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World Migration Report : यात्राओं पर प्रतिबंध, सीमाएं सील फिर भी कोरोना के प्रभाव के बावजूद 2020 में अंतरराष्ट्रीय प्रवास बढ़ा

Thu, 02 Dec 2021 08:02 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

एक ताजा रिपोर्ट में, यूएन इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माईग्रेशन (आईओएम) ने कहा कि 2020 में अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों की संख्या बढ़कर 281 मिलियन हो गई जो वैश्विक आबादी का 3.6 प्रतिशत है। अधिकांश लोग उन देशों में रहना पसंद करते हैं जहां वे पैदा हुए थे लेकिन मजबूरियों के कारण कुछ लोगों को अपना देश छोड़ना पड़ता है। 30 में से केवल एक प्रवासी होते हैं।
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Syria - फोटो : Social Media
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विस्तार
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संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि कोरोना महामारी के कारण यात्राओं पर लगे प्रतिबंध और कई देशों की सीमाओं के बंद होने के बाद भी 2020 में अंतरराष्ट्रीय प्रवास बढ़ा है। संयुक्त राष्ट्र ने बुधवार को कहा कि लाखों लोगों ने पिछले साल दूसरे देशों में प्रवास किया है। एक ताजा रिपोर्ट में, यूएन इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन फॉर माईग्रेशन (आईओएम) ने कहा कि 2020 में अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों की संख्या बढ़कर 281 मिलियन हो गई जो वैश्विक आबादी का 3.6 प्रतिशत है। जबकि 2019 में 272 मिलियन प्रवासी थे। 

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इस रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रवासियों की यह संख्या 1970 की तुलना में लगभग 200 मिलियन अधिक है। 1970 में अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों की संख्या 84 मिलियन थी और जो वैश्विक जनसंख्या का 2.3 प्रतिशत था।रिपोर्ट के लेखक मैरी मैकऑलिफ ने मीडिया को कहा कोरोना ने 'निस्संदेह दुनिया को बदल दिया है, और इसने प्रवासन के हर पहलू को छुआ है।'   रिपोर्ट के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों का अनुपात दुनिया भर में काफी अलग-अलग होता है। जैसे संयुक्त अरब अमीरात, 88% से अधिक आबादी अंतरराष्ट्रीय प्रवासी हैं।

कोरोना के कारण दुनिया भर में यात्राएं रुक गई थीं
रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना के कारण दुनिया भर में प्रवास और यात्राओं के कारण बड़ी बाधा खड़ी हुई थी। महामारी के पहले वर्ष के दौरान, लगभग 108,000 यात्रा प्रतिबंध लगाए गए थे, जबकि विश्व स्तर पर हवाई यात्रियों की संख्या 2019 में 4.5 बिलियन से घटकर 60 प्रतिशत घटकर 1.8 बिलियन हो गई।  कुछ देशों ने विदेशी नागरिकों के सभी तरह के प्रवेश को रोक लगा दी थी। कुछ ने कुछ खास देशों के नागरिकों पर प्रतिबंध लगा दिया, जबकि कुछ देशों ने अपने स्वयं के नागरिकों सहित सभी लोगों के आने-जाने को रोकने के लिए सीमाओं को पूरी तरह से बंद कर दिया था।  
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अपने देश में भी विस्थापित हुए लोग
वहीं संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े यह भी बताते हैं कि आपदाओं, संघर्षों और हिंसा के कारण देशों के भीतर विस्थापन पिछले साल बढ़ गया। 2020 के अंत में कुछ 40.5 मिलियन लोग अपने ही देश में विस्थापितों की जिंदगी जीने को मजबूर हुए। एक साल पहले यह संख्या करीब 31.5 मिलियन से अधिक थी।

आईओएम प्रमुख एंटोनियो विटोरिनो ने एक बयान में कहा,  मानव इतिहास में ऐसा हमने पहले कभी नहीं देखा। एक विरोधाभास देख रहे हैं। कोरोना महामारी ने जहां अरबों लोगों को प्रभावित किया वहीं कई लाख लोग अपने ही देशों में विस्थापित हो गए हैं। 
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