उन्होंने अपने ब्लॉग सीओपी डायरी में लिखा, हम इस अहम जलवायु सम्मेलन के समापन की ओर बढ़ रहे हैं। जलवायु परिवर्तन को रोकने को सामाजिक-आर्थिक बदलाव के लिए विकासशील दुनिया को जलवायु वित्त मुहैया कराने की जरूरत है।
पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने शुक्रवार को कहा कि दुनिया को वर्ष 2015 में हुए पेरिस समझौते के तहत जताई गई प्रतिबद्धताओं का सम्मान करने के लिए साथ आना चाहिए और इसे अमल में लाने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि विकासशील दुनिया को जलवायु वित्त उपलब्ध करवाना चाहिए।
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स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित संयुक्त राष्ट्र के 26वें जलवायु सम्मेलन सीओपी-26 में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे यादव ने अपने ब्लॉग में लिखा कि अमीर देशों ने सदियों से शुरुआती औद्योगिकरण का लाभ जीवाश्म ईंधन जलाकर प्राप्त किया और अपनी अर्थव्यवस्थाओं का विकास किया और अब उन्हें उन अर्थव्यवस्थाओं की जरूरतों को समायोजित करना होगा, जिन्हें स्वच्छ व हरित ऊर्जा की ओर बढ़ना है।
उन्होंने अपने ब्लॉग सीओपी डायरी में लिखा, हम इस अहम जलवायु सम्मेलन के समापन की ओर बढ़ रहे हैं। जलवायु परिवर्तन को रोकने को सामाजिक-आर्थिक बदलाव के लिए विकासशील दुनिया को जलवायु वित्त मुहैया कराने की जरूरत है। यादव ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृव में भारत जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए अधिक प्रयास करने को तैयार है, लेकिन साथ ही उन्होंने (पीएम मोदी ने) विकसित दुनिया को याद दिलाया कि ऐतिहासिक कारणों से वे मौजूदा संकट का सामना कर रहे हैं और उन्होंने वैश्विक पर्यावरण की कीमत पर प्रगति की है।