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पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए देश का बड़ा कदम, अब घुसपैठ करके दिखाएं
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 23 Sep 2017 09:01 AM IST
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INDIAN ARMY
- फोटो : file photo
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पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है, इसलिए दुश्मन को सबक सिखाने के लिए देश ने एक बड़ा कदम उठाया है, जिसके बाद भारत में घुसना नामुमकिन होगा। दरअसल देश के सैन्य क्षेत्रों की सुरक्षा अब और ज्यादा कड़ी होगी। इन क्षेत्रों में आर्मी कीसिगनल प्रणाली डिस्टर्ब न हो, इसके लिए सेना पूरी तरह से गंभीर है। इसी के मद्देनजर सेना हाईकमान ने फैसला किया है कि देश के तमाम कैंटोनमेंट क्षेत्र में अब परमानेंट टॉवर नहीं लगाए जाएंगे।
इसके लिए सेना ने खास पॉलिसी ‘सैल ऑन व्हील’ तैयार की है। जिसमें सुरक्षा एजेंसियां यह तय करेंगी कि कैंटोनमेंट क्षेत्रों में अब कहां ऑन व्हील टॉवर लगेंगे। मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस के अंतर्गत कैंटोनमेंट बोर्ड को इस काम की जिम्मेवारी संभालेगा। देश में सेना की 62 बड़ी व छोटी छावनियां हैं। जहां सैन्य क्षेत्रों में विकास कार्यों व अन्य कामों के लिए कैंटोनमेंट बोर्ड मौजूद है। इनमें से कई छावनियां तो ऐसी हैं, जो बहुत ही महत्वपूर्ण व संवेदनशील हैं।
ऐसी छावनियों में जरूरी है कि वहां के सिगनल सिस्टम की पूरी तरह से सिक्योरिटी बनी रही। हालांकि, सैन्य प्रशासन अपनी ओर से इसका पुख्ता इंतजाम भी करकेरखती है। लेकिन मोबाइल जनरेशन के बाद इन सैन्य क्षेत्रों में प्राइवेट कंपनियों की भी घुसपैठ हुई और उन्होंने इस क्षेत्र के अपने मोबाइल ग्राहकों को सुविधा देने के लिए कैंटोनमेंट बोर्डों से अनुमति के बाद परमानेंट टॉवर भी स्थापित किए, लेकिन ये टॉवर हमेशा सेना के सिगनल सिस्टम के लिए खतरा ही बने रहते थे। लेकिन अब ‘सैल ऑन व्हील’ पॉलिसी के बाद ये खतरा भी कम हो जाएगा और सैन्य क्षेत्र में रहने वाले लोगों को बढ़िया मोबाइल नेटवर्क भी मिल जाएगा।
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इसके लिए सेना ने खास पॉलिसी ‘सैल ऑन व्हील’ तैयार की है। जिसमें सुरक्षा एजेंसियां यह तय करेंगी कि कैंटोनमेंट क्षेत्रों में अब कहां ऑन व्हील टॉवर लगेंगे। मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस के अंतर्गत कैंटोनमेंट बोर्ड को इस काम की जिम्मेवारी संभालेगा। देश में सेना की 62 बड़ी व छोटी छावनियां हैं। जहां सैन्य क्षेत्रों में विकास कार्यों व अन्य कामों के लिए कैंटोनमेंट बोर्ड मौजूद है। इनमें से कई छावनियां तो ऐसी हैं, जो बहुत ही महत्वपूर्ण व संवेदनशील हैं।
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ऐसी छावनियों में जरूरी है कि वहां के सिगनल सिस्टम की पूरी तरह से सिक्योरिटी बनी रही। हालांकि, सैन्य प्रशासन अपनी ओर से इसका पुख्ता इंतजाम भी करकेरखती है। लेकिन मोबाइल जनरेशन के बाद इन सैन्य क्षेत्रों में प्राइवेट कंपनियों की भी घुसपैठ हुई और उन्होंने इस क्षेत्र के अपने मोबाइल ग्राहकों को सुविधा देने के लिए कैंटोनमेंट बोर्डों से अनुमति के बाद परमानेंट टॉवर भी स्थापित किए, लेकिन ये टॉवर हमेशा सेना के सिगनल सिस्टम के लिए खतरा ही बने रहते थे। लेकिन अब ‘सैल ऑन व्हील’ पॉलिसी के बाद ये खतरा भी कम हो जाएगा और सैन्य क्षेत्र में रहने वाले लोगों को बढ़िया मोबाइल नेटवर्क भी मिल जाएगा।
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सैकफा क्लीयरेंस के बाद मिलेगी अनुमति
भारतीय सेना
‘सैल ऑन व्हील’ पॉलिसी के तहत अब सैन्य क्षेत्रों में मोबाइल टॉवर लगने से पहले सैकफा (स्टैंडिंग एडवाइजरी कमेटी ऑन रेडियो फ्रिक्वेंसी एलोकेशन) क्लीयरेंस लेनी पड़ेगी। उसके बाद आर्मी व एयरफोर्स की सिक्योरिटी एजेंसी से क्लीयरेंस लेनी पड़ेगी। सेना की सिगनल रेजीमेंट भी अपनी क्लीयरेंस देगी। उसके बाद तय किया जाएगा कि सैन्य क्षेत्र के किस हिस्से में मोबाइल टॉवर लगाए जाएंगे।
पहले परमानेंट मोबाइल टॉवर लगाने के लिए जमीन मोबाइल कंपनियों को लीज पर देनी पड़ती थी। लेकिन अब टॉवर व्हील पर होगा, इसलिए यह एक्सरसाइज भी बचेगी। इस प्रोजेक्ट से जुड़े एक आला सैन्य अफसर ने बताया कि कई कैंटोनमेंट एरिया में इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू करवाया जा रहा है। उनके अनुसार इससे सैन्य क्षेत्र में रहने वाले लोगों को बढ़िया नेटवर्क भी मिल जाएंगे।
पहले परमानेंट मोबाइल टॉवर लगाने के लिए जमीन मोबाइल कंपनियों को लीज पर देनी पड़ती थी। लेकिन अब टॉवर व्हील पर होगा, इसलिए यह एक्सरसाइज भी बचेगी। इस प्रोजेक्ट से जुड़े एक आला सैन्य अफसर ने बताया कि कई कैंटोनमेंट एरिया में इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू करवाया जा रहा है। उनके अनुसार इससे सैन्य क्षेत्र में रहने वाले लोगों को बढ़िया नेटवर्क भी मिल जाएंगे।