फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Villagars made a lake for thier crops

ग्रामीणों ने पेश की मिसाल, तीन किलोमीटर नहर बनाकर खेत में पहुंचाया पानी

Mon, 24 Apr 2017 12:03 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, डीडीहाट (पिथौरागढ़)
ब्यूरो/ अमर उजाला, डीडीहाट (पिथौरागढ़) Updated Mon, 24 Apr 2017 12:03 PM IST
विज्ञापन
Villagars made a lake for thier crops

शासन-प्रशासन को आईना दिखाते हुए उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जनपद के तहसील मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर ननपापू ग्राम पंचायत के खोड़ गांव के लोगों ने वह कर दिखाया जो लोगों के लिए आदर्श बन गया। इन्होंने अपने खेतों की सिंचाई के लिए पानी की कमी पूरी करने के लिए 15 दिन का श्रमदान किया और तीन किलोमीटर नहर बना दी।

विज्ञापन


अपनी सौ नाली जमीन की सिंचाई करने के लिए खुद ही तीन किलोमीटर नहर बना ली। नहर बनाने के लिए गांव के लोगों को 15 दिन श्रमदान करना पड़ा। तीन किलोमीटर दूर चिरकटिया के जंगल में बेकार बहने वाले पानी को जब लोगों ने अपनी मेहनत से खेतों तक पहुंचाया तो उनकी खुशी का ठिकाना न रहा। इन खेतों में इसी पानी से धान की नर्सरी लगाने का काम शुरू हो गया है। पहली बार गांव के लोग अपनी सौ नाली जमीन में धान की रोपाई भी करेंगे। 
विज्ञापन


खोड़ गांव के लोग 25 वर्ष से सिंचाई नहर की मांग उठा रहे थे। सरकार ने इनकी मांग पर गौर नहीं किया। जब सरकार से उम्मीद खत्म हो गई तो लोगों ने खुद ही नहर बनाने की ठान ली। साथ ही यह भी तय कर लिया कि खेतों तक अपने दम पर पानी पहुंचाएंगे। खोड़ गांव से तीन किलोमीटर दूर चिरकटिया जंगल में बहने वाले छोटे से नाले में पर्याप्त पानी है। यह पानी गर्मियों में भी कम नहीं होता। इसी पानी को गांव तक लाने की योजना बनी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

'सरकार के भरोसे रहते तो 25 साल करना पड़ता इंतजार'

Villagars made a lake for thier crops

खोड़ गांव के नरेंद्र सिंह कन्याल ने बताया कि गांव के हर परिवार ने श्रमदान किया, जो ऐसा नहीं कर सकता था उसने आर्थिक सहयोग दिया। शनिवार की शाम तीन किलोमीटर लंबी इस नहर का निर्माण कार्य पूरा हुआ और खेतों में पानी पहुंच गया। रविवार की सुबह से लोग खेतों में धान की नर्सरी लगाने के काम में जुट गए।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार के भरोसे रहते तो शायद नहर के लिए 25 साल और इंतजार करना पड़ता। गांव के लोगों ने तीन किलोमीटर नहर बनाने में जिस तकनीक का प्रयोग किया है वह इंजीनियरों के लिए भी चुनौती है। नहर में कहीं पर भी सीमेंट और ईंट का प्रयोग नहीं किया गया है। सिर्फ मिट्टी और पत्थरों की मदद से नहर तैयार की गई है। इसमें कहीं पर भी पानी की एक बूंद लीक नहीं हो रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed