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Hindi News ›   Business ›   Cannot Allow One Last Window For Deposit Demonetised Notes, Centre Tells Supreme Court

सरकार का इनकार, पुराने नोट बदलने का ‘एक और मौका’ नहीं मिलेगा

Mon, 17 Jul 2017 09:16 PM IST
amarujala.com- Presented By- मोहित
amarujala.com- Presented By- मोहित Updated Mon, 17 Jul 2017 09:16 PM IST
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Cannot Allow One Last Window For Deposit Demonetised Notes, Centre Tells Supreme Court

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वह 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को जमा करने का ‘एक और मौका’ देने के पक्ष में नहीं है। ऐसा करने से कालेधन पर काबू पाने के लिए की गई नोटबंदी का मकसद ही बेकार हो जाएगा। मौका देने से इसका दुरुपयोग किया जाएगा। बेनामी लेनदेन और नोट जमा कराने में किसी दूसरे व्यक्ति का इस्तेमाल करने के मामले सामने आएंगे। सरकार को यह पता लगाने में परेशानी होगी कि कौन सही है और कौन गलत।

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सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में सरकार ने कहा कि कालेधन पर लगाम लगाने के लिए 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को बंद करने का निर्णय लिया गया था। नोटबंदी के बाद लोगों को पुराने नोटों को बदलने का पर्याप्त समय दिया गया लिहाजा लोगों को और मौका नहीं दिया जा सकता। केंद्र के इस हलफनामे पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को विचार करेगा।
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पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा था अगर कोई व्यक्ति यह साबित करता हो कि उसके पास वैध तरीके से कमाई गई रकम है तो उस व्यक्ति को नोट जमा करने से कैसे महरूम रखा जा सकता है। पीठ ने यह भी कहा था कि अगर किसी व्यक्ति के पास तय समय में पुराने नोटों को जमा नहीं करा पाने का वाजिब कारण हो तो उसे अपने कारणों को बताने का मौका मिलना चाहिए। ऐसे लोगों को पुराने नोटों को जमा कराने का मौका मिलना चाहिए। अदालत ने सरकार से पूछा था कि क्या ऐसे लोगों को मौका मिल सकता है। पीठ ने यह भी कहा कि हमने इस मामले का इसलिए परीक्षण करने का निर्णय लिया था कि बूढ़ी घरेलू महिला सहित अन्य याचिकाकर्ता वास्तव में सरकार के निर्णय से प्रभावित हुए हैं।
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अप्रैल में भी मौका देने पर जताया था एतराज....
गत अप्रैल महीने में भी केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था कि नोटबंदी के बाद पुराने नोटों को जमा करने की मिली छूट का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ। यही कारण है कि 30 दिसंबर के बाद 500 और 1000 रुपये के नोटों को जमा नहीं करने का निर्णय लिया गया। बड़े पैमाने पर दुरुपयोग होने के कारण ही सरकार को अध्यादेश लाने की जरूरत पड़ी। अध्यादेश के जरिए तमाम पुरानी अधिसूचनाओं को अप्रभावी बनाया गया। इसमें वह अधिसूचना भी शामिल थी जिसमें 31 मार्च 2017 तक पुराने नोटों को बदलने की बात कही गई थी। 

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