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पतजंलि से रवाना हुई योग दिवस की टीमें
Updated Fri, 16 Jun 2017 10:59 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के बीच अब केवल चार दिन शेष रह गए हैं। देश में सबसे बड़ा कार्यक्रम करने वाले बाबा रामदेव की पतंजलि योगपीठ से दर्जनों टीमें विभिन्न क्षेत्रों के लिए रवाना हो गई हैं। सवेरे से शुरू हुआ यह सिलसिला शाम तक जारी रहा। राज्यों की राजधानियों तथा कई राज्यों में विशेष दल भेजे गए हैं।
गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस स्वामी रामदेव के सपनों का दिवस रहा है। केंद्र में मोदी सरकार आने से पहले भी उन्होंने पतंजलि की विदेशी इकाइयों की ओर से इस आशय के प्रयास शुरू किए थे। स्वामी रामदेव का भव्य स्वागत जब न्यूयार्क के टाइम्स स्क्वायर पर हुआ था, तब वहीं से स्वामी रामदेव ने पहली आवाज सयुंक्त राष्ट्र संघ के लिए उठाई थी। यूएनओ का मुख्यालय न्यूयार्क में ही स्थित है। केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद बाबा रामदेव ने सबसे पहले योग को दिवस मनवाने के लिए प्रयत्न शुरू किए थे। प्रधानमंत्री के पतंजलि योगपीठ और स्वामी रामदेव से इतने गहरे संबंध पहले से ही रहे हैं कि प्रधानमंत्री उनकी मांग को भारत सरकार की मांग बनाकर सयुंक्त राष्ट्र मंच में रख दिया। इस पर दुनिया के 193 देशों ने सहमति जताई और 21 जून अंतरराष्ट्रीय योग दिवस बन गया। तब से बाबा रामदेव और उनका समूचा पतंजलि परिवार योग को घर घर तक ले जाने के काम में जुटा हुआ है। आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि लक्ष्य तो देश के सभी छह लाख 30 हजार गांवों में प्रति दिन योग कराने का है। किंतु इस काम में अभी देर लगेगी। उद्देश्य यह है कि लोग अपने घरों में योग और प्रणायाम करने लगेें, ताकि यह मुद्दा उनके जीवन से जुड़े जाए। उन्होंने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर इस बार नए संदेश दिए जाएंगे।
आचार्य बालकृष्ण शुक्रवार को दिन भर टीमों को रवाना करने में जुटे रहे। 19 जून को स्वामी रामदेव स्वंय अहमदाबाद और आचार्य बालकृष्ण गुवाहटी चले जाएंगे। भेजी जा रही टीमें देश के 1000 प्रमुख शहरों में योग के कार्यक्रम कराने जा रही हैं। लक्ष्य इस बार एक रिकॉर्ड स्थापित करने का है। हालांकि पहला रिकॉर्ड भी पतंजलि के ही नाम है। दुनिया में और कोई भी यूनिट ऐसी नहीं है, जो योग और आयुर्वेद की तरह इस तरह समर्पित हो गई है।
हरिद्वार।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के बीच अब केवल चार दिन शेष रह गए हैं। देश में सबसे बड़ा कार्यक्रम करने वाले बाबा रामदेव की पतंजलि योगपीठ से दर्जनों टीमें विभिन्न क्षेत्रों के लिए रवाना हो गई हैं। सवेरे से शुरू हुआ यह सिलसिला शाम तक जारी रहा। राज्यों की राजधानियों तथा कई राज्यों में विशेष दल भेजे गए हैं।
गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस स्वामी रामदेव के सपनों का दिवस रहा है। केंद्र में मोदी सरकार आने से पहले भी उन्होंने पतंजलि की विदेशी इकाइयों की ओर से इस आशय के प्रयास शुरू किए थे। स्वामी रामदेव का भव्य स्वागत जब न्यूयार्क के टाइम्स स्क्वायर पर हुआ था, तब वहीं से स्वामी रामदेव ने पहली आवाज सयुंक्त राष्ट्र संघ के लिए उठाई थी। यूएनओ का मुख्यालय न्यूयार्क में ही स्थित है। केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद बाबा रामदेव ने सबसे पहले योग को दिवस मनवाने के लिए प्रयत्न शुरू किए थे। प्रधानमंत्री के पतंजलि योगपीठ और स्वामी रामदेव से इतने गहरे संबंध पहले से ही रहे हैं कि प्रधानमंत्री उनकी मांग को भारत सरकार की मांग बनाकर सयुंक्त राष्ट्र मंच में रख दिया। इस पर दुनिया के 193 देशों ने सहमति जताई और 21 जून अंतरराष्ट्रीय योग दिवस बन गया। तब से बाबा रामदेव और उनका समूचा पतंजलि परिवार योग को घर घर तक ले जाने के काम में जुटा हुआ है। आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि लक्ष्य तो देश के सभी छह लाख 30 हजार गांवों में प्रति दिन योग कराने का है। किंतु इस काम में अभी देर लगेगी। उद्देश्य यह है कि लोग अपने घरों में योग और प्रणायाम करने लगेें, ताकि यह मुद्दा उनके जीवन से जुड़े जाए। उन्होंने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर इस बार नए संदेश दिए जाएंगे।
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आचार्य बालकृष्ण शुक्रवार को दिन भर टीमों को रवाना करने में जुटे रहे। 19 जून को स्वामी रामदेव स्वंय अहमदाबाद और आचार्य बालकृष्ण गुवाहटी चले जाएंगे। भेजी जा रही टीमें देश के 1000 प्रमुख शहरों में योग के कार्यक्रम कराने जा रही हैं। लक्ष्य इस बार एक रिकॉर्ड स्थापित करने का है। हालांकि पहला रिकॉर्ड भी पतंजलि के ही नाम है। दुनिया में और कोई भी यूनिट ऐसी नहीं है, जो योग और आयुर्वेद की तरह इस तरह समर्पित हो गई है।
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