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एक आईकॉनिक कार की गया और वाराणसी की तीर्थ यात्रा
अमित द्विवेदी, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 03 Feb 2017 05:29 PM IST
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फोर्ड मस्टैंग इंडिया ड्राइव
- फोटो : अमित द्विवेदी
जॉन नाजर, फिलिप टी क्लार्क और जो ओरोस ये तीन ऐसे नाम हैं जिनकी डिजाइन की बदौलत एक कार तैयार हुई जिसका नाम था फोर्ड मस्टैंग। वह साल था 1965, यानी कि जब इंडो-चाइना वार से दोनों देश उबर रहे थे उस समय एक आईकॉनिक कार अस्तित्व में आने की तैयारी कर रही थी। अमेरिकी कंपनी फोर्ड ने जब फोर्ड मस्टैंग को पहली बार पेश किया तो उसको भी नहीं पता था कि वह एक युग की शुरुआत कर रहा है। आप हॉलीवुड फिल्मों का नाम लेते जाइए और इस कार की एक्टिंग का आपको दीदार होता चला जाएगा।
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हॉलीवुड फिल्मों की सुपरस्टार
फोर्ड मस्टैंग इंडिया ड्राइव
- फोटो : अमित द्विवेदी
हॉलीवुड से बॉलीवुड तक सफर जब इस कार ने पूरा किया तब इस कार को भी नहीं पता था कि एकदिन इसे गया जाने का मौका मिलेगा। गया यानी कि हिंदुओं का ऐसा तीर्थस्थल जहां पर लोग अपने पूर्वजों का पिंड दान करने आते हैं। और यहां से ही थोड़ी दूर पर है बौद्व गया जहां पर बौद्व धर्म के अनुयायी अपना श्रद्वा व्यक्त करने पूरी दुनिया से पहुंचते हैं। फोर्ड मस्टैंग गया पहुंची और उसे इस तीर्थस्थल से दूर एक और तीर्थस्थल वाराणसी तक ड्राइव करके जाना था। यह दूरी थी लगभग 250 किलोमीटर की। रेस ट्रैक के बाद यह दूसरा मौका था जब मस्टैंग को चलाने का या यूं कहें मुझे तीर्थ करवाने का मौका मिला। तो आइए दुनिया की लोकप्रिय मस्टैंग की इस तीर्थयात्रा का पुण्य आप भी हमारे साथ उठाइए और जानिए की मस्टैंग की यह यात्रा कैसी रही।
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गया और मस्टैंग
फोर्ड मस्टैंग इंडिया ड्राइव
- फोटो : Amit Dwivedi
सुबह सूरज अपनी आंखें खोल पाता इसके पहले मेरी आंखों से नींद गायब हो गई थी। मेरे कानों में पांच लीटर वी8 इंजिन की आवाज गूंज रही थी। जंपिंग हॉर्स के लोगो वाली मस्टैंग के 401 पीएस का पावर आउटपुट मेरे शरीर में कौंध रहा था। ठंड काफी थी और मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं अपनी रजाई से बाहर क्यूं हूं। बिना देर किए मैं तैयार हो चुका था तभी आशीष ने कॉल किया आ जा भाई निकलते हैं टाइम हो गया अपनी ड्राइव शुरु करने का। जैसे ही गाड़ी का कवर मैंने हटाया वहां पर आसपास घूम रहे लोग ऐसे इकट्ठा हो गए जैसे गया में सलमान खान बिना किसी को सूचना दिए पहुंच गए हों। सबने फोटो खींची पर कुछ को निराश भी होना पड़ा क्योंकि हमें आगे बढ़ना था।
खराब सड़कें और बिजी हाईवे
फोर्ड मस्टैंग इंडिया ड्राइव
- फोटो : Amit Dwivedi
15 किलोमीटर के खराब रास्ते के बाद जब मैं एनएच 4 पर चढ़ा तो मानों इस कार को अपना संसार मिल गया। पलक झपकते ही तेज आवाज के साथ मैं 200 किमीप्रघं की गति पार कर चुका था। लेकिन सच्चाई से आप ज्यादा दूर नहीं रह सकते। लगभग 100 किलोमीटर की ड्राइव के बाद मस्टैंग को न चाहते हुए भी नैनो बनना पड़ा। बिजी हाईवे और खराब सड़कों ने मस्टैंग की तीर्थ ड्राइव को खराब कर दिया था। जो रास्ता मैंने दक्षिण में महज दो घंटे तीन घंटे में पूरा किया था उसमें आज घंटो लग गए। खैर लोग खुश थे क्योंकि उन्हें फोटो खिंचवाने का मौका मिल रहा था मैं दुखी था क्योंकि मस्टैंग में बैठे होने के बावजूद मैं एक नैनो से भी कम गति से ड्राइव कर रहा था। लेकिन इसमें सबसे ज्यादा दिलचस्प टोल नाके थे। रास्ते चलने के लिए भले न हों लेकिन टोल नाके पैसा वसूलने का काम बखूबी कर रहे हैं।
वाराणसी में आपका स्वागत है
फोर्ड मस्टैंग इंडिया ड्राइव
- फोटो : Amit Dwivedi
प्रधानमंत्री मोदी के सपनों की नगरी ने खैर पूरे दिल से मस्टैंग का स्वागत किया। सूरज ढलने से पहले हम पहुंच चुके थे और सूरज ढलने की घाट की छटा को मस्टैंग के साथ कैमरे में कैद करने का इरादा था। एनएच 4 छोड़कर हमने दाहिने मस्टैंग को टर्न किया और मंजिल गूगल बाबा के हिसाब से 20 किलोमीटर दूर और थी। पर इसके बाद जो हुआ न तो उसे मस्टैंग ने सोचा था और न ही मैंने। दूर तक सिर्फ जाम, टूटी सड़कें और यूपी की पुलिस जो गाड़ियां रोककर पैसे ढूंढ रही थी। जहां लोग एक ओर मस्टैंग के साथ फोटो खिंचवा रहे थे वहीं यूपी पुलिस ने मस्टैंग को ही रोक लिया उन्हें यह समझ में तो नहीं आया कि यह कौन सी कार है पर डिग्गी खोलने के बाद वह कार का पिछला दरवाजा खोलने की कोशिश करने लगे। जब तक मैंने उनको समझाया कि इसमें आगे ही दो दरवाजे लगे हैं तब तक वो अपना दिमाग पूरी तरह से लगा चुके थे। मस्टैंग वाराणसी में आई और उसका तीर्थ पूरा हो गया। मुझे लगता है कि अब तक के सबसे खराब रास्ते पर मस्टैंग चली थी क्योंकि इसके ग्राउंड क्लीयरेंस से कहीं ज्यादा गहरी यहां की सड़कें थी। ऊपर से यूपी के ड्राइवरों का ट्रैफिक सेंस। हम अपनी मंजिल पर रात 6 बजे पहुंचे। मस्टैंग को न तो गंगा के दर्शन हुए और न ही घाट पर ढलते सूरज के साथ इसकी तस्वीर कैद हुई। पर मस्टैंग की तीर्थ यात्रा जरूर पूरी हो गई।
मस्टैंग के बारे में
फोर्ड मस्टैंग इंडिया ड्राइव
- फोटो : Amit Dwivedi
फोर्ड मस्टैंग को भारत में पहली बार फोर्ड ने 2016 में ऑटो एक्सपो से ठीक पहले रिवील किया और ऑटो एक्सपो में प्रदर्शित किया था। जुलाई 2016 मे भारत में फाइनल मस्टैंग को 65 लाख एक्सशोरूम दिल्ली में लांच किया गया। इसमें 5 लीटर टीआई वीसीटी इंजिन लगा है जो कि 401 पीएस की शक्ति 6500 आरपीएम पर तथा 515 एनएम का टॉर्क 4250 आरपीएम पर प्रदान करता है। इसमें 6 स्पीड ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन लगा है। इसमें डी और एस मोड दिए गए हैं यानी कि ड्राइव और स्पोर्ट। अगर आपको ज्यादा फन चाहिए तो स्पोर्ट मोड को सेलेक्ट कर सकते हैं। यह टू डोर स्पोर्ट कार है जिसका ग्राउंड क्लीयरेंस 135 मिलीमीटर का है। इसकी टैंक क्षमता 60.9 लीटर की है।
माइलेज के बारे में
फोर्ड मस्टैंग इंडिया ड्राइव
- फोटो : Amit Dwivedi
हालांकि इसका माइलेज अगर आप स्पोर्ट पर चलाओगे से 5 से ज्यादा नहीं मिलेगा लेकिन अगर आप आराम से डी मोड में गाड़ी को ड्राइव करोगे तो एक 7 से 8 तक का माइलेज भी हासिल कर सकते हो। लेकिन मेरा मानना है ऐसी कार रखने वाले माइलेज की नहीं सोचते। इसके पेट्रोल इंजिन की दहाड़ इतनी तेज होती है कि लोग रास्ता डर के मारे छोड़ देते हैं। इस कार में आगे के गेट के तरफ से ही पीछे बैठने वालों का रास्ता जाता है लेकिन पिछली सीटों पर सिर्फ बच्चे ही बैठ सकते हैं।
कब बननी शुरू हुई थी मस्टैंग
फोर्ड मस्टैंग इंडिया ड्राइव
- फोटो : Amit Dwivedi
पहली मस्टैंग को बनाने की शुरूआत 1962 से हुई। उस समय 4 सिलेंडर मिड इंजन का कॉन्सेप्ट पेश किया गया था। इसे फोर्ड मस्टैंग नाम दिया गया है। इसे फोर्ड ने तैयार किया था। यह 2 सीट के साथ खुली छत वाली कार थी, इसकी बॉडी एल्यूमिनियम से बनी थी।
पहला कांसेप्ट
फोर्ड मस्टैंग इंडिया ड्राइव
- फोटो : Amit Dwivedi
1963 में मस्टैंग-2 का कॉन्सेप्ट पेश किया गया, ये 4 सीटर कार थी। यह प्रोडक्शन मॉडल के काफी करीब थी। आखिरकार 17 अप्रैल 1964 को वो दिन आ गया, जब फोर्ड ने पहली पीढ़ी यानी फर्स्ट जनरेशन मस्टैंग को लॉन्च किया। शुरू से ही कार को बेहतर रिस्पॉन्स मिला। सिर्फ अमेरिका में ही 1964 में इस कार की 1,21,538 यूनिट बिक गई थीं।
पहला अपडेट
फोर्ड मस्टैंग इंडिया ड्राइव
- फोटो : अमित द्विवेदी
1965 में इसे कुछ अपडेट किया गया, जैसा कि आजकल के फेसलिफ्ट मॉडल हैं। इनमें कुछ 1964 में बनीं कारें भी थीं, जो ओरिजनल मस्टैंग थीं। इन्हें 1964½ ओरिजनल नाम दिया गया। इन्हें तीन इंजन ऑप्शन में उतारा गया था। इसमें सबसे पावरफुल इंजन 5.0 लीटर वी-8 था। उस समय यह कार 212 पीएस की शक्ति देती थी। 6वीं जनरेशन की मस्टैंग आने से पहले कार को 50 बार अपडेट किया जा चुका था।