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संजय दत्त के रिहाई मामले पर जेल विभाग की आई रिपोर्ट
amarujala.com- Presented by: कुशमिता राणा
Updated Wed, 14 Jun 2017 01:03 PM IST
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संजय दत्त और विदादों का तो पुराना रिश्ता है लेकिन फिलहाल उन्हे इस विवादों से छुटकारा मिलता दिख रहा है। महाराष्ट्र सरकार के मौजूदा नियमों के मुताबिक ही संजय दत्त को जेल की सजा में माफी दी गई है। बॉम्बे हाईकोर्ट में जेल विभाग की रिपोर्ट में यो साफ कर दिया गया है कि मौजूदा नियमों के मुताबिक ही संजय दत्त को जेल की सजा में छूट दी गई है।
इसके बाद संजय दत्त अब राहत की सांस लेंगे। दरअसल सोमवार को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से संजय दत्त को जल्द रिहा करने को लेकर सबाल जवाब किए थे। इस दौरान कोर्ट ने सरकार से सफाई मांगी कि आखिर संजय दत्त को आठ महीने पहले जेल से कैसे रिहा कर दिया गया, जबकि वे ज्यादातर वक्त पैरोल पर बाहर ही थे।
आपको बता दें कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह आदेश प्रदीप भालेकर नाम के एक सामाजिक कार्यकर्ता की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए हैं। प्रदीप ने संजय दत्त की रिहाई को चुनौती देने के साथ ही उनको जेल में रहते हुए जो पैरोल मिलते रहे थे उन पर भी सवाल उठाए हैं। इस याचिका को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने कहा है कि ‘जेल अधिकारियों ने यह आकलन कर कैसे लिया कि संजय दत्त का व्यवहार अच्छा था? उन्हें यह आकलन करने का समय कब मिला जबकि आधे समय तो संजय दत्त पैरोल पर जेल से बाहर रहते थे।’
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न्यायालय ने यह भी सवाल किया है कि क्या संजय दत्त की रिहाई के लिए जो प्रक्रिया अपनाई गई, आम कैदियों के लिए भी वही अपनाई जाती है? बताते चलें कि संजय दत्त को 1993 बम धमाकों के मामले में पांच साल की जेल हुई थी। उन्हें AK-56 राइफल रखने के लिए आर्म्स एक्ट के तहत दोषी पाया गया था। उन्होंने अपनी सजा महाराष्ट्र के यरवाडा सेंट्रल जेल में काटी। जहां से उन्हें फरवरी 2016 में अच्छे व्यवहार के कारण जल्द रिहा कर दिया गया था।
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इसके बाद संजय दत्त अब राहत की सांस लेंगे। दरअसल सोमवार को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से संजय दत्त को जल्द रिहा करने को लेकर सबाल जवाब किए थे। इस दौरान कोर्ट ने सरकार से सफाई मांगी कि आखिर संजय दत्त को आठ महीने पहले जेल से कैसे रिहा कर दिया गया, जबकि वे ज्यादातर वक्त पैरोल पर बाहर ही थे।
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आपको बता दें कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह आदेश प्रदीप भालेकर नाम के एक सामाजिक कार्यकर्ता की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए हैं। प्रदीप ने संजय दत्त की रिहाई को चुनौती देने के साथ ही उनको जेल में रहते हुए जो पैरोल मिलते रहे थे उन पर भी सवाल उठाए हैं। इस याचिका को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने कहा है कि ‘जेल अधिकारियों ने यह आकलन कर कैसे लिया कि संजय दत्त का व्यवहार अच्छा था? उन्हें यह आकलन करने का समय कब मिला जबकि आधे समय तो संजय दत्त पैरोल पर जेल से बाहर रहते थे।’
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न्यायालय ने यह भी सवाल किया है कि क्या संजय दत्त की रिहाई के लिए जो प्रक्रिया अपनाई गई, आम कैदियों के लिए भी वही अपनाई जाती है? बताते चलें कि संजय दत्त को 1993 बम धमाकों के मामले में पांच साल की जेल हुई थी। उन्हें AK-56 राइफल रखने के लिए आर्म्स एक्ट के तहत दोषी पाया गया था। उन्होंने अपनी सजा महाराष्ट्र के यरवाडा सेंट्रल जेल में काटी। जहां से उन्हें फरवरी 2016 में अच्छे व्यवहार के कारण जल्द रिहा कर दिया गया था।