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बाइक से लेकर हवाई जहाज तक के पुर्जे बनते फरीदाबाद में
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 24 Jan 2016 01:12 PM IST
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ऐसा कोई वाहन नहीं है, जिसका कलपुर्जा औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में न बनता हो। बाइक से लेकर महंगी कार और ट्रक से लेकर हवाई जहाज तक के पार्ट्स यहां तैयार हो रहे हैं। शहर में स्थापित पांच हजार से ज्यादा ऑटो पार्ट्स बनाने वाली यूनिटों को हरियाणा ही नहीं बल्कि पूरे देश की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की रीढ़ कहना गलत नहीं होगा।
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70 के दशक में महज चंद यूनिटों से शुरू हुआ सफर आज बुलंदियों को छू रहा है। मंगलयान जीएसएलवी मार्स-3 के क्रू का डोम रिंग जब कहीं नहीं बन पाया तो फरीदाबाद की ही एक कंपनी ने अपनी बंगलूरू की यूनिट में इस काम को कर दिखाया। 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा टर्नओवर वाली ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से एक लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार दे रही है।
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इतिहास
देश के बंटवारे के बाद पाकिस्तान के सिंध इलाके से आए लोगों को बसाने के लिए फरीदाबाद में न्यू इंडस्ट्रियल टाउन की स्थापना की गई थी। उन्हें रोजगार देने के लिए एस्कॉटर्स, हितकारी पॉटरी, इंडियन हार्डवेयर जैसी कंपनियां शुरू हुईं। इस शुरूआत के बाद फरीदाबाद ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अस्सी के दशक में यह शहर उत्तर भारत की औद्योगिक नगरी के नाम से जाना जाने लगा। आज यहां जेसीबी, व्हर्लपूल, लखानी, यामाहा, क्लच ऑटो, एसीई जैसी बड़ी मैनुफेक्चरिंग यूनिटें स्थापित हैं। बड़ी इंडस्ट्री के अलावा इस शहर की पहचान सूक्ष्म, लधु और मध्यम उद्योगों से भी बनीं। बड़ी कंपनियों को पार्ट्स सप्लाई करने से एमएसएमई की शुरूआत हुई। आज 23 हजार से ज्यादा इस तरह की यूनिट्स यहां लगी हैं।
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मेक इन हरियाणा में भूमिका
फरीदाबाद में ऑटो पार्ट्स बनाने वाली तीन तरह की यूनिटें हैं, एक जो उत्पाद बनाकर सीधे बड़ी देसी व विदेशी कंपनियों को आपूर्ति करती हैं, इन्हें टीयर वन कहा जाता है। इनकी संख्या तकरीबन 500 है। इसके अलावा करीब दो हजार टीयर टू और 2500 टीयर थ्री श्रेणी की कंपनियां हैं जो छोटे वेंडर के तौर पर उत्पाद तैयार करती हैं। बदलते जमाने के साथ ऑटोमोबाइल सेक्टर ने कदमताल की, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी अब इसके विस्तार में बाधा बन गई है। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर मिले तो फरीदाबाद का यह उद्योग मेक इन इंडिया और मेक इन हरियाणा के सपनों को साकार कर सकता है। इंडस्ट्री की निगाहें अब दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर पर भी टिकी हैं, इनके शुरू होने के साथ ही फरीदाबाद-गुडग़ांव के औद्योगिक विकास को एक नया आयाम मिल जाएगा।
ये पार्ट्स होते हैं तैयार
क्लच प्लेट, ब्रेक शू, स्प्रिंग लीव्स, स्टील ट््यूब, साइलेंसर, बंपर, डैश बोर्ड, डोर लॉक, टैपेट्स, रॉड लीवर्स, रबर वॉल्व, शीट मेटल, लाइट, बे्रकेट्स, सेक्शन, पिस्टन, सिलेंडर, प्लग आदि।
इन कंपनियों के लिए तैयार होते हैं
मारूति, होंडा, अशोक लीलैंड, यामाहा, रॉल्स रॉयल, जगुआर, बेंटले, मर्सडीज, बीएमडब्ल्यू, जेसीबी, एस्कॉट्र्स आदि।
इन देशों में भी आपूर्ति
जर्मनी, जापान, फ्रांस, कोरिया, अमेरिका, ब्राजील, इंग्लैंड आदि
बॉर्डर पार करना हुआ महंगा
फरीदाबाद की यूनिटों में तैयार 60 फीसदी ऑटो पार्ट्स दूसरे प्रदेशों में भेजे जाते हैं। ऐसे में दिल्ली से गुजरने वाले व्यवसायिक वाहनों को तीन हजार रुपये तक ग्रीन टैक्स देना पड़ रहा है। इसका सीधा असर एमएसएमई पर पड़ रहा है। महंगी बिजली दरों व अन्य खर्च से उत्पादन लागत तो बढ़ रही है, साथ ही माल ढुलाई का खर्च भी कई गुना बढ़ गया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी
इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी औद्योगिक विस्तार में बड़ी बाधा है। एनसीआर से कनेक्टिविटी के नाम पर सिर्फ नेशनल हाईवे का विकल्प है। इसके अलावा परिवहन के बेहतर साधन भी नहीं हैं। इंडस्ट्री के विकास का रास्ता खोलने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर को दुरुस्त करना होगा। एनसीआर की फरीदाबाद से कनेक्टिविटी के विकल्प तलाशने होंगे। नोएडा-फरीदाबाद की सीधी कनेक्टिविटी जल्द देनी होगी। इसके अलावा बिजली पानी और लाखों श्रमिकों व उद्योगों को परिवहन की बेहतर सुविधाएं देनी होंगी।
रिसर्च सेंटर बने
ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी भारत के सामने चीन बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है। औद्योगिक नगरी में आरएंडडी (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) सेंटर की मांग लगातार उठ रही है ताकि नई तकनीकी से चुनौतियों का मुकाबला किया जा सके।
हुनरमंद श्रमिकों की कमी
ऑटो पार्ट्स बनाने वाली इंडस्ट्री के विस्तार में हुनरमंद श्रमिकों का अभाव एक बड़ी समस्या है। स्किल डेवलपमेंट सेंटर न होने से इस इंडस्ट्री की व्यवस्था पुराने ढर्रे पर चल रही है। इसका सीधा असर इन उद्योगों की गुणवत्ता और उत्पादन पर पड़ रहा है। श्रमिकों को नवीन तकनीकी की जानकारी देनी होगी। स्किल डेवलपमेंट के लिए आईटीआई को अपग्रेड करना होगा। उद्योगों में प्रशिक्षण कार्यक्रम का समय समय पर आयोजन करना होगा।
क्या कहते हैं उद्यमी
बिजली, टैक्स और महंगाई के साथ शहर के ऑटोमोबाइल उद्योगों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत इंफ्रास्ट्रक्चर की बेहतर सुविधाएं न होना है। इसके चलते देश और विदेश के क्लाइंट यहां आना पसंद नहीं करते। जब तक उद्योगों को सही माहौल नहीं मिलेगा तो पनपेंगे कैसे।
- एसके जैन, पूर्व अध्यक्ष-फरीदाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
हरियाणा सरकार ने औद्योगिक विकास के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन फरीदाबाद की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को बचाने के लिए सबसे बड़ी जरूरत मदर यूनिट की है। सरकार को इस ओर ध्यान देने चाहिए। मुख्यमंत्री को विशेषकर फरीदाबाद में निवेश के रास्ते खोलने की जरूरत है।
- गौतम चौधरी, वरिष्ठ जिला उप प्रधान-लघु उद्योग भारती
स्मार्ट सिटी से ज्यादा जरूरत औद्योगिक नगरी का अस्तित्व बचाए रखने की है। फरीदाबाद के उद्योगों को बचाने के लिए यहां भी निवेश की संभावनाएं तलाशनी होंगी। इसके लिए इंडस्ट्रीयल मॉडल टाउनशिप पर सरकार को विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
- एलएच भूटानी, चेयरमैन-फरीदाबाद आईएमटी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन