंक वन पेंशन हुई लागू
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केंद्र सरकार ने पूर्व सैनिकों को दिवाली का बड़ा तोहफा दिया है। सरकार ने शनिवार रात वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) को लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी।
योजना एक जुलाई 2014 से अमल में आएगी। हर पांच साल में पेंशन की समीक्षा की जाएगी। इसके लागू होने से करीब 25 लाख पूर्व सैनिकों और सैनिकों की विधवाओं को फायदा होगा। रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने शुक्रवार को ही कहा था कि दिवाली से पहले अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।
अधिसूचना के मुताबिक, पेंशन का आधार वर्ष 2013 ही होगा। 2013 में रिटायर हुए सैनिकों की अधिकतम और न्यूनतम पेंशन के औसत के हिसाब से नई पेंशन तय की जाएगी। इसमें समान रैंक और सेवा की समान अवधि का भी ध्यान रखा जाएगा। बकाया राशि (एरियर) का भुगतान चार बराबर छमाही किश्तों में किया जाएगा।
हालांकि सैनिकों की विधवाओं को एकमुश्त बकाया राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। इसमें महत्वपूर्ण यह भी है कि अब के बाद जो सैनिक अपनी मर्जी से रिटायरमेंट लेंगे, उनको ओआरओपी का लाभ नहीं मिलेगा।
भूतपूर्व सैनिकों ने दी थी चेतावनी
हालांकि अधिसूचना जारी होने के बाद पूर्व सैनिकों के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मेजर जनरल सतबीर सिंह (रिटायर्ड) ने कहा कि जिन नियमों के साथ ओआरओपी को लागू किया गया है, उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
यह वन रैंक वन पेंशन नहीं बल्कि वन रैंक फाइव पेंशन है। मालूम हो कि ओआरओपी को लागू करने की मांग को लेकर पिछले कई महीने से पूर्व सैनिक जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे हैं।
केंद्र सरकार ने 5 सितंबर को पूर्व सैनिकों के लिए वन रैंक वन पेंशन का ऐलान किया था लेकिन इस योजना के लागू होने में देरी को देखते हुए पूर्व सैनिकों ने शुक्रवार को अपने आंदोलन को और तेज करने, काली दिवाली मनाने और 9 नवंबर से देशभर में अपने मेडलों को लौटाने की घोषणा की थी।
ये थीं पूर्व सैनिकों की मांग, सरकार से ये मिला
ये थीं पूर्व सैनिकों की मांग
1. वीआरएस लेने वालों को भी मिले फायदा
2. हर साल नहीं तो हर दो साल में हो पेंशन की समीक्षा
3. वर्ष 2013 की अधिकतम पेंशन को आधार माना जाए
4. पांच सदस्यीय न्यायिक आयोग बने और इसमें तीन पूर्व सैनिक हों तथा एक माह में अपनी रिपोर्ट दे
5. पूर्व सैनिक एक अप्रैल 2014 से ओआरओपी को लागू करवाना चाहते थे
सरकार से ये मिला
1. अब से वीआरएस लेने वालों को ओआरओपी का फायदा नहीं
2. हर पांच साल में होगी समीक्षा
3. वर्ष 2013 की औसत पेंशन को आधार माना जाएगा
4. एक सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन और छह महीने में आएगी रिपोर्ट
5. सरकार ने एक जुलाई 2014 से लागू किया