अमित शाह के घर पर ND तिवारी के बेटे ने थामा बीजेपी का हाथ
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी के बेटे रोहित शेखर के साथ भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। वहीं एनडी ने विधानसभा चुनावों में भाजपा को समर्थन देने का एलान किया है।
बुधवार को दोपहर साढ़े 12 बजे नारायण दत्त तिवारी, पत्नी उज्जवला और बेटे रोहित शेखर संग अमित शाह के घर पहुंचे। जहां उनके बेटे रोहित शेखर ने भाजपा की सदस्यता ली। पूर्व मुख्यमंत्री एनडी के भी भाजपा में शामिल होने की चर्चा हो रही थी लेकिन उन्होंने अभी भाजपा ज्वाइन नहीं की है।
Delhi: Narayan Dutt Tiwari and his son Rohit Shekhar have joined BJP in the presence of party President Amit Shah pic.twitter.com/2kzIezFRs7
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI_news) January 18, 2017
Senior Congress leader Narayan Dutt Tiwari & his son Rohit Shekhar reaches BJP national president Amit Shah's residence. pic.twitter.com/UQCFVQvEsn
— ANI (@ANI_news) January 18, 2017
एनडी की पत्नी उज्जवला तिवारी ने इसकी सीधे-सीधे पुष्टि तो नहीं की, पर इतना जरूर कहा था कि दिल्ली में बुधवार को एनडी की भाजपा के आला नेताओं से मुलाकात करेंगेे।
एनडी इस समय अपने बेटे रोहित शेखर के लिए भी टिकट मांग रहे हैं।Senior Congress leader Narayan Dutt Tiwari and his son Rohit Shekhar to join BJP later today
— ANI (@ANI_news) January 18, 2017
ND ने दिल्ली में डाला डेरा
सूत्रों के मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के बेटे रोहित शेखर के भाजपा से टिकट के लिए नैनीताल ऊधमसिंह नगर सांसद सिंह कोश्यारी भी कोशिश कर रहे हैं।
रोहित के लिए तिवारी परिवार लालकुआं से टिकट मांग रहा था, जबकि पार्टी नेता रोहित को हल्द्वानी से टिकट देने के पक्ष में है।
बताया गया था कि भाजपा नेताओं से बातचीत के लिए तिवारी परिवार ने मंगलवार को दिल्ली में डेरा डाल लिया था। एनडी की पत्नी उज्जवला तिवारी ने इसकी पुष्टि की थी।
उज्जवला ने बताया था कि बुधवार को भाजपा नेताओं से मुलाकात करेंगे। तिवारी परिवार कांग्रेस से खासा नाराज भी था।
तो क्या बेटे शेखर के लिए कांग्रेस छोड़ देंगे एनडी?
सियासी जानकारों की मानें तो एनडी का भाजपा में जाना प्रदेश ही नहीं केंद्रीय कांग्रेस के लिए भी बड़े झटके के तौर पर होगा।
बता दें कि एनडी अपने पुत्र रोहित के लिए टिकट मांग रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों में शेखर के लिए संभावनाएं टटोली थीं।
चर्चा है कि भाजपा उन्हें हल्द्वानी से उनकी अनुयायी रही डॉ. इंदिरा हृदयेश के खिलाफ उतारना चाह रही थी। हालांकि इस फैसले को शेखर ने अपने लिए सुरक्षित नहीं माना, लिहाजा बात अटक गई।
ND के फैसलों को राजनीति के चाणक्य की मिसाल दी जाती थी
कहने वाले यह भी कह रहे हैं कि एनडी अब उम्र के उस पड़ाव पर हैं जहां उनके फैसलों में उस एनडी तिवारी का विवेक नहीं हैं जिन्हें राजनीति के चाणक्य की मिसाल दी जाती रही।
जब तक एनडी की शारीरिक काया बुढ़ापे की गिरफ्त से बाहर रही, तब तक उनके सियासी फैसलों ने तेजतर्रार हरीश रावत को भी निस्तेज रखा।
अब कहा जाता है कि एनडी अपने परिवार के विवेक के हिसाब से निर्णय लेते हैं, लेकिन यह भी सच है कि उन्होंने भाजपा में जाने के संकेत देकर पहले से ही झटके झेल रही कांग्रेस को सदमे में डाल दिया है।
कांग्रेस ने तीन बार यूपी सरीखे बड़े राज्य की बागडोर सौंपी
एनडी पुराने और खांटी कांग्रेसी हैं और आजादी के आंदोलन के सिपाही रहे हैं।
बचपन से लेकर जवानी तक उन्होंने कांग्रेस को देखा और जिया है। बदले में कांग्रेस ने भी उनके सियासी कौशल की कद्र की और उन्हें तीन बार यूपी सरीखे बड़े राज्य की बागडोर सौंपी।
केंद्रीय मंत्री रहे एनडी तिवारी ने तब भी कांग्रेस नहीं छोड़ी जब कांग्रेस आलाकमान ने राज्यपाल बनाकर उन्हें दक्षिण में दंडकारण्य दे दिया था। मगर कहते हैं कि सियासत में कुछ भी संभव है तो अब एनडी के भाजपा में जाने की चर्चाओं ने सियासी हलकों में खलबली मचा दी है।