नन्ही सी जान ने मां के लिए कुर्बान कर दी अपनी जान
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मां-बच्चे का रिश्ता ऐसा होता है कि वो अपने आप में बेहद करीबी और प्यार भरा होता है।
इस कहानी में भी मां-बाप के रिश्ते का एक ऐसा ही रूप देखने को मिलता है।
दरअसल, इस कहानी में दोनों मां और बेटे को गंभीर बीमारी है। बीमारी भी ऐसी कि जिसमें इलाज न किए जाने पर दोनों की मौत पक्की है।
बेटे ने लिया फैसला
महज सात साल की उम्र से ही ब्रेन ट्यूमर था। डॉक्टरों के मुताबिक ट्यूमर इतना गहरा था कि उससे बच्चे की कुछ वक्त बाद मौत निश्चित थी।
चेन के इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उसकी मां को बताया था कि वो अब ठीक हो रहा है। लेकिन फिर जाती हुई गंभीर बीमारी लौट आई और डॉक्टरों ने बताया कि वो बड़ा बड़ा होने से पहले ही मर जाएगा।
वहीं दूसरी तरफ चेन की मां जाउ की दोनों किडनियां भी खराब हो गई थी।
दो लोगों के इस छोटे से परिवार पर दुखों का ऐसा साया टूटा कि डॉक्टरों ने बताया कि अगर कहीं से भी जाउ ने किडनी का इंतजाम नहीं किया तो उसकी दोनों किडनी फेल हो जाएगी और वो मर जाएगी।
मां की इस हालत का जब सात साल के चेन को पता लगा तो उसने लिया एक ऐसा फैसला जिसे लेने से पहले कोई भी हजार बार सोचे।
'मां मैं मरूंगा'
बच्चे ने मां की हालत को देखते हुए खुद की जान से हाथ धोने का फैसला लिया। इसके बारे में उसने अपनी मां से भी बात की।
पहली बार तो मां की जान बचाने के लिए खुद की जान गवां देने की बात सुनकर मां के दिल पर जैसे खंजर चल गए।
लेकिन थोड़े दिनों बाद दोनों के काफी बातें करने के बाद डॉक्टरों ने भी बेटे चेन के फैसले को सही बताया।
डॉक्टरों ने बताया कि चेन की जान तो ब्रेन ट्यूमर के वजह से वैसे भी चली ही जाएगी लेकिन मां की जान किडनी के लगाने पर बचाई जा सकती है।
बच्चा देखते ही देखते मर गया
अपनी मां की जान बचाने के लिए बच्चे ने डॉक्टरों को फौरन अपना ऑपरेशन करने को कहा।
डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर लड़के के दोनों ठीक किडनियां निकाल लीं और मां की खराब किडनी से उन्हें बदल दिया।
लेकिन ऑपरेशन के बाद जब मां को होश आया तब तक उसे जिंदगी तो मिल गई लेकिन उसका बेटा नहीं रहा।
ऑपरेशन के दौरान वो अपना दम तोड़ चुका था। बेटे का मां की जिंदगी के लिए किया गया ये दान शायद ही कभी कोई भूल सके।