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बावरियां गैंग की सक्रियता पर संदेह, स्मार्ट पुलिस की नींद उड़ी

Mon, 19 Jun 2017 09:21 AM IST
कुलदीप शुक्ला/अमरीश शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
कुलदीप शुक्ला/अमरीश शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 19 Jun 2017 09:21 AM IST
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chain snatching incident increased in chandigarh
chandigarh chain snatching
एक महिला पैदल जा रही है और उसके पीछे आ रहा एक युवक, साथ में बाइक सवार हेलमेट लगाएं दूसरा युवक दोनों का पीछा करता आ रहा है। महिला के करीब आते ही अचानक से पीछा करता युवक महिला पर झपटकर चेन छीनता है और बगल से निकल रहे बाइक सवार के साथ बैठकर फरार हो जाता है।
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इस बावरियां गैंग के अंदाज में पिछले दो महीने से शहर में लगातार स्नैचिंग की वारदातें बढ़ने लगी है और इस हफ्ते बैखौफ स्नैचरों ने शहर में आतंक मचा दिया है। जबकि, पुलिस एक भी मामला सॉल्व करने में नाकाम साबित हुई है। स्नैचरों को पकड़ने में नाकाम स्मॉर्ट पुलिस गिरफ्तार आरोपियों पर केस भी साबित करवाने में नाकाम रही हैं।
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सात दिनों में 16 स्नैचिंग :
वहीं, पुलिस एफआईआर में पर्स, बैग व मोबाइल फोन की बात करें तो पिछले 7 दिनों में 16 स्नैचिंग केस हुए। इनमें से 11 वारदातों में पर्स, बैग व मोबाइल फोन छीने गए हैं जबकि चार वारदातें चेन स्नैचिंग की है। हैरानी की बात तो यह है कि इन सभी केसों में से एक केस भी सॉल्व करना तो दूर पुलिस सुराग भी नहीं लगा सकी हैं।
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14 मार्च को गैंग के 3 सदस्य किए थे गिरफ्तार :
क्राइम ब्रांच पुलिस ने 14 मार्च को बाबरियां गैंग के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया था। इस दौरान शहर में 27 दिन लगातार स्नैचिंग का रिकार्ड टूटा था। आरोपियों की निशानदेही पर करीब दो दर्जन सोने की चेन व पर्स, मोबाइल बरामद हुआ था। इसके बाद करीब डेढ़ महीने तक सिर्फ गिनी-चुन्नी स्नैचिंग की वारदात हुई थी। लेकिन, दोबारा से पुराने अंदाज में स्नैचिंग की वारदातों ने स्मॉर्ट पुलिस की नींद उड़ा दी हैं। उन्हें शक है कि बाबरियां गैंग के सदस्य शहर में दोबारा से सक्रिय हो चुके है।

अभेद्य सुरक्षा के बाद 35 एक्टिवा का मरहम भी फेल

chain snatching incident increased in chandigarh
चंडीगढ़ पुलिस पीसीआर - फोटो : File Photo
अभेद्य सुरक्षा के बाद 35 एक्टिवा का मरहम भी फेल :
पहले 20 चीता स्क्वॉड, 60 पीसीआर (8-8 घंटे की शिफ्ट), ट्रैफिक पुलिस के बावजूद लगातार स्नैचिंग के बाद क्राइम ब्रांच की स्पेशल एंटी स्नैचिंग टीम का गठन। इन सभी को फेल होने के बाद यूटी पुलिस ने मरहम के रूप में 35 एक्टिवा पर ट्रेंड लेडीज कांस्टेबल का मरहम लगाकर शहरवासियों को सुरक्षा की सांत्वना दी, लेकिन अफसोस यह मरहम भी लोगों को भय, पीड़ा तो कम नहीं कर सका।

वारदात रोकने के साथ केस साबित करने में भी फेल : 
शहर में एक तरफ चेन स्नैचिंग के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, वहीं पुलिस जिन आरोपियों को गिरफ्तार भी कर रही है वह कमजोर जांच, पैरवी और सबूतों के अभाव में अदालत से बरी हो रहे हैं। वहीं कई मामले ऐसे भी हैं जिन्हें पुलिस अदालत में कुछ रिकवरी न होने पर साबित ही नहीं कर पाती है। वकील रोहित खुल्लर के अनुसार विक्की पर ट्राइसिटी में चेन स्नैचिंग के कुल 78 केस दर्ज हैं। हाल ही में वह स्नैचिंग के दो केस में बरी हुआ है। अब तक वह कुल 47 केस में अदालत से बरी हो चुका है। विक्की पर दिल्ली एनसीआर, हरियाणा और ट्राइसिटी में भी कई केस दर्ज हैं। वहीं विक्की का कहना है कि पुलिस ने उसे झूठे केस में फंसाया है। इस कारण वह अदालत में साबित नहीं हो सके और वह बरी हो गया। वहीं 12 केस में कोई रिकवरी न होने पर तो पुलिस ने खुद ही उसके खिलाफ केस समाप्त कर दिया।

49 प्रतिशत वारदातें सुलझाने में नाकाम : 
जनवरी से मई 2017 तक शहर के अलग-अलग हिस्सों में कुल 82 स्नैचिंग की वारदातों को आरोपियों ने अंजाम दिया। कागजों पर स्मॉर्ट पुलिसिंग का दावा करने वाली यूटी पुलिस ने इनमें से सिर्फ 38 मामले सॉल्व कर 49 प्रतिशत मामले सुलझा पाएं हैं।

स्नैचरों को काबू करने के लिए एंटी स्नैचिंग टीम लगी हुई है। अक्सर आदतन स्नैचर जेल से निकलने के बाद दोबारा से स्नैचिंग करने लगते हैं, जिसके कारण बावरियां गैंग पर भी जांच व तलाश चल रही हैं।
- डॉ. ईश सिंघल, एसएसपी, यूटी पुलिस।
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