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निजता के बाद समलैंगिकता, इच्छामृत्यु और गर्भपात को लेकर नए सिरे से बहस संभव

Fri, 25 Aug 2017 11:20 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 25 Aug 2017 11:20 AM IST
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After Right to privacy next debate will be on homosexuality, euthanasia and abortion
homosexuality - फोटो : social media

नौ सदस्यीय संविधान पीठ द्वारा निजता को मौलिक अधिकार करार दिए जाने के बाद आने वाले दिनों में न केवल समलैंगिकता बल्कि इच्छामृत्यु और गर्भपात को लेकर भी बहस हो सकती है। क्योंकि ये सभी मसले कहीं न कहीं निजता के अधिकार से जुड़े हुए है। 

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कई देशों में समलैंगिकता और इच्छामृत्यु की इजाजत दी गई है लेकिन भारत में फिलहाल इसकी अनुमति नहीं है। समलैंगिकता को अपराधमुक्त कर दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा कदम उठाया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले को दरकिनार कर दिया था। फिलहाल इस फैसले को लेकर दायर पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
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ऐसे में इस मामले में निजता की अधिकार की बात तो अब आनी ही है। यहीं बात इच्छामृत्यु पर भी लागू हो सकती है। यह मामला भी निजता के अधिकार से जुड़ा है। इसके अलावा महिला द्वारा गर्भपात करने का फैसला भी निजता केअधिकार के जुड़ा मामला है। आने वाले दिन में संभव है कि इन मसलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में नए सिरे से याचिकाएं दायर हों।

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