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गुरू बदल रहे हैं चाल, इन चार राशियों के लिए रहेंगे शुभ

ग्रहों के गुरू बृहस्पति चार महीने बाद 8 अप्रैल की रात 10 बजकर 23 मिनट पर मार्गी हो रहे हैं। बृहस्पति का वक्री-मार्गी होना ज्योतिष जिज्ञासुओं के लिए बड़ी घटना के रूप में माना जाता है।

मार्गी रहने पर गुरु प्राणियों की बुद्धि को सुचारू रूप से सही दिशा में चलाते है किन्तु वक्री होने पर मन-मस्तिस्क में भय-भ्रम और विषाद पैदा कर देते हैं।

शादी-विवाह, संतान सुख, मांगलिक कार्यों, आध्यात्मिक एवं शिक्षा संबंधी कार्यों में इनका विशेष योगदान रहता है। कुंडली में ये अकारक हों या वक्री अथवा किसी भी तरह से दोषयुक्त हों तो दोष शांति कराना उत्तम रहता है।

ज्योतिष शास्त्र में इन्हें साधु-संतों, आध्यात्मिक गुरुओं, तीर्थ स्थानों, मंदिरों, पवित्र नदियों और पवित्र पानी के जल स्तोत्रों, धार्मिक साहित्य और पीपलवृक्ष का कारक माना गया है।
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