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पकड़े गए माओवादी ने खोले राज, देने वाले थे देश को हिला कर रख देने वाली घटना को अंजाम

Mon, 25 Sep 2017 06:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Mon, 25 Sep 2017 06:22 PM IST
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maoist on mission against pancheshwar dam in india

चोरगलिया (नैनीताल) पुलिस के हत्थे चढ़े 50 हजार के इनामी माओवादी देवेंद्र चम्याल ने भवाली में चुनाव विरोधी पर्चे चिपकाने की बात स्वीकार की है। उसने इस दौरान ऐसे म‌िशन के बारे में बताया जो पूरे देश को ह‌िला कर रख देती। 

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उसके साथ पकड़ी गई भगवती भोज तीन साल से उसके संगठन से जुड़ी है। उन्होंने बताया क‌ि वे देश के अब तक के सबसे बड़े बांध पंचेश्वर बांध विरोधी मिशन पर लगे थे। हालांक‌ि उन्होंने ये बात नहीं बताई क‌ि वे इस म‌िशन पर कहा तक पहुंचे या उनकी प्लान‌िंग क्या थी।
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लेक‌िन इस बात को सुनकर पुल‌िस भी सकते में आ गई। देवेंद्र ने झारखंड में रहकर हथियार चलाने का भी प्रशिक्षण लिया था। उसने 50 हजार के इनामी साथी खीम सिंह बोरा और भाष्कर पांडे सहित अन्य लोगों के बारे में भी अहम जानकारी दी है।
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डीआईजी पूरन सिंह रावत और एसएसपी जन्मेजय खंडूरी ने रविवार को पत्रकारों को बताया कि शनिवार को माओवादियों के मूवमेंट की एक सटीक सूचना पर पुलिस टीम ने नंधौर वैली की ओर जा रही एक बस को रोका।  

2014 में म‌िली थी भगवती

maoist on mission against pancheshwar dam in india

तलाशी लेने पर अल्मोड़ा निवासी देवेंद्र चम्याल पुत्र मदन सिंह चम्याल के साथ लखनाड़ी सोमेश्वर निवासी भगवती भोज को माओवादी विचारधारा से संबंधित पर्चे ओर पोस्टर के साथ गिरफ्तार कर लिया। 

पूछताछ में पता चला कि दोनों ने 21 सितंबर को अल्मोड़ा में उत्तराखंड जोनल कमेटी के सचिव खीम सिंह बोरा से मुलाकात की थी। फरवरी 2017 में अपने पांच अन्य साथियों के साथ उन्होंने धारी क्षेत्र में माओवादी पर्चे, पोस्टर और झंडे लगाए थे।

इसके अलावा दीवारों पर राज्य विरोधी, चुनाव विरोधी नारे भी लिखे थे। देवेंद्र ने बताया कि नानकमत्ता थाना क्षेत्र की घटना में इनाम घोषित होने के बाद वह 2009 से 2013 तक झारखंड में रहा। लौटने पर 2014 में उसकी मुलाकात भगवती भोज से हुई।

दिल्ली की आईबी टीम ने ली अहम जानकारी

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​भगवती अपना परिवार छोड़कर माओवादी संगठन का कार्य करने के लिए तैयार हो गई। पुलिस ने दोनों से संगठन के कई सदस्यों के बारे में जानकारी हासिल की है। डीजीपी ने पुलिस टीम को 20 हजार रुपये का इनाम और कांस्टेबल इरफान को पुलिस पदक दिलाने की घोषणा की है। 

 दिल्ली से आई आईबी की टीम ने गिरफ्तार माओवादी और भगवती से पूछताछ की। देवेंद्र ने बताया कि वह 1998 से माओवाद से जुड़ गया था। उसकी महिला मित्र भी संगठन के लिए तीन सालों से  समर्पित है। दोनों ने पुरानी घटनाओं में शामिल होना स्वीकार किया।

संगठन के लोगों को टास्क के मुताबिक आने जाने के खर्च अलावा कम से कम 2000 रुपये महीने मिलते थे। पैसे कोरियर के माध्यम से आते थे। महिला साथी को वह खर्च के लिए कुछ पैसे देता था।

बताया कि प्रशांत राही की गिरफ्तारी के बाद उत्तराखंड में संगठन टूट गया था। इसी कारण संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी उसके ऊपर थी। पहाड़ के लोग उसके संगठन में सहयोग नहीं करते हैं। यहां ठोस आधार नहीं होने के कारण उसने सिर्फ लोगों को भड़काने का जिम्मा लिया था।

माओवादियों को पकड़ने वाली टीम को 20 हजार इनाम

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डीजीपी अनिल रतूड़ी ने 50 हजार के इनामी माओवादी देवेंद्र चम्याल और उसकी साथी भगवती बिष्ट को गिरफ्तार करने वाली नैनीताल की चोरगलिया थाना पुलिस को 20 हजार रुपये इनाम और एसओटीएफ के कांस्टेबल को पुलिस पदक से सम्मानित करने की घोषणा की है।

माओवादी देवेंद्र चम्याल वर्ष 2004 से वांछित था। उस पर चोरगलिया क्षेत्र में माओवादी ट्रेनिंग सेंटर चलाने का आरोप है। देवेंद्र की गिरफ्तारी के लिए पुलिस वर्षों से उसकी तलाश कर रही थी, लेकिन वह चकमा देकर बच निकलता था। अपर पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने कहा कि माओवाद के विरुद्ध अभियान में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है।

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