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जानिए क्यों हो रही है IT क्षेत्र में छंटनी

Wed, 10 May 2017 11:59 AM IST
amarujala.com- Submitted by: आनंद
amarujala.com- Submitted by: आनंद Updated Wed, 10 May 2017 11:59 AM IST
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Know Why Is It Tacking In IT Sector
तकनीक बहुत तेजी से बदलती है और इस क्षेत्र में काम करने वालों के लिए ये एक बड़ी चुनौती है। हर साल की तरह इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी कंपनियां ऐसे कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा रहीं है जिनकी परफॉर्मेन्स उम्मीद के मुताबिक नहीं रही है। हर साल निचले स्तर के आईटी पेशेवरों की नौकरियां जाती हैं लेकिन इस साल बड़े पदों पर बैठे आईटी पेशेवरों पर ये गाज गिर रही है।
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भारत के आईटी उद्योग में इन दिनों छंटाई चल रही है जिसमें मध्य और उच्च स्तरीय प्रबंधकीय पदों पर तलवार चल रही है । इस साल वाइस प्रेसिडेंट, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के पदों पर बैठे दिग्गजों को भी पिंक स्लिप थमाई जा रही है।
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अंडर परफॉर्मर पर नजर

कई बड़ी आईटी कंपनियों के अधिकारियों ने इस बारे में सिर्फ इतना ही कहा है कि ये हर साल होता है कि अंडर परफॉर्मर यानी जिसका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, उन कर्मचारियों को हटाया जाता है। इनफोसिस के एचआर और फाइनेंस विभाग के पूर्व प्रमुख मोहनदास पाई ने बीबीसी से कहा, ``कई बार उद्योगों में पता चलता है कि कई स्तरों पर अव्यवस्था हो गई है। कई लोग ऊंचे पद पर पहुंच जाते हैं लेकिन वहीं पर ठहर जाते हैं और फिर क्लर्क की तरह काम करते रहते हैं। इसलिए हर पांच साल में इस तरह के कदम उठाने पड़ते हैं।'' 
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आईटी क्षेत्र में तेजी से बदलाव

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150 अरब डॉलर का आईटी उद्योग इस समय में कई बदलावों के दौर से गुजर रहा है। दुनिया के कई देशों में भारतीय आईटी कंपनियां सेवाएं दे रही थीं लेकिन अब इनकी मांग में कमी देखी गई है। वो दिन चले गए जब आईटी उद्योग में 35 से 40 फीसदी की सालाना वृद्धि देखी जाती थी। इन दिनों आईटी उद्योग छह से आठ प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है।

आईटी उद्योग से जुड़े रहे अशुतोष वैद्य कहते हैं, ``ऐसा नहीं है कि सिर्फ तकनीक अपग्रेड हुई है। पूरा ढांचा ही बदलता रहा है। भारतीय रेलवे को ही ले लीजिए। रेलवे के कंप्यूटरीकरण में कई साल लग गए। पहले आपको टिकट खरीदने के लिए रेलवे स्टेशन जाना पड़ता था जहां पर आपको उनके कंप्यूटर से टिकट मिलता था। आज आप एक एप पर ये काम कर सकते हैं।''

वैद्य आगे कहते हैं, ''दरअसल बड़े प्रॉजेक्ट जो पहले 15 से 20 महीनों में खत्म होते थे वो अब तीन महीने में ही खत्म हो रहे हैं। इसलिए इनके लिए जरूरी कौशल में बड़ा बदलाव आया है। ये बदलाव सिर्फ तकनीक के क्षेत्र में ही नहीं बल्कि टेस्टिंग, इवैल्यूएशन और प्रॉजेक्ट मैनेजमेन्ट के क्षेत्र में भी आए हैं। इसलिए कुछ खास पदों पर बैठे लोगों को अपने आपको इसके हिसाब से ढालना होगा या बाहर का रास्ता देखना पड़ेगा।''

जो फायदा देगा, वो बचेगा

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रैन्डस्टैड इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मूर्ती के उप्पालूरी ने कहा, '' लोग अब उत्पादकता पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। कंपनियां अब अपने प्रदर्शन को बेहतरीन बनाना चाहती हैं और अब एक साथ कई परिणाम चाहती हैं। उत्पादकता तकनीक में निवेश करके और उतने ही कर्मचारियों के साथ मिल सकती है। इसलिए कंपनियां उच्च पदों पर बैठे कर्मचारियों की तनख्वाहों की या फिर कर्मचारियों की ही छंटाई करने की कोशिश कर रही हैं।''

टीमलीज सॉल्यूशन्स के चेयरमैन मनीष सभरवाल ने कहा, ''दरअसल इन कंपनियों का ढांचा एक पिरामिड की तरह है इसलिए इन्हें उच्च पदों पर कम लोग चाहिए। ये बिल्कुल ऐसा है जैसे सेना में कर्नल का पद ऐसा है जहां से आप या तो ऊपर बढ़ सकते हैं या फिर रिटायर हो सकते हैं।'' मोहनदास पाई का कहना है, ''जो कर्मचारी कंपनी के लिए सीधे कमाई ला रहा है उसे इस छंटाई से फर्क नहीं पड़ेगा, जो कंपनी के लिए कुछ नहीं जोड़ रहा उसे जरूर हटाया जाएगा।''

वहीं उप्पालूरी ने कहा, ''आखिर लक्ष्य है उत्पादकता बढ़ाना और लाभ को बेहतर बनाना।'' इन सबके बावजूद सभरवाल को विश्वास है कि अभी 35 लाख लोगों को रोजगार दे रहे आईटी उद्योग में अगले तीन साल में ये संख्या 50 से 60 लाख हो जाएगी। क्योंकि हर कंपनी अब तकनीक कंपनी बन चुकी है और हर किसी को एक सॉफ्टवेयर की जरूरत है।'' यहां सौ बात की एक बात ये है कि आईटी उद्योग में लंबी पारी खेलनी है तो अपने कौशल को लगातार बढ़ाना और तकनीक के बदलते स्वरूप के साथ कदम से कदम मिलाना, यही सूत्र काम आएगा।
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