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बहुत डरावनी है ये परंपरा, जहां जिंदा शख्स बन जाता है मुर्दा
Updated Tue, 11 Feb 2014 01:17 PM IST
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दुनिया में जितने देश हैं, उससे कहीं ज्यादा परंपराएं और प्रथाएं है। हर प्रांत की अपनी एक परंपरा और मान्यता होती है। कुछ आपको हैरत में डाल देती हैं और कुछ आपको डरा जाते हैं।
मर्दानगी बढ़ाने के लिए खा लिए बटेर के अंडे और फिर...
क्यूबा की ये परंपरा आपको निश्चित तौर पर डरा देगी। जहां इंसान को जिंदा ही जमीन में दफना देते हैं।
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मर्दानगी बढ़ाने के लिए खा लिए बटेर के अंडे और फिर...
क्यूबा की ये परंपरा आपको निश्चित तौर पर डरा देगी। जहां इंसान को जिंदा ही जमीन में दफना देते हैं।
क्या है प्रथा?
क्यूबा में एक प्रथा के तहत जिंदा इंसान को दफना देते हैं। हवाना के पास एक छोटे से कस्बे में बूजी (शराब) फेस्टिवल बहुत प्रचलित है। इस त्योहार के दौरान जिंदा शख्स को दफना देते हैं। इसके तहत एक आदमी को ताबूत में बंद कर दिया जाता है और उसे सड़कों पर घूमाते हैं। साथ में बैंड भी होता है।
हैरतअंगेज! आज भी कैमरे के अंदर बैठा हुआ है तस्वीर वाला भूत
ताबूत के पीछे-पीछे दर्जनों की भीड़ चलती है। वो शराब के नशे में तालियां बजाते, नाचते चलते हैं। इतना ही नहीं सफेद बालों वाली एक महिला उस शख्स की विधवा बनती है। ये औरत सबकुछ उसी तरह करती है, जैसे कोई विधवा।
हैरतअंगेज! आज भी कैमरे के अंदर बैठा हुआ है तस्वीर वाला भूत
ताबूत के पीछे-पीछे दर्जनों की भीड़ चलती है। वो शराब के नशे में तालियां बजाते, नाचते चलते हैं। इतना ही नहीं सफेद बालों वाली एक महिला उस शख्स की विधवा बनती है। ये औरत सबकुछ उसी तरह करती है, जैसे कोई विधवा।
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तय समय पर होता है आयोजन
ये त्योहार पिछले 30 सालों से मनाया जा रहा है। हर साल 5 फरवरी को आयोजित होने वाला ये त्योहार Burial of Pachencho के नाम से जाना जाता है।
कुछ इस तरह सड़क पार करते डायनोसोर, आप भी देखें
एक ओर जहां ये किसी को जिंदा दफनाने के लिए होता है वहीं यहां के नजारे को देखकर आपको लगेगा जैसे यहां कोई शादी है।
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एक ओर जहां ये किसी को जिंदा दफनाने के लिए होता है वहीं यहां के नजारे को देखकर आपको लगेगा जैसे यहां कोई शादी है।
क्या है मान्यता?
वार्षिक तौर पर मनाए जाने वाले इस फेस्टिवल की शुरुआत 1984 में हुई थी। ये स्थानीय कार्निवाल के समाप्त होने और एक नए जन्म के सूचक के तौर पर देखा जाता है।
इसका ये नाम थिएटर से आया है। यहां जीवन कठिन है और लोग इस त्योहार को संघर्ष से जोड़कर भी देखते हैं। (daily mail)
इसका ये नाम थिएटर से आया है। यहां जीवन कठिन है और लोग इस त्योहार को संघर्ष से जोड़कर भी देखते हैं। (daily mail)