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हाईकोर्ट ने दिए मेयर की जाति प्रमाण पत्र जांच के आदेश
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Mon, 27 Mar 2017 01:34 PM IST
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- फोटो : file photo
फरीदाबाद के महापौर सुमन बाला के जाति प्रमाण पत्र को चुनौती देने वाली याचिका को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सही मानते हुए याचिकाकर्ता को मामले की जांच कराने की स्वीकृति दी है। याचिकाकर्ता ने अदालत को सुमन बाला के अनुसूचित जाति से नहीं होने के कई प्रमाण उपलब्ध कराए थे।
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याचिकाकर्ता अरविंद पारछा ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। इसमें उन्होंने सुमन बाला के विवाह का निमंत्रण पत्र और चुनाव आयोग की निर्वाचन नामावली 2016 प्रमाण के रूप में अदालत में प्रस्तुत किए।
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निमंत्रण पत्र में सुमन बाला के पिता लोकनाथ की जाति अरोड़ा पंजाबी लिखी गई है। इसके अलावा चुनाव आयोग की ओर से जारी निर्वाचन नामावली में भी सुमन बाला के भाई रवि और उनकी पत्नी इंदु की जाति भी अरोड़ा दर्शायी गई है।
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सुमन बाला के दूसरे भाई वेदप्रकाश की पत्नी साक्षी के नाम के आगे भी अरोड़ा लिखा है। हाईकोर्ट ने अरविंद पारछा के इन दावों को पर्याप्त सबूत मानते हुए सुमन बाला के चुनाव की जांच कानूनी आधार पर किए जाने की सहमति प्रकट की है।
हालांकि अदालत ने याचिका बंद करते हुए अरविंद पारछा को अधिकार दिया कि वो मामले की जांच प्राधिकृत संस्था से करवाएं। इस आधार पर याचिकाकर्ता ने 23 मार्च 2017 को पुलिस आयुक्त डॉ. हनीफ कुरैशी को शिकायती पत्र सौंप कर मामले की जांच की मांग की है।
बता दें कि जनवरी 2017 में हुए नगर निगम चुनाव में वार्ड 12 से भाजपा प्रत्याशी सुमन बाला पार्षद चुनी गईं थीं। चुनाव के दौरान ही उनके जाति प्रमाण पत्र पर सवाल उठने लगे थे।
चुनाव जीतने के बाद भाजपा ने उन्हें महापौर भी बनवा दिया है। वहीं दूसरी ओर मेयर सुमन बाला ने कहा कि मैं हाईकोर्ट के इस आदेश का सम्मान करती हूं। वैसे भी मेरा प्रमाण पत्र बिलकुल सही है। इससे ज्यादा मैं