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...तो ऐसे प्राइवेट अस्पतालों में बनते हैं लंबे चौड़ें बिल, ये हैं कारण

Thu, 28 Sep 2017 09:30 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 28 Sep 2017 09:30 AM IST
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These are the reasons behind Private hospitals big bill list
demo
देश में स्टेंट पर कीमतें तय होने के बाद भी प्राइवेट अस्पतालों में लंबे चौड़ें बिलों का सिलसिला जारी है। कहा जा रहा है कि सरकारी अस्पतालों में स्टेंट की कीमतें कम हैं और प्राइवेट अस्पताल लाखों रुपये का बिल वसूल कर रहे हैं। लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो ये सब किसी और वजह से नहीं, बल्कि गाइडलाइन की वजह से हो रहा है।
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These are the reasons behind Private hospitals big bill list
demo pic - फोटो : amar ujala

गाइडलाइन की वजह से महंगा हो गया स्टेंट  
केंद्र सरकार ने स्टेंट की कीमतें तय करने के अलावा ऑपरेशन के दौरान प्रयोग होने वाले सामान को लेकर भी निर्देश दिए हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिशन के अध्यक्ष डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि पहले डॉक्टर स्टेंट डालते वक्त एक बैलून का प्रयोग चार से पांच बार कर सकता था। मरीज के परिजनों से पूछकर ही ऐसा किया जाता था।
 

एक बार सामान यूज ही कर सकता है डॉक्टर    लेकिन अब गाइडलाइन की वजह से एक बार में एक ही बैलून प्रयोग में लाया जाता है। इतना ही नहीं, स्टेंट डालते वक्त कई बैलून और कैपिंग का इस्तेमाल होता है, जिसकी कीमतें हजारों में होती है। ऐसे में मरीज का बिल बढना स्वाभाविक है।       
 

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These are the reasons behind Private hospitals big bill list
demp pic - फोटो : अमर उजाला

कई सुविधाएं होने की वजह से भी बढ़ता है बिल    

बता दें कि स्टेंट की कीमतें तय होने के बाद दिल्ली सहित देश भर के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बड़ी राहत मिली है। अगर एम्स की बात करें तो करीब 40 से 50 हजार के बीच स्टेंट लग जाता है। वहीं, दिल्ली सरकार का प्रसिद्घ जीबी पंत सुपर स्पेशलिटी अस्पताल है, जहां इसकी कीमत और भी कम यानि करीब 25 से 30 हजार रुपये ही है। जबकि प्राइवेट अस्पतालों में इसकी कीमत ढ़ाई से तीन लाख रुपये होती है। ऐसे में प्राइवेट अस्पतालों पर कई तरह के सवाल भी खड़े किए जा रहे हैं।

 

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष ने किया बड़ा खुलासा        

सरकारी अस्पताल में सबकुछ फ्री      
डॉ. अग्रवाल बताते हैं कि सरकारी अस्पतालों में बेड से लेकर तमाम मेडिकल टेस्ट फ्री होते हैं। जिनका असर मरीज की जेब पर पड़ता है। अगर कोई मरीज एम्स या जीबी पंत जैसे अस्पताल में भर्ती है तो वहां उसे सिर्फ स्टेंट की ही कीमत चुकानी होती है। जबकि प्राइवेट अस्पताल में बेड से लेकर मेडिकल टेस्ट तक का शुल्क देना होता है। डॉ. अग्रवाल इन्हीं वजहों के कारण स्टेंट का इलाज महंगा होना बताते हैं। उनका कहना है कि कुछ अस्पतालों को छोड़ दें तो अन्य सभी देश भर के प्राइवेट अस्पतालों में इसी तरह की समस्या देखने को मिल रही है।        
 

एक बैलून 22 हजार का      
डॉक्टरों के अनुसार, एक बैलून 22 हजार रुपये का आता है। ऑपरेशन के दौरान चार से पांच बैलून कम से कम लग जाते हैं। ऐसे में करीब एक लाख रुपये का बिल तो इन्हीं का हो जाता है। जबकि सरकारी अस्पतालों में इसका शुल्क नहीं देना होता है।       

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