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पलक झपकते ही एक शहर से दूसरे शहर पहुंचाएगी यह कार

Tue, 23 Dec 2014 07:50 AM IST
Updated Tue, 23 Dec 2014 07:50 AM IST
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Bloodhound: Building the world's fastest wheels

ये थोड़ा अंतरिक्ष यान है, कुछ कार जैसा है और कुछ जेट फाइटर जैसा।

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इन सबका मिला-जुला रूप है ब्लडहाउंड सुपरसोनिक कार, जिसकी रफ़्तार के बारे में आप सुनेंगे तो आपको यक़ीन नहीं होगा।

दुनिया के सबसे तेज़ विमान कॉनकॉर्ड की रफ़्तार से बस कुछ ही कम है इसकी स्पीड।

अगर सब कुछ इंजीनियरों की योजना के अनुसार चला तो नई पीढ़ी की इस 'कॉनकॉर्ड कार' की स्पीड होगी 1000 मील यानी क़रीब 1600 किलोमीटर प्रति घंटा।

ब्लडहाउंड एसएससी


ब्लडहाउंड (एसएससी) आख़िर कैसे हासिल करेगी ये रफ़्तार?

ब्लडहाउंड प्रॉजेक्ट के चीफ़ इंजीनियर मार्क चैपमैन कहते हैं कि पहला थ्रस्ट एसएससी इंजन कार को 763 मील प्रति घंटे की रफ़्तार देने में ही सक्षम था।

ब्लडहाउंड एसएससी में एक-दो नहीं बल्कि तीन इंजन हैं। पहले दो इंजन कंबाइंड हैं, तीसरा इंजन रेसिंग कार की तरह का है। जो कार को रॉकेट जैसी गति देता है।

ये इंजन 20 टन की ताक़त से सुपरसोनिक कार को रफ़्तार देगा।

चैपमैन कहते हैं कि ब्लडहाउंड एसएससी 1600 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार पाने के लक्ष्य से तैयार किया जा रहा है।

अनूठी खूबियां

Bloodhound: Building the world's fastest wheels

ब्लडहाउंड एसएससी को 2015 तक ट्रैक पर उतारने का लक्ष्य है।

अगर कार की खूबियों की बात करें तो कार में ड्राइवर के बैठने की जगह अंतरिक्ष, एरोनॉटिकल और फॉर्मूला वन इंजीनियरिंग के कॉम्बिनेशन से तैयार की गई है।

अब तक की तेज़ रफ़्तार कारों में तरल प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल होता है, जबकि ब्लडहाउंड में ठोस रबर ईंधन का इस्तेमाल होगा।

कार की चेसिस पर ख़ास ध्यान दिया गया है। सभी मशीनों को बनाने के लिए कार्बन फाइबर्स का इस्तेमाल किया गया है।

चेसिस में टाइटेनियम की छड़ों का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। साथ ही एल्यूमीनियम का भी। एल्यूमीनियम के ऑक्साइड की परत इतनी मोटी होगी कि इसमें किसी तरह की जंग नहीं लगेगी।

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कॉकपिट का ख़याल

Bloodhound: Building the world's fastest wheels

इंजन की थरथराहट कॉकपिट तक न पहुंचे, इसके लिए ख़ास तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

अंदर बैठे ड्राइवर को अहसास ही नहीं होगा कि कार का जेट इंजन कितना शोर कर रहा है। हाँ, शुरुआत में इंजन के शोर को लेकर कुछ परेशानी आ सकती है।

इसके लिए ड्राइवर ख़ास तरह के हेडफोन का इस्तेमाल करेंगे।

रेसिंग इंजन कार को अतिरिक्त ताक़त देता है। इससे यह कार इतनी तेज़ी से भागने लगती है कि अपनी ही पैदा की गई ध्वनि तरंगों तक को पीछे छोड़ देती है।

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