तेलंगाना बिल को लोकसभा की मंजूरी
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तेलंगाना समर्थकों के लिए मंगलवार का दिन खुशियों की सौगात लाया है। लोकसभा में तेलंगाना विधेयक ध्वनिमत से पास हो गया है। इसके बाद लोकसभा कल तक के लिए स्थगित कर दी गई। राज्यसभा में बुधवार को यह बिल पेश किया जाएगा।
तेलंगाना बिल के विरोधियों के गुस्से की वजह से लोकसभा की कार्यवाही प्रसारण रोक दिया गया था।
बिल पारित होते ही आंध्र प्रदेश में तेलंगाना समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया है। हालांकि अभी भी प्रदेश में सुरक्षा-व्यवथा चौकस है। पुलिस अधिकारी किसी भी अनहोनी से बचने के लिए संवेदनशील इलाकों में गश्त लगा रहे हैं।
इधर, तेलंगाना विधेयक पारित होने के विरोध में कांग्रेस सांसद एल राजगोपल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। संसद में स्प्रे फेंकने को लेकर चर्चा में आए राजगोपाल को लोकसभा अध्यक्ष ने निलंबित कर दिया था।
'संसदीय इतिहास का काला दिन'
लोकसभा में तेलंगाना बिल पास होते ही इस पर सियासत भी शुरू हो गई है। वाईएसआर कांग्रेस के जगनमोहन रेड्डी ने इस संसदीय इतिहास में काला दिन करार दिया है। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि सदन में दिनदहाड़े लोकतंत्र की हत्या की गई। पार्टी इस फैसले को कभी स्वीकार नहीं करेगी।
वहीं समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने बिल को पारित करने के तरीके पर सवाल उठाए। मुलायम ने कहा कि उनकी मांग लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने भी अनसुनी कर दी। ऐसा नहीं होना चाहिए था।
जनता दल यूनाइटेड ने तेलंगाना बिल पारित का होने का विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट किया। पार्टी अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि राज्य के बंटवारे पर ऐसा नजारा जिंदगी में नहीं देखा।
आंध्र के मुख्यमंत्री दे सकते हैं इस्तीफा
गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने तेलंगाना राज्य पर गठन के लिए लोकसभा में बिल पेश कर दिया गया। हालांकि हंगामें के कारण बिल पर बहस नहीं हो सकी और लोकसभा स्थगित कर दी गई।
माना जा रहा है कि बिल के विरोध में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी आज इस्तीफा दे सकते हैं।
पिछले सप्ताह लोकसभा में हुए हंगामे के मद्देनजर संसद के भीतर और बाहर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए। सुरक्षाकर्मियों ने शुक्रवार को लोकसभा में हंगामा करने के कारण निलंबित पांच सांसदों को संसद में प्रवेश करने से रोक दिया।
बिल पर चर्चा के लिए कांग्रेस ने अपने सभी सांसदों को व्हिप जारी कर संसद में मौजूद रहने के निर्देश दिया है। भाजपा ने तेलंगाना बिल का समर्थन किया है, हालांकि पार्टी का कहना है कि हंगामे के बीच बिल को लोकसभा में पेश किया वह उसे ठीक नहीं मानती है।
कठिन है बिल की डगर
बिल पर अब तक सीमांध्र के सांसदों से ही खतरा था, लेकिन 16 सांसदों को लोकसभा से पांच दिनों के लिए निलंबित करने के बावजूद उसकी मुश्किलें कम नहीं हुई हैं।
अब तक इस बिल के पक्ष में खड़ी भाजपा भी सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है। लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज पहले ही ऐलान कर चुकी हैं कि वह सरकार के बिल पेश किए जाने के दावे से सहमत नहीं हैं। भाजपा तेलंगाना बिल को लोकसभा में पेश हुआ नहीं मान रही है।
भाजपा की कोशिश है कि तेलंगाना का समर्थन करते हुए यह बिल पास नहीं पर इसका ठीकरा सरकार के सिर फोड़ा जाए। यही नहीं भाजपा तेलंगाना विरोधी 16 सांसदों के निलंबन पर भी सवाल खड़ा कर रही है। उसका मानना है कि जिस तरह इन सांसदों की बात नहीं सुनी गई, उससे उन्हें विरोध के लिए मजबूर होना पड़ा।
सरकार के लिए लोकसभा में भाजपा ही मुसीबत नहीं बनेगी बल्कि उसकी नजर कई तेलंगाना विरोधी सांसदों और अपने पांच मंत्रियों पर भी रहेगी जो खुलेआम इस बिल का विरोध करते आ रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट बिल पर नहीं करेगा हस्तक्षेप
आंध्र प्रदेश को विभाजित करके पृथक तेलंगाना राज्य के गठन के लिए संसद में चल रही रस्साकशी पर हस्तक्षेप से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने अभी याचिका दायर करने का समय नहीं आया है। याचिकाएं अपरिपक्व हैं। सुप्रीम कोर्ट पहले भी दो बार तेलंगाना राज्य को लेकर दायर याचिकाएं खारिज कर चुका है।
जस्टिस एचएल दत्तू और शरद अरविंद बोबडे की बेंच ने यह दलील अस्वीकार कर दी कि अब तेलंगाना विधेयक संसद में पेश हो गया है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट इस पर सुनवाई कर सकता है।
अदालत ने कहा कि चूंकि विधेयक संसद में पेश किया जा चुका है, इसलिए वह इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता है। याचिकाकर्ता के वकील का कहना था कि विधेयक पेश करने की कार्यवाही संविधान के अनुच्छेद तीन के प्रावधान के अनुरूप नहीं थी।
इस पर बेंच ने कहा कि यह मुद्दा सात फरवरी को नौ याचिकाओं में भी था। हम अब कोई अलग दृष्टिकोण नहीं अपना सकते हैं।