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PM मोदी के 'मन की बात' सुनकर डॉक्टर दंपति का बड़ा फैसला, आप कहेंगे- शाबाश

Tue, 12 Sep 2017 01:33 AM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 12 Sep 2017 01:33 AM IST
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chandigarh doctor couple historical decision after listening pm modi mann ki baat
डॉक्टर दंपति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' सुनकर देश के एक डॉक्टर दंपति ने ऐसा फैसला लिया, जिसके लिए हर कोई उनकी तारीफ कर रहा और शाबाशी दे रहा। पिछले साल 31 जुलाई को प्रधानमंत्री ने मन की बात में प्राइवेट डॉक्टरों से आह्वान किया था कि वे महीने में एक दिन सरकारी अस्पताल में बैठे और मरीजों का चेकअप करें।
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प्रधानमंत्री की यह बात सेक्टर- 33 में रहने वाले डा. विक्रम बेदी और उनकी पत्नी पारुल बेदी को भा गई। विचार-विमर्श करने के बाद डॉक्टर दंपति ने सेक्टर 45 स्थित सरकारी अस्पताल के मरीजों को देखने का फैसला लिया। उसके बाद से दोनों लोग हर महीने की नौ तारीख को अस्पताल पहुंचते हैं और जब तक ओपीडी चलती है, तब तक मरीजों को देखते हैं। एक दिन की ओपीडी में वे कम से कम 100-125 मरीज देखते हैं।
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डा. विक्रम ने बताया कि पीडियाट्रिशियन हैं, जबकि उनकी पत्नी पारुल गाइनेकोलाजिस्ट हैं। डा. विक्रम कहते हैं कि उनका बस चले तो वे अन्य दिन भी अस्पताल में मरीज को देख सकते हैं। मगर प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत सिर्फ एक ही दिन प्राइवेट डाक्टरों को सरकारी अस्पताल में मरीज को देखने की अनुमति है। वो भी महीने की नौ तारीख को। इस दिन सरकारी अस्पतालों में गाइनी के मरीजों की विशेष रूप से जांच की जाती हैं।
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डाक्टर दंपति को ऐसे मिली प्रेरणा

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doctor
डा. विक्रम ने बताया कि उन्हें प्रेरणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान से मिली। दूसरा उन्हें अच्छी तरह से मालूम है कि सरकारी संस्थानों में डाक्टर की कितनी कमी है और उन पर काम का कितना दबाव है। डाक्टरों की कमी का असर न सिर्फ मरीजों पर पड़ता है बल्कि डाक्टरों पर भी दिखाई देता है।

डा. विक्रम पहले सेक्टर 32 स्थित मेडिकल कालेज में नियुक्त थे। इस दौरान उन्होंने देखा है कि डाक्टरों पर मरीजों का बोझ कितना है? एक डाक्टर को रोज 300-400 मरीजों की ओपीडी देखनी पड़ती है। इतने सारे मरीजों को एक ही दिन में देखना आसान काम नहीं है। यह भावना भी उन्हें सरकारी अस्पताल खींच कर ले गई।

प्राइवेट हास्पिटल चलाते हैं सेक्टर 33 में
डा. विक्रम का सेक्टर 33 में बेदी हास्पिटल है। यहां पर वे प्रैक्टिस करते हैं। उनकी पत्नी भी इसी हास्पिटल में डाक्टर हैं। उनका मानना है कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह करने का इससे बेहतर और कोई तरीका नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें वहां आने की अनुमति मिलती रहेगी, तब तक वे अपनी सेवा देते रहेंगे।

यह बहुत अच्छी बात है। चंडीगढ़ के कुछ और डाक्टर भी हैं, जो सरकारी हास्पिटल में जा रहे हैं। यह एक जनहित कार्य है। इससे प्रधानमंत्री के सुरक्षित मातृत्व योजना का सपना भी साकार हो सकेगा।
- डा. अजय अग्रवाल, प्रेसिडेंट आईएमए

सरकारी अस्पतालों में डाक्टरों की कमी को पूरा करने का यह बहुत अच्छा प्रयास है। कई अस्पतालों मे रेडियोलाजिस्ट की बेहद कमी। इसे पूरा करने के लिए यह तरीका अपनाना चाहिए।
- प्रिंस भंढुला, प्रधान फार्मा सेल बीजेपी
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