फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Punjab's master plan to stop farmers' suicides

किसानों की आत्महत्या रोकने के लिए पंजाब बना रहा मास्टर प्लान, देखिए

Fri, 15 Sep 2017 09:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 15 Sep 2017 09:32 AM IST
विज्ञापन
Punjab's master plan to stop farmers' suicides
Punjab farmer - फोटो : File Photo
पंजाब में कर्ज में डूबे किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्या को रोकने के लिए पंजाब सरकार मास्टर प्लान बना रही है। पंजाब सरकार ने जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को यह जानकारी दी। सरकार ने कहा कि वह इस समस्या को जड़ से ही ख़त्म करने में जुटी है और कानून में जरूरी संशोधन किया जा रहा है। इसके लिए सरकार ने हाई कोर्ट से कुछ और समय दिए जाने की मांग की ताकि वह इस दिशा में की जा रही कार्यवाही की हाई कोर्ट को पूरी जानकारी दे सके।
विज्ञापन


 जस्टिस एके मित्तल एवं जस्टिस अमित रावल की खंडपीठ ने सरकार को समय देते हुए याचिका पर सुनवाई 30 अक्तूूबर तक स्थगित कर दी है। बता दें कि, मोमेंट अगेंस्ट स्टेट रेप्रेशन नामक संस्था ने एडवोकेट आरएस बैंस के जरिये हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर बताया है कि पंजाब में कर्ज में डूबे किसान आत्महत्या कर रहे हैं । बावजूद इसके राज्य सरकार द्वारा पिछले आठ वर्षों से इसका कोई सर्वे तक ही नहीं करवाया गया है।
विज्ञापन


इस कारण केंद्र सरकार से किसान और खेतिहर मजदूरों के आत्महत्या से संबंधित अनुदान में से महज एक प्रतिशत पंजाब को मिल पाया है। क्योंकि पंजाब के पास आत्महत्या कर चुके किसानों का कोई आंकड़ा ही नहीं है। सरकार ने पहले हाईकोर्ट को बताया था की पीड़ित परिवारों का सर्वे करवाया जा रहा है। फिर कहा गया की इनके पुनर्वास की नीति बनाई जा रही है। हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर पीड़ित परिवारों का सर्वे कराये जाने की मांग की गई है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

सरकार ने 2012 में घटाया मुआवजा

Punjab's master plan to stop farmers' suicides
सरकार ने 2012 में घटाया मुआवजा
याचिका में बताया गया है कि राज्य सरकार ने इन किसानों के कल्याण के लिए कोई नीति तक नहीं बनाई है। यहाँ तक की कर्ज के बोझ तले दबे किसानों द्वारा की गई आत्महत्याओं पर उनके परिवारों को वर्ष 2001 में 2 लाख 50 हजार देने का जो प्रावधान था, उसमें भी कटौती करते हुए उसे वर्ष 2012 में दो लाख रुपये कर दिया गया है। बावजूद इसेक राज्य सरकार इन पीड़ित परिवारों को न तो उचित मुआवजा और न ही इनका पुनर्वास करवाने में सफल हुई है। 

सर्वे के लिए जारी किए मात्र 30 लाख रुपये
सरकार ने पिछली जनगणना के आधार पर ही मुआवजा जारी कर दिया और पीड़ित परिवारों के सर्वे का काम अधूरा ही छोड़ दिया गया है। राज्य की तीनों यूनिवर्सिटी पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला, पीएयू लुधियाना और जीएनडीयू अमृतसर को सरकार ने इसका सर्वे करने को कहा था लेकिन इन तीनों ही यूनिवर्सिटी को सरकार ने इसके लिए महज 30 लाख रुपये जारी किये हैं। जो कि इतने व्यापक सर्वे के लिए बेहद ही कम हैं। हाईकोर्ट से मांग की गई है की वह सरकार को निर्देश दे कि वह तीनों यूनिवर्सिटी से राज्य में किसानों और खेतिहर मजदूरों द्वारा की गयी आत्महत्याओं का सर्वे करवाए और जरुरत पड़े तो इसके लिए किसी निष्पक्ष एजेंसी ले।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed