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एंटरटेनमेंट से भरपूर है 'मुबारकां', ये 11 वजहें कर देंगी इसे देखने पर मजबूर
रवि बुले
Updated Sat, 29 Jul 2017 11:04 AM IST
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'मुबारकां' फिल्म की टीम
- फोटो : Arjun Kapoor Twitter
अनीस बज्मी दो साल बाद कॉमेडी फिल्म लेकर दर्शकों के सामने हैं। उनकी फिल्म 'मुबारकां' में पहली बार अर्जुन कपूर और अनिल कपूर की जोड़ी नजर आ रही है। फिल्म को समीक्षकों से काफी अच्छे रिव्यू मिल रहे हैं। इन 10 प्वाइंट्स में जानिए इस वीकेंड क्यों देखनी चाहिए 'मुबारकां'-
1. 'मुबारकां' देखने के लिए आप दिल-दिमाग साथ ले जा सकते हैं। लंबे समय बाद यह ऐसी कॉमेडी है जो धैर्य की परीक्षा नहीं लेती और हंसाने के लिए चुटकुले नहीं उछालती।
2. परिवार-दोस्तों के साथ आप इसका लुत्फ उठा सकते हैं। कोई दृश्य या संवाद बगलें झांकने नहीं देगा।
3. इसका श्रेय निर्देशक अनीस बज्मी को जाता है। वह कॉमेडी के बढ़िया फ्लेवर के साथ यह फिल्म लाए हैं।
4. निश्चित ही इसमें अनिल कपूर और डबल रोल में अर्जुन कपूर ने उन्हें अच्छा सहयोग दिया। चाचा-भतीजे की जोड़ी निराश नहीं करती। हालांकि इसमें अनिल अक्सर बाजी मार ले जाते हैं।
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5. कहानी की खूबसूरती यह है कि सारे किरदार शुरू से अंत तक अपनी भूमिका का निर्वाह करते हैं। कोई बीच में छूटता नहीं।
6. फिल्म में आशिकों की कॉमेडी के साथ भाई-बहन के इमोशनल प्यार, लड़ाई-झगड़े और अहंकार का ट्रेक मजेदार है। कहानी में गुंथा हुआ है।
7. पवन मल्होत्रा और रत्ना पाठक शाह ने अपने ये रोल बखूबी निभाए हैं। दोनों फिल्म को सिर्फ प्रेम कहानी की तरफ झूलने नहीं देते और पारिवारिक कॉमेडी की छौंक रह-रह कर लगती रहती है।
8. शुरू से अंत तक कहानी जिस सधे अंदाज में बढ़ती है और हरेक सीन दूसरे से बंधा रहता है, वह स्क्रिप्ट पर की गई मेहनत को दर्शाता है।
9. पारिवारिक-मनोरंजक कॉमेडी लिखने के इच्छुक लोगों के लिए यह फिल्म एक गाइड जैसा काम कर सकती है।
10. अनिल कपूर फिल्म में अपनी पूरी एनर्जी के साथ मौजूद हैं और उन्होंने डबल रोल में अपने भतीजे अर्जुन को आगे बढ़ने में खूब सहारा दिया। यहां अगर कुछ कमजोर है तो नायिकाएं।
11. यहां संगीत ठीक-ठाक है मगर ‘गॉगल गीत’ रोचक है। निश्चित ही यह फिल्म उन दर्शकों के लिए है जिन्होंने लंबे समय से परिवार के साथ साफ-सुथरी कॉमेडी नहीं देखी।
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1. 'मुबारकां' देखने के लिए आप दिल-दिमाग साथ ले जा सकते हैं। लंबे समय बाद यह ऐसी कॉमेडी है जो धैर्य की परीक्षा नहीं लेती और हंसाने के लिए चुटकुले नहीं उछालती।
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2. परिवार-दोस्तों के साथ आप इसका लुत्फ उठा सकते हैं। कोई दृश्य या संवाद बगलें झांकने नहीं देगा।
3. इसका श्रेय निर्देशक अनीस बज्मी को जाता है। वह कॉमेडी के बढ़िया फ्लेवर के साथ यह फिल्म लाए हैं।
4. निश्चित ही इसमें अनिल कपूर और डबल रोल में अर्जुन कपूर ने उन्हें अच्छा सहयोग दिया। चाचा-भतीजे की जोड़ी निराश नहीं करती। हालांकि इसमें अनिल अक्सर बाजी मार ले जाते हैं।
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5. कहानी की खूबसूरती यह है कि सारे किरदार शुरू से अंत तक अपनी भूमिका का निर्वाह करते हैं। कोई बीच में छूटता नहीं।
6. फिल्म में आशिकों की कॉमेडी के साथ भाई-बहन के इमोशनल प्यार, लड़ाई-झगड़े और अहंकार का ट्रेक मजेदार है। कहानी में गुंथा हुआ है।
7. पवन मल्होत्रा और रत्ना पाठक शाह ने अपने ये रोल बखूबी निभाए हैं। दोनों फिल्म को सिर्फ प्रेम कहानी की तरफ झूलने नहीं देते और पारिवारिक कॉमेडी की छौंक रह-रह कर लगती रहती है।
8. शुरू से अंत तक कहानी जिस सधे अंदाज में बढ़ती है और हरेक सीन दूसरे से बंधा रहता है, वह स्क्रिप्ट पर की गई मेहनत को दर्शाता है।
9. पारिवारिक-मनोरंजक कॉमेडी लिखने के इच्छुक लोगों के लिए यह फिल्म एक गाइड जैसा काम कर सकती है।
10. अनिल कपूर फिल्म में अपनी पूरी एनर्जी के साथ मौजूद हैं और उन्होंने डबल रोल में अपने भतीजे अर्जुन को आगे बढ़ने में खूब सहारा दिया। यहां अगर कुछ कमजोर है तो नायिकाएं।
11. यहां संगीत ठीक-ठाक है मगर ‘गॉगल गीत’ रोचक है। निश्चित ही यह फिल्म उन दर्शकों के लिए है जिन्होंने लंबे समय से परिवार के साथ साफ-सुथरी कॉमेडी नहीं देखी।