फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

काबुल ब्लास्ट से बढ़ी परेशानी: अमेरिका के मन पर चुभता कांटा बन गया है अफगानिस्तान

Sat, 28 Aug 2021 03:42 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

खुफिया रिपोर्टों ने बाइडन प्रशासन की परेशानी को और बढ़ा दिया है कि अफगानिस्तान में अभी और आतंकवादी हमले हो सकते हैं। अमेरिका के सेंट्रल कमान के प्रमुख जनरल केनेथ मेकेंजी ने गुरुवार को ये चेतावनी दी थी कि काबुल हवाई अड्डे पर हमले का जिम्मेदार संगठन आईएसआईएस-के रॉकेट हमले भी कर सकता है...
विज्ञापन
काबुल एयरपोर्ट - फोटो : PTI (File Photo)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अमेरिकी फौज के अभी अफगानिस्तान में रहते हुए ही तालिबान के काबुल पर कब्जा कर लेने से अमेरिका में पहले से बेचैनी थी। काबुल हवाई अड्डे पर हुए हमले और उसमें 13 अमेरिकी फौजियों के मारे जाने के बाद यहां माहौल और बिगड़ गया। अब अमेरिकी मीडिया में कहा जा रहा है कि अमेरिका ने जिस बिंदु से अपने सबसे लंबे युद्ध की शुरुआत की थी, उसकी समाप्ति के समय चीजें वहीं वापस आ गई हैं।

विज्ञापन


इसका सबसे बुरा असर राष्ट्रपति जो बाइडन की छवि पर पड़ा है। अफगानिस्तान से सैनिक वापस बुलाने के उनके फैसले की देशभर में कड़ी आलोचना हुई है। इन खुफिया रिपोर्टों ने बाइडन प्रशासन की परेशानी को और बढ़ा दिया है कि अफगानिस्तान में अभी और आतंकवादी हमले हो सकते हैं। अमेरिका के सेंट्रल कमान के प्रमुख जनरल केनेथ मेकेंजी ने गुरुवार को ये चेतावनी दी थी कि काबुल हवाई अड्डे पर हमले का जिम्मेदार संगठन आईएसआईएस-के रॉकेट हमले भी कर सकता है। इसके अलावा उसके आत्मघाती हमलों की आशंका भी बनी हुई है।



अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने काबुल हमलों केबाद कहा- ‘हम माफ नहीं करेंगे, न ही हम इसे भूलेंगे। हम उन्हें ढूंढ निकालेंगे और उनसे कीमत वसूल करेंगे।’ लेकिन टीवी चैनल सीएनएन की वेबसाइट पर छपे एक विश्लेषण में कहा गया है कि सख्त भाषा में दी गई राष्ट्रपति की चेतावनी अमेरिकी जनमत के सामने अपनी ताकत जताने की कोशिश थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

इस टिप्पणी में कहा गया है- ‘विडंबना यह है कि बाइडन ने बदला लेने का जो संकल्प जताया, उसमें 11 सितंबर 2001 के आतंकवादी हमलों के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्लू बुश के जताए संकल्प की झलक मिली। बुश ने कहा था कि ये लड़ाई दूसरों की शर्तों पर और उनके चुने समय के मुताबिक शुरू हुई है। लेकिन यह हमारे चयन के मुताबिक खत्म होगी। लेकिन बाइडन के संकल्प से यह साबित नहीं हुआ कि बुश ने जो वादा किया था, वह पूरा हुआ है।’

दूसरे विश्लेषकों ने कहा है कि बाइडन ने अफगानिस्तान में अमेरिकी मिशन उस स्थिति में खत्म किया है, जब उनके प्रशासन का उद्देश्य सिर्फ अफगानिस्तान से अमेरिकी लोगों को सुरक्षित निकाल लेना भर रह गया है। वहां आतंकवाद को जड़ से खत्म करने का अमेरिका सरकार का वादा वे पूरा नहीं कर पाए हैं। 20 साल तक अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान में बने रहने के बाद हालत यह है कि अमेरिका अपने लोगों की सुरक्षा के लिए भी उसी संगठन पर निर्भर दिख रहा है, जिसकी सरकार को हटाने के लिए वहां हमला किया गया था।

मगर बाइडन समर्थकों का कहना है कि पिछले तीन राष्ट्रपतियों की नाकामी का ठीकरा वर्तमान राष्ट्रपति के सिर फोड़ा जा रहा है। उनका कहना है कि अफगानिस्तान में अमेरिका अपने मकसद में कई वर्ष पहले ही नाकाम हो चुका था। फिर अमेरिकी फौज लौटाने का तालिबान के साथ समझौता पूर्व डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने किया था। बाइडन ने उसी फैसले को आगे बढ़ाया है। लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि नाकामी चाहे जिसकी भी हो, इससे अमेरिका की छवि खराब हुई है। अफगानिस्तान में स्थिति जितनी बिगड़ेगी, लोग महाशक्ति के रूप में अमेरिका की क्षमता पर उतने ही अधिक सवाल उठाने लगेंगे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें