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मॉडरेशन पॉलिसी की अपील के लिए सुप्रीम कोर्ट नहीं जाएगा सीबीएसई
सीमा शर्मा/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 26 May 2017 05:23 AM IST
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) मॉडरेशन पॉलिसी पर हाईकोर्ट के फैसले के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर नहीं करेगा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने विभिन्न पहलुओं पर कानूनी राय लेने के बाद कानून विशेषज्ञों के सुझाव पर रणनीति में बदलाव किया है।
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सीबीएसई मॉडरेशन पॉलिसी का विरोध शुरू से ही नहीं कर रहा था, बल्कि मॉडरेशन पॉलिसी की आड़ में देशभर के विभिन्न राज्यों के शिक्षा बोर्ड द्वारा रिजल्ट सुधारने के लिए गैरकानूनी तरीके से मॉर्क्स की स्पाइकिंग (अत्यधिक अंक देने) के खिलाफ था।
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सूत्रों के मुुताबिक, कानून विशेषज्ञों ने सीबीएसई के वर्ष 1992 में मॉडरेशन पॉलिसी शुरू करने के दौरान बनाई गई ‘एग्जामिनेशन बायलॉज’ के पांच प्वाइंट का अध्ययन किया, जिसमें मॉडरेशन पॉलिसी के तहत कठिन प्रश्न पत्र आने पर राहत अंक देने की बात थी लेकिन उसमें मार्क्स ऑफ स्पाइकिंग शामिल नहीं था।
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इसके अलावा सीबीएसई और राज्यों के बीच पिछले महीने आयोजित बैठक के एजेंडे और सिफारिशों के बारे में भी जानकारी हासिल की। इसी आधार पर कानून विशेषज्ञों ने मंत्रालय और सीबीएसई को कहा कि अदालत के फैसले के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने की जरूरत नहीं है।
क्योंकि सीबीएसई अदालत के फैसले के तहत मॉडरेशन पॉलिसी को मानता है, जिसमें कठिन सवाल आने पर अतिरिक्त अंक देना शामिल है। जबकि सीबीएसई ने जब मॉडरेशन पॉलिसी लाया था, उस समय उसका मकसद दसवीं या 12वीं की परीक्षा में कठिन प्रश्न पत्र आने पर विशेषज्ञों की कमेटी द्वारा प्रश्न पत्र के आधार पर छात्रों को दस से 25 अतिरिक्त अंक देने का फैसला लेना था। इस कमेटी में शिक्षा से जुड़े विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों के अलावा विषय विशेषज्ञ भी शामिल होते हैं।
वहीं, विज्ञान भवन में 24 अप्रैल को सीबीएसई की ओर से 32 राज्यों के शिक्षा बोर्ड के सचिव व शिक्षा मंत्रियों के साथ आयोजित बैठक में सीबीएसई ने राज्यों के शिक्षा विभागों से सिफारिश की थी कि वे गैरकानूनी ढंग से मार्क्स की स्पाइकिंग न करें। क्योंकि यदि हर शिक्षा बोर्ड सौ फीसदी अंक देने लगा तो इससे छात्रों को उच्च शिक्षा में दाखिले की राह मुश्किल होगी।
मॉडरेशन पॉलिसी
ग्रेस मार्क्स : इसके तहत 27 अंक से 32 अंक लेने वाले छात्रों को फेल से पास करने के लिए एक से पांच अंक दो से तीन विषय में दिए जा सकते हैं। हालांकि अब सीबीएसई ने सिफारिश की है कि छात्रों को जिन विषयों में ग्रेस मार्क्स दिए गए हैं, मार्क्सशीट में वहां स्टार लगा दिया जाए।
कठिन प्रश्न पत्र पर मिलने वाले राहत अंक :
मॉडरेशन पॉलिसी को शुरू इसलिए किया गया था ताकि यदि किसी पेपर में विषय से बाहर से कोई सवाल पूछा जाता है, या फिर प्रश्न पत्र कठिन हो तो विशेषज्ञों के सुझावों के तहत दस से 25 अंक दिए जाएं।
मार्क्स की स्पाइकिंग :
कुछ शिक्षा बोर्ड ने रिजल्ट सुधारने की प्रतिस्पर्धा में कठिन सवालों पर राहत के अतिरिक्त अंक देने के नाम पर सीधे सौ अंक देना शुरू कर दिया और अपने रिजल्ट को सुधार लिया। इसी वजह से दिल्ली विश्वविद्यालय में सौ फीसदी तक कट ऑफ पहुंचने लगा। इसमें तमिलनाडु, केरल आदि राज्यों का नाम सबसे ऊपर है।
कठिन प्रश्न पत्र पर मिलने वाले राहत अंक :
मॉडरेशन पॉलिसी को शुरू इसलिए किया गया था ताकि यदि किसी पेपर में विषय से बाहर से कोई सवाल पूछा जाता है, या फिर प्रश्न पत्र कठिन हो तो विशेषज्ञों के सुझावों के तहत दस से 25 अंक दिए जाएं।
मार्क्स की स्पाइकिंग :
कुछ शिक्षा बोर्ड ने रिजल्ट सुधारने की प्रतिस्पर्धा में कठिन सवालों पर राहत के अतिरिक्त अंक देने के नाम पर सीधे सौ अंक देना शुरू कर दिया और अपने रिजल्ट को सुधार लिया। इसी वजह से दिल्ली विश्वविद्यालय में सौ फीसदी तक कट ऑफ पहुंचने लगा। इसमें तमिलनाडु, केरल आदि राज्यों का नाम सबसे ऊपर है।
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