छात्रा के सर पर नहीं थे बाल, दिल्ली के स्कूल ने लड़की को नहीं दिया एडमिशन
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राजधानी के एक निजी स्कूल में नौंवी क्लास में छात्रा को दाखिला महज इसलिए दाखिला देने से मना कर दिया, क्योंकि उसके सर पर बाल नहीं थे। यह आरोप युवती के परिजनों ने लगाया है।
उनका कहना है कि बच्ची दो साल की उम्र से एलोपेसिया बीमारी से ग्रसित है। इस बीमारी में बच्ची के बाल कुछ दिन बढ़ने के बाद झड़ जाते हैं। बच्ची की मां का आरोप है कि प्रवेश परीक्षा में पास होने के बावजूद उनकी बच्ची को स्कूल में दाखिला नहीं दिया।
बच्ची की मां शैलेश गुप्ता ने बताया उन्होंने मयूर विहार फेस-3 स्थित वनस्थली पब्लिक स्कूल में नौंवी कक्षा के लिए आवेदन किया था। स्कूल प्रशासन ने बेटी का टेस्ट लिया, जिसमें वह पास हो गई। बृहस्पतिवार को उन्हें दाखिले के लिए बुलाया गया था। जब परिजन स्कूल पहुंचे तो बच्ची का हुलिया देखने के बाद प्रशासन ने दाखिला देने से इनकार कर दिया।
पहले बच्ची भारत भारती पब्लिक स्कूल में पढ़ाई कर रही थी
बच्ची की मां का आरोप है कि स्कूल प्रशासन का बहाना उन्हें समझ में नहीं आया। सिर्फ एक बीमारी के चलते स्कूल प्रशासन बच्ची को दाखिले से मना नहीं कर सकता। इससे पहले बच्ची भारत भारती पब्लिक स्कूल में पढ़ाई कर रही थी।
वहां सिर्फ आठवीं कक्षा तक पढ़ाई होती है। आगे की पढ़ाई के लिए उसने वनस्थली पब्लिक स्कूल में प्रवेश परीक्षा दिया था। बच्ची का सपना है कि वह डीएम बनकर देश की सेवा करे।
वहीं, बच्ची की मां का कहना है कि जो बच्चे दिव्यांग श्रेणी में होते हैं, वे भी अपना नाम रोशन करते हैं, लेकिन स्कूल सिर्फ बाल नहीं होने की वजह से हमारी बच्ची से यह मौका भी छीन रहा है। स्कूल प्रशासन से भी इस मामले पर जानकारी लेने की कोशिश की गई, लेकिन स्कूल प्रशासन के किसी भी अधिकारी से संपर्क नहीं हो सका।