H1-B वीजा नियमों को मात देने के लिए भारतीय IT कंपनियों की नई रणनीति
अमेरिका के वीजा नियमों में बदलाव के बाद भारत की प्रौद्योगिक आउसोर्सिंग कंपनियां नई रणनीति बनाने के बारे में विचार कर रही हैं। ये रणनीति डोनाल्ड ट्रंप के नए यूएस वीजा नियम के लागू होने से पहले अपनाई जाएगी।
इकनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक व्हाईट हाउस के एक कार्यकारी आदेश के बाद H1-बी वीजा नियमों में बदलाव किया गया है। इसके लिए अगले महीने से आवेदन प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। यूएस में बदले वीजा नियमों से निपटने के लिए कंपनियों की नजर यूएस के 85 हजार वर्क परमिट पर है।
आईटी कंपनी माइंडट्री के कार्यकारी अध्यक्ष कृष्णकुमार नटराजन कहते हैं कि सबसे अहम बात ये है कि हम कम अनुभव वाले कर्मचारियों के H-1B एप्लीकेशन के आवेदन पर रोक लगाएंगे। इसके साथ ही हम वीजा आवेदन की संख्या कम करेंगे। हमें लगता है कि इससे पूरी इंडस्ट्री में यूएस वीजा आवेदनों में कमी आएगी।
अमेरिका भारतीय कंपनियों के लिए बेहद अहम
अमेरिका 110 अरब डॉलर के बाजर के साथ भारतीय आईटी सर्विस एक्सपोर्ट इंडस्ट्री के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस वजह से कंपनियों ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए डेवलेपमेंट सेंटर बनाने पर भी विचार कर रही है।
बंगलूरू के रहने वाले नटराजन जो कि नैसकॉम के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं, उनके मुताबिक हम स्थानीय स्तर पर भर्ती प्रक्रिया करेंगे क्योंकि हम H-1B वीजा पर आश्रित नहीं रह सकते।
टेक महिंद्र लिमिटेड के सीईओ सीपी गुरनानी कहते हैं कि अब आईटी कंपनियां मल्टिपल वीजा आवेदन के लिए विचार कर रही हैं, क्योंकि इस वक्त सिस्टम लॉटरी के जैसा है। गुरनानी कहते हैं कि हमारी कारोबारी जरूरतों के आधार पर हम समानांतर वीजा आवेदन करेंगे।