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'अंडरवियर नियम',ताकि यौन शोषण से बचे रहें बच्चे
Updated Wed, 12 Mar 2014 09:27 AM IST
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आपको सत्यमेव जयते का वो एपिसोड याद है, जिसमें child abuse के मुद्दे पर बातचीत की गई थी। उस एपिसोड ने हर दर्शक को दहशत से भर दिया था।
मां-बाप को ये सोचने पर मजबूर कर दिया था कि क्या उनका बच्चा सुरक्षित है? लाख कोशिशों के बाद भी आज हम ये नहीं कह सकते कि हमारा बच्चा इस समाज में सुरक्षित है। कई बार तो बच्चे उनके साथ होने वाली गलत हरकत को समझ नहीं पाते और कुछ मामलों में वो खुलकर बता नहीं पाते।
आपने वो एपिसोड देखा हो तो आपको याद होगा कि एपिसोड के अंत में एक क्लास सरीखी हुई थी, जिसमें बच्चों को कुछ तरीके सिखाए गए थे। ये कुछ वैसा ही है।
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मां-बाप को ये सोचने पर मजबूर कर दिया था कि क्या उनका बच्चा सुरक्षित है? लाख कोशिशों के बाद भी आज हम ये नहीं कह सकते कि हमारा बच्चा इस समाज में सुरक्षित है। कई बार तो बच्चे उनके साथ होने वाली गलत हरकत को समझ नहीं पाते और कुछ मामलों में वो खुलकर बता नहीं पाते।
आपने वो एपिसोड देखा हो तो आपको याद होगा कि एपिसोड के अंत में एक क्लास सरीखी हुई थी, जिसमें बच्चों को कुछ तरीके सिखाए गए थे। ये कुछ वैसा ही है।
क्या है इस संस्था का उद्देश्य?
NSPCC एक ऐसी संस्था है, जो ब्रिटेन में सक्रिय है। ये संस्था बच्चों के साथ होने वाले हर प्रकार के शोषण को खत्म करने के लिए काम करती है। बीते दिनों संस्था ने एक PANTS rule जारी किया है।
संस्था के मुताबिक, अगर बच्चे इस नियम को समझ जाते हैं तो अगर उनके साथ कुछ भी ऐसा होता है तो वो इसे ज्यादा गंभीरता से समझ पाएंगे और प्रतिक्रिया दे पाएंगे।
ब्रिटेन में कई अभिभावकों ने इसे अपनाया और अपने बच्चों से बात की, जिसके बाद उन्हें कुछ ऐसे तथ्य पता चले जिन्हें उनके बच्चों ने अब तक उनसे नहीं कहा था।
संस्था के मुताबिक, अगर बच्चे इस नियम को समझ जाते हैं तो अगर उनके साथ कुछ भी ऐसा होता है तो वो इसे ज्यादा गंभीरता से समझ पाएंगे और प्रतिक्रिया दे पाएंगे।
ब्रिटेन में कई अभिभावकों ने इसे अपनाया और अपने बच्चों से बात की, जिसके बाद उन्हें कुछ ऐसे तथ्य पता चले जिन्हें उनके बच्चों ने अब तक उनसे नहीं कहा था।
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क्या है ये नियम?
ये नियम बेहद सरल है और PANTS शब्द के अक्षरों पर आधारित है। जिसमें हर अक्षर को एक खास तरीके से बताने की कोशिश की गई है। ये नियम बच्चों में समझ को बढ़ाने में कारगर है।
P: प्राइवेट्स आर प्राइवेट
इस संस्था का कहना है कि मां-बाप को बच्चों को सिखाना चाहिए कि जिन अंगों को ढकने के लिए आप अंडरगार्मेंट पहनते हैं वो प्राइवेट अंग हैं।
बच्चों को सिखाना चाहिए कि कोई भी उनसे ऐसे न कहे कि उन्हें वो अंग देखने है या छूने हैं। लेकिन डॉक्टर, नर्स और मां-बाप के छूने और देखने के अंतर को भी सपष्ट करना जरूरी है। पर उन्हें हर बात का कारण पता होना चाहिए।
बच्चों को सिखाना चाहिए कि कोई भी उनसे ऐसे न कहे कि उन्हें वो अंग देखने है या छूने हैं। लेकिन डॉक्टर, नर्स और मां-बाप के छूने और देखने के अंतर को भी सपष्ट करना जरूरी है। पर उन्हें हर बात का कारण पता होना चाहिए।
A: ऑलवेज रिमेंबर योर बॉडी बिलांग्स टू यू
अपने बच्चों को ये बताना चाहिए कि उनका शरीर केवल उनके लिए है, किसी और के लिए नहीं। कोई भी उन्हें छूकर या देखकर असहज महसूस नहीं करा सकता। यदि कोई ऐसा करता है तो उन्हें उसे रोकने का पूरा अधिकार है।
साथ ही वो इस तरह की किसी भी बात के लिए उनके पास आ सकता है।
साथ ही वो इस तरह की किसी भी बात के लिए उनके पास आ सकता है।
N:नो मीन्स नो
अपने बच्चे को बताऐं कि नहीं कहना सीखे। नहीं का मतलब नहीं होता है। उसे अपने शरीर को किसी भी प्रकार किसी दूसरे के अधीन नहीं होने देना है और आवाज बुलंद करनी है।
T:टॉक अबाउट सीक्रेट्स
अपने बच्चे को अच्छे और बुरे, दोनों तरह के अनुभवों को साझा करने के लिए सिखाएं। उसे इनका अंतर भी समझाएं।
आपके बच्चे को आपके साथ बात करने में सहज महसूस होना चाहिए और उसे ये भरोसा होना चाहिए कि उसकी जिंदगी का कोई राज उसके प्रति उनके प्यार को कम नहीं होने देगा।
आपके बच्चे को आपके साथ बात करने में सहज महसूस होना चाहिए और उसे ये भरोसा होना चाहिए कि उसकी जिंदगी का कोई राज उसके प्रति उनके प्यार को कम नहीं होने देगा।
S:स्पीक अप, समवन कैन हेल्प
अपने बच्चे को ये भी बताएं कि कैसी भी परिस्थिति हो उसे मदद के लिए सोचना नहीं चाहिए। वो किसी से भी अपनी बात कह सकता है। (www.nspcc.org.uk)